Tuesday , June 27 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : महात्मा गांधी

प्रेरक-प्रसंग

एक दिन मालाबार की ओर से कांग्रेस कमेटी का मंत्री गांधी जी के पास आया। उसने सार्वजनिक कोष का बहुत-सा धन लोकसेवा में ख़र्च किया था। लेकिन हिसाब-किताब में वह कच्चा था। सारा जमा-ख़र्च वह ठीक से पेश न कर पाया। हज़ार रुपये की बात थी। स्थानीय कार्यकारिणी का निर्णय ...

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प्रेरक-प्रसंग : विश्वास की डोर

प्रेरक-प्रसंग

एक डाकू था जो साधू के भेष में रहता था। वह लूट का धन गरीबों में बाँटता था। एक दिन कुछ व्यापारियों का जुलूस उस डाकू के ठिकाने से गुज़र रहा था। सभी व्यापारियों को डाकू ने घेर लिया। डाकू की नज़रों से बचाकर एक व्यापारी रुपयों की थैली लेकर ...

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प्रेरक-प्रसंग : महानता के गुण

प्रेरक-प्रसंग

एक बालक नित्य विद्यालय पढ़ने जाता था। घर में उसकी माता थी। माँ अपने बेटे पर प्राण न्योछावर किए रहती थी, उसकी हर माँग पूरी करने में आनंद का अनुभव करती। पुत्र भी पढ़ने-लिखने में बड़ा तेज़ और परिश्रमी था। खेल के समय खेलता, लेकिन पढ़ने के समय का ध्यान ...

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प्रेरक-प्रसंग : अरस्तु के गुरु

प्रेरक-प्रसंग

एक बार एक विद्वान यूनान के दार्शनिक अरस्तु से मिलने गये । उन्होंने अरस्तु से पूछा, ‘में आपके गुरु से मिलना चाहता हूँ ।’ अरस्तु ने कहा, ‘आप हमारे गुरु से मिल नहीं सकते ।’ विद्वान ने कहा क्या अब वो इस दुनियां में नहीं हैं ?’ अरस्तु ने कहा ...

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प्रेरक-प्रसंग : नेताजी सुभाष चंद्र बोस

प्रेरक-प्रसंग

बात उस समय की है जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंग्लैंड में आईसीएस का इंटरव्यू देने गए। वहां उनका इंटरव्यू लेने वाले सभी अधिकारी अंग्रेज थे। दरअसल, वे भारतीयों को किसी उच्च पद पर नहीं देखना चाहते थे। इसलिए इंटरव्यू में अजीबो-गरीब और कठिन से कठिन प्रश्न पूछकर भारतीयों को ...

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प्रेरक-प्रसंग : भगवान बुद्ध

प्रेरक-प्रसंग

भगवान बुद्ध धर्म प्रचार करते हुए काशी की ओर जा रहे थे। रास्ते में जो भी उनके सत्संग के लिए आता, उसे वह बुराइयां त्यागकर अच्छा बनने का उपदेश देते। उसी दौरान उन्हें उपक नाम का एक गृहत्यागी मिला। वह गृहस्थ को सांसारिक प्रपंच मानता था और किसी मार्गदर्शक की ...

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प्रेरक-प्रसंग : महात्मा गांधी

प्रेरक-प्रसंग

बात 1926 की है। गांधी जी उन दिनों साबरमती आश्रम में रहा करते थे। दीनबंधु सी.एफ़. एण्ड्रूज़ भी उन दिनों वहीं थे। दीनबन्धु दया के सागर थे, दूसरों का दुख देख वे द्रवित हो जाते थे। एक दिन मालाबार की ओर से कांग्रेस कमेटी का मंत्री गांधी जी के पास ...

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प्रेरक-प्रसंग : महात्मा गांधी

प्रेरक-प्रसंग

बात 1926 की है। गांधी जी उन दिनों साबरमती आश्रम में रहा करते थे। दीनबंधु सी.एफ़. एण्ड्रूज़ भी उन दिनों वहीं थे। दीनबन्धु दया के सागर थे, दूसरों का दुख देख वे द्रवित हो जाते थे। एक दिन मालाबार की ओर से कांग्रेस कमेटी का मंत्री गांधी जी के पास ...

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प्रेरक-प्रसंग : सोच का फर्क

प्रेरक-प्रसंग

एक शहर में एक धनी व्यक्ति रहता था। उसके पास बहुत पैसा था और उसे इस बात पर बहुत घमंड भी था। एक बार किसी कारण से उसकी आँखों में इंफेक्शन हो गया। आँखों में बुरी तरह जलन होती थी । वह डॉक्टर के पास गया लेकिन डॉक्टर उसकी इस ...

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प्रेरक-प्रसंग : राजा और किसान

प्रेरक-प्रसंग

चाँदपुर इलाके के राजा कुँवरसिंह जी बड़े अमीर थे। उन्हें किसी चीज़ की कमी नहीं थी, फिर भी उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं था। बीमारी के मारे वे सदा परेशान रहते थे। कई वैद्यों ने उनका इलाज किया, लेकिन उनको कुछ फ़ायदा नहीं हुआ। राजा की बीमारी बढ़ती गई। सारे नगर ...

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