Friday , February 23 2018

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : मन का बोझ

प्रेरक-प्रसंग

एक बार एक महात्मा ने अपने शिष्यों से अनुरोध किया कि वे कल से प्रवचन में आते समय अपने साथ एक थैली में बडे़ आलू साथ लेकर आयें। उन आलुओं पर उस व्यक्ति का नाम लिखा होना चाहिये जिनसे वे ईर्ष्या करते हैं। जो व्यक्ति जितने व्यक्तियों से घृणा करता ...

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प्रेरक-प्रसंग : भ्रम से मुक्ति

प्रेरक-प्रसंग

काशी में गंगा के तट पर एक संत का आश्रम था। एक दिन उनके एक शिष्य ने पूछा, ‘गुरुवर, शिक्षा का निचोड़ क्या है?’ संत ने मुस्करा कर कहा, ‘एक दिन तुम खुद-ब-खुद जान जाओगे।’ बात आई और गई। कुछ समय बाद एक रात संत ने उस शिष्य से कहा, ...

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प्रेरक-प्रसंग : सफलता का श्रेय

प्रेरक-प्रसंग

सफलता का श्रेय किसे मिले इस प्रश्न पर एक दिन विवाद उठ खड़ा हुआ। संकल्प ने अपने को, ‘बल’ ने अपने को और ‘बुद्धि’ ने अपने को अधिक महत्वपूर्ण बताया। तीनों अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। अन्त में तय हुआ कि ‘विवेक’ को पंच बना इस झगड़े का फैसला ...

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प्रेरक-प्रसंग : भूल पर विजय

अपनी बहन इलाइजा के साथ एक किशोर बालक घूमने निकला। रास्ते में एक किसान की लड़की मिली। वह सिर पर अमरूदों का टोकरा रखे हुए उन्हें बेचने बाज़ार जा रही थी। इलाइजा ने भूल से टक्कर मार दी, जिससे सब अमरूद वहीं गिरकर गन्दे हो गये। कुछ फूट गये, कुछ ...

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प्रेरक-प्रसंग : महात्मा गांधी

प्रेरक-प्रसंग

एक बार गांधीजी को एक पत्र मिला, जिसमें लिखा था कि शहर में गांधी मंदिर की स्थापना की गई है, जिसमें रोज उनकी मूर्ति की पूजा-अर्चना की जाती है। यह जानकर गांधीजी परेशान हो उठे। उन्होंने लोगों को बुलाया और अपनी मूर्ति की पूजा करने के लिए उनकी निंदा की। ...

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प्रेरक-प्रसंग : मन का दर्पण

प्रेरक-प्रसंग

एक साधु से किसी व्यक्ति ने कहा कि विचारों का प्रवाह उसे बहुत परेशान कर रहा है। उस साधु ने उसे निदान और चिकित्सा के लिए अपने एक मित्र साधु के पास भेजा और उससे कहा, “जाओ और उसकी समग्र जीवन-चर्या ध्यान से देखो। उससे ही तुम्हें मार्ग मिलने को ...

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प्रेरक-प्रसंग : ईश्वरचन्द्र विद्यासागर

प्रेरक-प्रसंग

एक रेलवे स्टेशन पर नौजवान लड़का उतरा। लड़के के पास एक छोटा सा संदूक था। स्टेशन पर उतरते ही लड़के ने कुली को आवाज लगानी शुरू कर दी। वह एक छोटा स्टेशन था, जहाँ पर ज्यादा लोग नहीं उतरते थे, इसलिए वहाँ उस स्टेशन पर कुली नहीं थे। स्टेशन पर ...

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प्रेरक-प्रसंग : सुखदा मणि

प्रेरक-प्रसंग

एक संत सदा प्रसन्न रहते थे। वह हर बात पर ठहाके लगते रहते , कुछ चोरो को यह बात अजीब सी लगाती थी। वह समझ नही पाते थे कि कोई व्यक्ति हर समय इतना खुश कैसे रह सकता है। चोरो ने यह सोच कर कि संत के पास अपार धन ...

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प्रेरक-प्रसंग : कर्तव्य का तप

प्रेरक-प्रसंग

तपस्वी जाजलि श्रद्धापूर्वक वानप्रस्थ धर्म का पालन करने के बाद खड़े होकर कठोर तपस्या करने लगे। उन्हें गतिहीन देखकर पक्षियों ने उन्हें कोई वृक्ष समझ लिया और उनकी जटाओं में घोंसले बनाकर अंडे दे दिए। अंडे बढे़ और फूटे, उनसे बच्चे निकले। बच्चे बड़े हुए और उड़ने भी लगे। एक ...

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प्रेरक प्रसंग : मन का मैल

प्रेरक-प्रसंग

बुद्ध जब वृद्ध हो गये थे, तब एक दोपहर एक वन में एक वृक्ष तले विश्राम को रुके थे। उन्हें प्यास लगी तो आनंद पास की पहाड़ी से गिरने वाले झरने पर पानी लेने गया था। पर झरने से अभी-अभी गाड़ियां निकली थी और उसका पानी गंदा हो गया था। ...

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