
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2021 के तहत लगातार झूठी FIR दर्ज कराए जाने पर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने इसे “परेशान करने वाला ट्रेंड” बताया।
बहराइच जिले के एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने कहा कि 18 साल की लड़की के बयान में साफ इनकार करने के बावजूद पुलिस ने FIR में धर्मांतरण और अपहरण के आरोप बरकरार रखे, जो अजीब है। लड़की ने कहा था कि वह पिछले 3 साल से याचिकाकर्ता के साथ आपसी सहमति से रिश्ते में है और किसी भी जबरन धर्मांतरण या शादी का आरोप गलत है।
कोर्ट ने राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को निजी हलफनामा दाखिल कर बताने का निर्देश दिया कि ऐसे झूठे मामलों में क्या कार्रवाई की जा रही है। हलफनामा 19 मई तक दाखिल करना होगा।
कोर्ट ने शिकायतकर्ता (लड़की के पिता) को भी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा, ताकि यह बताया जा सके कि पूरी तरह झूठी FIR दर्ज कराने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
इस बीच, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार को तीन दिनों के अंदर सभी पक्षों को पर्याप्त सुरक्षा देने का आदेश दिया है।


