Thursday , January 19 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग : उम्र की सीमा पार

प्रेरक प्रसंग

हरलेन सैंडर्स बूढ़े और गरीब थे। उनका जीवन असफलताओं से भरा हुआ था। वह जो भी काम करते, उसमें उन्हें निराशा हाथ लगती। लेकिन उनमें एक खासियत थी। वह असफलताओं से नहीं घबराते थे। जब उनका कोई आइडिया काम नहीं आया तो काफी सोच-विचार कर उन्होंने केंटुकी फ्राइड चिकन फ्रैंचाइजी ...

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प्रेेरक प्रसंग : मृत्यु का पाप

प्रेेरक प्रसंग

कलकत्ता में हिन्दू – मुस्लिम दंगे भड़के हुए थे। तमाम प्रयासों के बावजूद लोग शांत नहीं हो रहे थे। ऐसी स्थिति में गाँधी जी वहां पहुंचे और एक मुस्लिम मित्र के यहाँ ठहरे। उनके पहुचने से दंगा कुछ शांत हुआ लेकिन कुछ ही दोनों में फिर से आग भड़क उठी। ...

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प्रेेरक प्रसंग : व्‍यर्थ का घमंड

23-12-14-12-32-38

एक गांव में सप्ताह के एक दिन प्रवचन होता था। इसकी व्यवस्था गांव के कुछ प्रबुद्ध लोगों ने कराई थी जिससे कि भोले-भाले ग्रामीणों को धर्म का कुछ ज्ञान हो सके। इसके लिए एक दिन एक ज्ञानी पुरुष को बुलाया गया। गांव वाले समय से पहुंच गए। ज्ञानी पुरुष ने ...

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प्रेेरक प्रसंग : सच्‍ची उपासना

प्रेेरक प्रसंग

एक गांव में जमींदार और उसके एक मजदूर की साथ ही मौत हुई। दोनों यमलोक पहुंचे। धर्मराज ने जमींदार से कहा, ‘आज से तुम मजदूर की सेवा करोगे।’ मजदूर से कहा, ‘अब तुम कोई काम नहीं करोगे, आराम से यहां रहोगे।’ जमींदार परेशान हो गया। पृथ्वी पर तो मजदूर जमींदार ...

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प्रेेरक प्रसंग : अतिथि देवो भव:

प्रेेरक प्रसंग

सेवाग्राम में बापू की झोपड़ी की ओर जाते समय पहले पहले बा की झोपड़ी पड़ती थी। अक्सर दिन में बा या तो चबूतरे पर बैठी सूत कातती मिलतीं या ऐसा ही कोई काम करती नजर आतीं। किसी नए आने वाले अतिथि को पहले बा के ही दर्शन होते। बा उसे ...

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प्रेरक प्रसंग : तुम मेरे दास के दास

प्रेरक प्रसंग

भारत को जीत लेने और कुछ दिन यहां गुजार लेने के पश्चात विश्व विजेता सिकंदर भारत से लौटने की तैयारी कर रहा था। किसी ने उसे सलाह दी कि उसे हिंदुस्तान से अपने साथ एक योगी ले जाना चाहिए। सिकंदर को यह बात काफी पसंद आई। उसने अपने साथ ले ...

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प्रेरक प्रसंग : अपने लिए जिए तो क्या जिए

प्रेरक प्रसंग

एक बार लाल बहादुर शास्त्री जी ट्रेन से मुंबई जा रहे थे। उनके लिए प्रथम श्रेणी का डिब्बा लगा था। गाड़ी चलने पर शास्त्रीजी बोले, ‘डिब्बे में काफ़ी ठंडक है, वैसे बाहर गर्मी है।’ उनके पी.ए. कैलाश बाबू ने कहा, ‘जी, इसमें कूलर लग गया है।’ शास्त्रीजी ने पैनी निगाह ...

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प्रेरक प्रसंग : जहां प्रेम वहां शांति

प्रेरक प्रसंग

अक्सर देखा जाता है कि धन की देवी लक्ष्मी अपने सच्चे भक्तों से रूठ भी जाती है। ऐसे ही एक दिन एक भक्त से लक्ष्मी जी रूठ गईं। जाते वक्त बोलीं, ‘मैं जा रही हूं और मेरी जगह आफत आ रही है। तैयार हो जाओ। लेकिन मैं तुम्हें अंतिम भेंट ...

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प्रेरक प्रसंग : सब विधाता की मर्जी है

प्रेरक प्रसंग

भिक्षा ले कर लौटते हुए एक शिक्षार्थी ने मार्ग में मुर्गे और कबूतर की बातचीत सुनी। कबूतर मुर्गे से बोला- “मेरा भी क्या भाग्य है? भोजन न मिले, तो मैं कंकर खा कर भी पेट भर लेता हूँ। कहीं भी सींक, घास आदि से घोंसला बना कर रह लेता हूँ। ...

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प्रेरक प्रसंग : गलती नहीं तो सजा नहीं

प्रेरक प्रसंग

स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और हम इसे लेकर ही रहेंगे’ यह ओजपूर्ण नारा देने वाले बालगंगाधर तिलक का जीवन भी इन्ही वाक्यों की तरह रहा है। बात उस समय की है जब बाल गंगाधर तिलक उम्र में छोटे थे। वह अपने विद्यालय में थे। उस समय सारे विद्यार्थी कक्षा ...

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