Tuesday , October 24 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : बच्चे की सीख

प्रेरक-प्रसंग

बचपन से ही एक महिला को अध्यापिका बनने तथा बच्चों को मारने का बड़ा शौक था। जब वह पाँच साल की थी तब छोटे-छोटे बच्चों का स्कूल लगा कर बैठ जाती। उन्हें लिखाती पढ़ाती और जब उन्हें कुछ न आता तो खूब मारती। बड़ी होकर वह अध्यापिका बन गई। स्कूल ...

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प्रेरक-प्रसंग : वर्तमान क्षण

प्रेरक-प्रसंग

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। महाराज युधिष्ठिर राजा बन चुके थे। अपने चारों छोटे भाइयों की सहायता से वह राजकाज चला रहे थे प्रजा की भलाई के लिए पाँचों भाई मिलजुल कर जुटे रहते। जो कोई दीन-दुखी फरियाद लेकर आता, उसकी हर प्रकार से सहायता की जाती। एक ...

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प्रेरक-प्रसंग : खुशी का मंत्र

प्रेरक-प्रसंग

एक बार की बात है, दीपावली की शाम थी, मैं दिये सजा ही रहा था कि एक ओर से दीपों के बात करने की आवाज़ सुनाई दी। मैंने ध्यान लगा कर सुना। चार दीपक आपस में बात कर रहे थे। कुछ अपनी सुना रहे थे कुछ दूसरों की सुन रहे ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्वभाव

प्रेरक-प्रसंग

एक बार एक भला आदमी नदी किनारे बैठा था। तभी उसने देखा एक बिच्छू पानी में गिर गया है। भले आदमी ने जल्दी से बिच्छू को हाथ में उठा लिया। बिच्छू ने उस भले आदमी को डंक मार दिया। बेचारे भले आदमी का हाथ काँपा और बिच्छू पानी में गिर ...

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प्रेरक-प्रसंग : समय की कीमत

प्रेरक-प्रसंग

बात साबरमती आश्रम में गांधी जी के प्रवास के दिनों की है। एक दिन एक गाँव के कुछ लोग बापू के पास आए और उनसे कहने लगे, “बापू कल हमारे गाँव में एक सभा हो रही है, यदि आप समय निकाल कर जनता को देश की स्थिति व स्वाधीनता के ...

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प्रेरक-प्रसंग : अहंकार एक दुर्गुण

प्रेरक-प्रसंग

एक मूर्तिकार उच्चकोटि की ऐसी सजीव मूर्तियाँ बनाता था, जो सजीव लगती थीं। लेकिन उस मूर्तिकार को अपनी कला पर बड़ा घमंड था। उसे जब लगा कि जल्दी ही उसकी मृत्यु होने वाली है तो वह परेशानी में पड़ गया। यमदूतों को भ्रमित करने के लिये उसने एकदम अपने जैसी ...

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प्रेरक-प्रसंग : आत्मविश्वास

प्रेरक-प्रसंग

घटना है वर्ष 1960 की। स्थान था यूरोप का भव्य ऐतिहासिक नगर तथा इटली की राजधानी रोम। सारे विश्व की निगाहें 25 अगस्त से 11 सितंबर तक होने वाले ओलंपिक खेलों पर टिकी हुई थीं। इन्हीं ओलंपिक खेलों में एक बीस वर्षीय अश्वेत बालिका भी भाग ले रही थी। वह ...

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प्रेरक-प्रसंग : क़ानून का पालन

प्रेरक-प्रसंग

नागपुर की घटना है। कृष्ण माधव घटाटे गुरु जी मा. स. गोलवरकर को कार में कहीं ले जा रहे थे। कार पटवर्धन मैदान के निकट चौराहे के पास पहुँची। यह चौराहा काफ़ी छोटा है। उस समय चौराहे पर यातायात पुलिस नहीं थी। इसलिए कृष्ण माधव घटाटे ने चौराहे का चक्कर ...

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प्रेरक-प्रसंग : कुशल कलाकार

प्रेरक-प्रसंग

फ़िल्म जगत के जाने-माने कलाकार बलराज साहनी अपनी विख्यात फ़िल्म “दो बीघा ज़मीन” तैयार कर रहे थे। उसमें उनकी भूमिका एक रिक्शा चालक की थी। वह ठहरे पढ़े-लिखे शहरी, रिक्शा-चालक होता है, बेपढ़ा देहाती। वह सोचने लगे कि उनकी भूमिका कहीं दर्शकों को बनावटी न लगे। अत: उन्होंने उसकी परीक्षा ...

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प्रेरक-प्रसंग : ईश्वर का न्याय

प्रेरक-प्रसंग

भिक्षा लेकर लौटते हुए एक शिक्षार्थी ने मार्ग में मुर्गे और कबूतर की बातचीत सुनी। कबूतर मुर्गे से बोला- “मेरा भी क्या भाग्य है? भोजन न मिले, तो मैं कंकर खाकर भी पेट भर लेता हूँ। कहीं भी सींक, घास आदि से घोंसला बना कर रह लेता हूँ। माया मोह ...

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