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लोकसभा में परिसीमन विधेयक के बाद राज्यों की सीटों में कितना बदलाव होगा, आसान भाषा में समझें

संसद के विशेष सत्र में सरकार तीन अहम बिल ला रही है – संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक। इनके जरिए लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है (815 राज्यों के लिए + 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए)।

इसके साथ महिला आरक्षण (33%) को 2029 चुनाव से लागू करने का रास्ता साफ होगा। परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा।

सरकार का दावा

सरकार का कहना है कि हर राज्य की सीटें लगभग 50% बढ़ेंगी। इससे किसी भी राज्य का मौजूदा अनुपात (proportion) नहीं घटेगा। दक्षिणी राज्यों को परिवार नियोजन के बावजूद नुकसान नहीं होगा, बल्कि सीटें बढ़ेंगी।

विपक्ष का आरोप

विपक्ष (खासकर DMK, कांग्रेस, TMC आदि) कह रहा है कि इससे उत्तर-दक्षिण विभाजन बढ़ेगा। दक्षिणी राज्यों (जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण किया) की सांसदों की सापेक्ष ताकत घट सकती है, जबकि उत्तर के राज्यों (UP, Bihar आदि) को ज्यादा फायदा होगा।

राज्यों की सीटों में प्रस्तावित बदलाव (लगभग)

राज्य / केंद्र शासित प्रदेशमौजूदा सीटेंप्रस्तावित सीटें (लगभग)बढ़ोतरी
उत्तर प्रदेश80120–125+40–45
महाराष्ट्र4872–75+24–27
पश्चिम बंगाल4263+21
बिहार4060–62+20–22
तमिलनाडु3959–61+20–22
मध्य प्रदेश2944+15
कर्नाटक2842+14
गुजरात2639+13
आंध्र प्रदेश2538+13
राजस्थान2538+13
ओडिशा2132+11
केरल2030–31+10–11

नोट: ये आंकड़े प्रस्तावित/अनुमानित हैं। अंतिम संख्या परिसीमन आयोग तय करेगा। सभी राज्यों में सीटें बढ़ेंगी, लेकिन उत्तर के बड़े राज्यों को नंबर में ज्यादा बढ़ोतरी मिलेगी।

मुख्य बातें

  • लोकसभा की कुल सीटें बढ़ने से महिला आरक्षण लागू करने में कोई मौजूदा सीट नहीं घटेगी।
  • राज्य विधानसभाओं की सीटें भी इसी अनुपात में बढ़ाई जाएंगी।
  • सरकार कह रही है – “कोई राज्य नहीं हारेगा, हर राज्य को फायदा होगा।”
  • विपक्ष कह रहा है – “दक्षिणी राज्यों की सापेक्ष भागीदारी घटेगी।”

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