कोरोना का कहर जितना चरम पर है, पुलिस की कार्रवाई उतनी ही हो रही ढीली, एक महीने में केवल 15 मुकदमे

कोरोना का कहर जितना चरम पर है, पुलिस की कार्रवाई उतनी ही ढीली हो रही है। हर गली-मोहल्ले व दुकानों में लोगों की भीड़ नियमों की धज्जियां उड़ा रही है। कार्रवाई पर नजर डालें तो अगस्त में धारा 188 के सिर्फ 15 मुकदमे दर्ज किए हैं। जबकि चालान काटने पर पुलिस का पूरा ध्यान है। एसएसपी मुुुुुुुनिराज ने कहा है कि शासन की ओर से जारी नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है। कई बार चेतावनी भी दी जाती है। बार-बार नियम तोडऩे वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। 

31 दिनों में धारा 188 के महज 15 मुकदमे ही दर्ज
कोरोना के शुरुआती धमक के दौरान पुलिस ने लोगों को जागरूक करने में कसर नहीं छोड़ी। मनोरंजन के रूप में गीत-संगीत व लाउडस्पीकर के जरिये लोगों को समझाया तो मुकदमों और ऑड ईवन जैसी व्यवस्था लाकर सख्ती भी की। एक-एक दिन में दर्जनों मुकदमे दर्ज किए गए। समय के साथ कोरोना का कहर बढ़ता गया। हालात ये हैं कि अब रोज 100 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई सिर्फ ई-चालान तक सिमट गई है। चालान तो हजारों हो रहे हैं, लेकिन सड़कों, गलियों में जमा होने वाली भीड़ पुलिस को अब नजर नहीं आती।  अगस्त के 31 दिनों में धारा 188 के महज 15 मुकदमे ही दर्ज हुए हैं। इनमें भी अधिकतर मुकदमे दो दिनी लॉकडाउन में हुए। सामान्य दिनों में पुलिस की कार्रवाई ढीली है।

पहले 40 दिन में 1043 मुकदमे

पहले लॉकडाउन में पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी। 21 मार्च से 30 अप्रैल के बीच 1043 मुकदमे दर्ज किए गए थे।

तीन माह के आंकड़ों पर नजर
माह, मुकदमे
अगस्त, 15
जुलाई, 45
जून, 15
मई, 55

नियमों का सख्ती से पालन होगा
शासन की ओर से जारी नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है। कई बार चेतावनी भी दी जाती है। बार-बार नियम तोडऩे वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

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