Wednesday , May 24 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : रविन्द्रनाथ टैगोर

प्रेरक-प्रसंग

रविन्द्रनाथ टैगोर विचारक ही नही, बल्कि शांत साधक थे। वे भयमुक्त थे। उनका स्वभाव शांत थे। वह काफी कम बात किया करते थे। कुछ लोग रविन्द्रनाथ टैगोर जी की निंदा करते थे। एक बार शरत् बाबू ने टैगोर से कहा, ‘मुझे आपकी निंदा सुनी नहीं जाती। आप अपनी आधारहीन आलोचना ...

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प्रेरक-प्रसंग : धैर्य की पराकाष्ठा

प्रेरक-प्रसंग

बाल गंगाधर तिलक भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी थे पर साथ ही साथ वे अद्वितीय कीर्तनकार, तत्वचिंतक, गणितज्ञ, धर्म प्रवर्तक और दार्शनिक भी थे। हिंदुस्तान में राजकीय असंतोष मचाने वाले इस करारी और निग्रही महापुरुष को अंग्रेज़ सरकार ने मंडाले के कारागृह में छह साल के लिए भेज दिया। ...

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प्रेरक-प्रसंग : लगनशीलता

प्रेरक-प्रसंग

एक बार एक सीधे पहाड़ में चढ़ने की प्रतियोगिता हुई. बहुत लोगों ने हिस्सा लिया. प्रतियोगिता को देखने वालों की सब जगह भीड़ जमा हो गयी. माहौल में सरगर्मी थी , हर तरफ शोर ही शोर था. प्रतियोगियों ने चढ़ना शुरू किया। लेकिन सीधे पहाड़ को देखकर भीड़ में एकत्र ...

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प्रेरक-प्रसंग : समस्या का हल

प्रेरक-प्रसंग

एक व्यक्ति कहीं जा रहा था उसे हार्ट अटैक आ गया लेकिन वो बच गया। इस घटना के बाद उसे हर बात से डर लगने लगा। वह मनोवैज्ञानिक के पास गया और बोला, अज्ञात भयों के कारण मेरे जीवन में आनंद नहीं रह गया है। हर समय डर में जी ...

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प्रेरक-प्रसंग : असली इंसान

प्रेरक-प्रसंग

एक नगर के नजदीक एक होटल था। जिसका मालिक दयालु और सज्जन व्यक्ति था। होटल अच्छी आमदनी देता था। उस सेठ का जीवन सुखी से चल रहा था। परिवार में उसके कोई नहीं था, माता-पिता का देहांत काफी समय पहले हो चुका था। उसका विवाह भी नहीं हुआ था। लालचंद्र ...

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प्रेरक-प्रसंग : अर्जुन का अहंकार

प्रेरक-प्रसंग

एक दिन भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अपने साथ घुमाने ले गए। रास्ते में उनकी भेंट एक निर्धन ब्राह्मण से हुई। उसका व्यवहार थोड़ा विचित्र था। वह सूखी घास खा रहा था और उसकी कमर से तलवार लटक रही थी। अर्जुन ने उससे पूछा- ‘आप तो अहिंसा के पुजारी हैं। जीव ...

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प्रेरक-प्रसंग : संन्यासी और गाय

प्रेरक-प्रसंग

दो संन्यासी युवक यात्रा करते-करते किसी गांव में पहुंचे। वहां लोगों से पूछा हमें एक रात्रि यहां रहना है किसी पवित्र परिवार का घर दिखाओ। लोगों ने बताया कि वहां एक चाचा का घर है। साधु-महात्माओं का आदर सत्कार करते हैं। अखिल ब्रह्माण्डमां एक तुं श्रीहरि’ का पाठ उनका पक्का ...

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प्रेरक-प्रसंग : पंडित जवाहरलाल नेहरू

प्रेरक-प्रसंग

जवाहरलाल नेहरू जी ने अपने बचपन का किस्सा बयान करते हुये अपनी पुस्तक मेरी कहानी में लिखा है कि वे अपने पिता मोतीलाल नेहरू जी का बहुत सम्मान करते थे। हांलांकि वे कड़क मिजाज थे सो वे उनसे डरते भी बहुत थे क्योंकि उन्होंने नौकर चाकरों आदि पर उन्हें बिगडते ...

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प्रेरक-प्रसंग : महात्मा गांधी

प्रेरक-प्रसंग

गांधी जी ने भारत के स्वतंत्रता के लिये सिर्फ जन जागरण अभियान ही नहीं चलाया अपितु राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी को स्थापित करने में भी अग्रणी भूमिका निभायी थी। भारत आने के बाद 1917 में जब उन्होंने अपनी पहली सत्याग्रह यात्रा चम्पारण से आरंभ की तो इसी दौरान 3 ...

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प्रेरक-प्रसंग : भगवान बुद्ध

प्रेरक-प्रसंग

भगवान बुद्ध धर्म प्रचार करते हुए काशी की ओर जा रहे थे। रास्ते में जो भी उनके सत्संग के लिए आता, उसे वह बुराइयां त्यागकर अच्छा बनने का उपदेश देते। उसी दौरान उन्हें उपक नाम का एक गृहत्यागी मिला। वह गृहस्थ को सांसारिक प्रपंच मानता था और किसी मार्गदर्शक की ...

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