
बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आज जो पार्टियां आरक्षण के भीतर कोटे की बात कर रही हैं, उन्होंने सत्ता में रहते हुए दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों को हमेशा नजरअंदाज किया।
मायावती ने कांग्रेस पर ‘गिरगिट’ की तरह रंग बदलने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने कभी भी आरक्षित वर्गों के लिए अलग कोटा लागू करने की पहल नहीं की। उन्होंने याद दिलाया कि ओबीसी के लिए मंडल कमीशन की 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश भी कांग्रेस ने लागू नहीं की थी। यह आरक्षण बीएसपी के अथक प्रयासों और वी.पी. सिंह सरकार के कारण लागू हो सका।
समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने जुलाई 1994 में ही पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का लाभ देने की रिपोर्ट दी थी, लेकिन सपा सरकार ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। जबकि बीएसपी की पहली सरकार बनते ही 3 जून 1995 को इस रिपोर्ट को तुरंत लागू कर दिया गया। मायावती ने तंज कसते हुए कहा कि अब सत्ता से बाहर होने पर सपा राजनीतिक फायदे के लिए महिलाओं के अलग आरक्षण की बात कर रही है, जबकि सत्ता में रहते हुए इनका रवैया हमेशा संकीर्ण जातिवादी रहा।
जनगणना और परिसीमन पर मायावती ने कहा कि महिला आरक्षण को जल्द लागू करना हो तो उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर कदम उठाए जाएं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर आज कांग्रेस सत्ता में होती तो वह भी भाजपा की तरह ही व्यवहार करती, क्योंकि दोनों की नीयत में खोट है।
बीएसपी प्रमुख ने एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज को सलाह दी कि कोई भी पार्टी उनके वास्तविक हितों के लिए गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि फिलहाल महिला आरक्षण के तहत जो कुछ मिल रहा है, उसे स्वीकार कर लें। सही समय आने पर इनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने अपील की कि इन वर्गों को किसी के बहकावे में आने के बजाय अपने पैरों पर खड़े होकर समाज को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना चाहिए।



