
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को विभिन्न उच्च न्यायालयों में जमानत सुनवाई में हो रही देरी की बढ़ती समस्या पर प्रकाश डाला और कहा कि लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और अनियमित सुनवाई के पैटर्न से न्याय प्रक्रिया धीमी हो रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली पीठ सनी चौहान बनाम पंजाब राज्य मामले की समीक्षा कर रही थी, जिसके दौरान उसने पहले देशभर के उच्च न्यायालयों से लंबित जमानत याचिकाओं के विस्तृत आंकड़े मांगे थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक समिति को एक ऐसी प्रणाली बनाने की सिफारिश की, जिसमें प्रत्येक जमानत याचिका की सुनवाई के लिए एक निश्चित तिथि तय हो। न्यायालय ने “न्यायिक संसाधनों के एकत्रीकरण” का सुझाव दिया और दैनिक मामलों की सूची तैयार करते समय जमानत संबंधी मामलों को प्राथमिकता देने को कहा। पीठ ने आगे कहा कि पटना उच्च न्यायालय में भी इसी तरह की व्यवस्था की आवश्यकता है, जहां जमानत की सुनवाई अक्सर लंबे समय तक टलती रहती है।



