Friday , August 18 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग : निंदा करने की प्रवृत्ति

प्रेरक-प्रसंग

एक विदेशी को अपराधी समझ जब राजा ने फांसी का हुक्म सुनाया तो उसने अपशब्द कहते हुए राजा के विनाश की कामना की। राजा ने अपने मंत्री से, जो कई भाषाओं का जानकार था, पूछा- यह क्या कह रहा है? मंत्री ने विदेशी की गालियां सुन ली थीं, किंतु उसने ...

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प्रेरक-प्रसंग : सरदार वल्लभ भाई पटेल

विद्यार्थियों की एक टोली पढ़ने के लिए रोज़ाना अपने गाँव से छह-सात मील दूर दूसरे गाँव जाती थी। एक दिन जाते-जाते अचानक विद्यार्थियों को लगा कि उन में एक विद्यार्थी कम है। ढूँढने पर पता चला कि वह पीछे रह गया है। उसे एक विद्यार्थी ने पुकारा, “तुम वहाँ क्या ...

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प्रेरक प्रसंग : सुंदर नाक

प्रेरक प्रसंग

एक ग़रीब मनुष्य ने देवता से वर प्राप्त किया था। देवता संतुष्ट हो कर बोले तुम ये पासा लो। इस पाँसे को जिन किन्हीं तीन कामनाओं से तीन बार फेंकोगे वे तीनों पूरी हो जाएँगी। वह आनंदोल्लासित हो घर जाकर अपनी स्त्री के साथ परामर्श करने लगा क्या वर माँगना ...

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प्रेरक प्रसंग : पिंजरे के पंछी

प्रेरक प्रसंग

चंद्र प्रकाश के चार साल के बेटे को पंछियों से बेहद प्यार था। वह अपनी जान तक न्योछावर करने को तैयार रहता। ये सभी पंछी उसके घर के आंगन में जब कभी आते तो वह उनसे भरपूर खेलता। उन्हें जी भर कर दाने खिलाता। पेट भर कर जब पंछी उड़ते ...

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प्रेरक प्रसंग : पश्चाताप

प्रेरक प्रसंग

कर्णवास का एक पंडित महर्षि दयानंद सरस्वती को प्रतिदिन गालियाँ दिया करता था, पर महर्षि शांत भाव से उन्हें सुनते रहते और उसे कुछ भी उत्तर न देते। एक दिन जब वह गाली देने नहीं आया तब महर्षि ने लोगों से उसके न आने का कारण पूछा। लोगों ने बताया, ...

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प्रेरक प्रसंग : दीपों की बातें

प्रेरक प्रसंग

एक बार की बात है, दीपावली की शाम थी, दिये सजाए जा रहे थे कि एक ओर से दीपों के बात करने की आवाज़ सुनाई दी। मैंने ध्यान लगा कर सुना। चार दीपक आपस में बात कर रहे थे। कुछ अपनी सुना रहे थे कुछ दूसरों की सुन रहे थे। ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्वामी विवेकानंद

प्रेरक-प्रसंग

बात उस समय की है, जब विवेकानंद जी को शिकागो की धर्मसभा में भारतीय संस्कृति पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। वे भारत के प्रथम संत थे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय सर्वधर्म सभा में प्रवचन देने हेतु आमंत्रित किया गया था। स्वामी विवेकानंद के गुरू रामकृष्ण परमहंस का देहांत हो ...

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प्रेरक प्रसंग : रूप या गुण

प्रेरक प्रसंग

सम्राट चंद्रगुप्त ने एक दिन अपने प्रतिभाशाली मंत्री चाणक्य से कहा- “कितना अच्छा होता कि तुम अगर रूपवान भी होते।“ चाणक्य ने उत्तर दिया, “महाराज रूप तो मृगतृष्णा है। आदमी की पहचान तो गुण और बुद्धि से ही होती है, रूप से नहीं।“ “क्या कोई ऐसा उदाहरण है जहाँ गुण ...

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प्रेरक प्रसंग : अहंकार की गति

प्रेरक प्रसंग

एक मूर्तिकार उच्चकोटि की ऐसी मूर्तियाँ बनाता था, जो सजीव लगती थीं। लेकिन उस मूर्तिकार को अपनी कला पर बड़ा घमंड था। उसे जब लगा कि जल्द ही उसकी मृत्यु होने वाली है तो वह परेशानी में पड़ गया। यमदूतों को भ्रमित करने के लिये उसने एकदम अपने जैसी दस ...

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प्रेरक प्रसंग : श्रम का पुरस्कार

प्रेरक प्रसंग

बहुत दिनों पहले की बात है, गिलहरी पूरी तरह काली हुआ करती थी। छोटी-छोटी झाड़ियों के बीच, घास के मैदानों में, ऊँचे बड़े पेड़ों पर रेंगती फिरती कूदती फाँदती लेकिन लोग उसे सुंदर प्राणी नहीं समझते थे। गिलहरी को गाँव के परिवारों के साथ रहना पसंद था लेकिन गाँव वाले ...

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