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ईरान युद्ध ने अमेरिका के महंगे हथियारों का भंडार कर दिया खाली, सैन्य तैयारियों पर पड़ा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध ने अमेरिका के महंगे और उन्नत हथियारों के स्टॉक को तेजी से खत्म कर दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन के आंतरिक आकलन में खुलासा हुआ है कि युद्ध में 1,100 JASSM-ER क्रूज मिसाइलें, 1,000 से ज्यादा टोमाहॉक मिसाइलें और 1,200 से अधिक पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल हो चुकी हैं।

ये सभी हथियार चीन और रूस जैसे बड़े दुश्मनों से लड़ने के लिए रखे गए थे। हर टोमाहॉक मिसाइल की कीमत करीब 3.6 मिलियन डॉलर और पैट्रियट की 4 मिलियन डॉलर है। युद्ध के पहले दो दिनों में ही अमेरिका ने 5.6 अरब डॉलर के हथियार खर्च कर दिए।

युद्ध की कुल लागत 28 से 35 अरब डॉलर के बीच बताई जा रही है। इतनी तेज खपत के कारण अमेरिका को यूरोप और एशिया से हथियारों को मध्य पूर्व में स्थानांतरित करना पड़ा है, जिससे नाटो की तैयारियां और इंडो-पैसिफिक में चीन-उत्तर कोरिया के खिलाफ क्षमता कमजोर हुई है।

विश्लेषकों का कहना है कि इन महंगे हथियारों को दोबारा भरने में कई साल लग सकते हैं। उत्पादन दर बहुत कम है और कांग्रेस से पर्याप्त फंडिंग भी नहीं मिल रही है।

यह युद्ध अमेरिकी सेना की लंबे समय तक उच्च तीव्रता वाले संघर्ष लड़ने की क्षमता पर सवाल खड़ा कर रहा है।

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