Tuesday , October 24 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : आचार्य विनोबा भावे

प्रेरक-प्रसंग

आचार्य विनोबा भावे रेलगाड़ी से वर्धा जा रहे थे। अचानक ट्रेन के डिब्बे में एक वृद्ध फ़कीर चढ़ा। फ़कीर ने भक्ति भाव वाला गीत गाना शुरू किया। उसके मधुर आवाज़ एवं गीतों के भावों को सुन कर बिनोवाजी भावविभोर हो उठे। डिब्बे में अन्य यात्री भी फ़कीर के गायन के ...

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प्रेरक-प्रसंग : ध्येय के प्रति निष्ठा

प्रेरक-प्रसंग

महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ। कौरव तो सभी युद्ध में मारे जा चुके थे। पाण्डव भी कुछ समय तक राज्य करके हिमालय पर चले गये। वहाँ पर एक, एक करके सभी भाई गिर गये। अकेले युधिष्ठिर अपने एक मात्र साथी कुत्ते के साथ बचे रहे और वे स्वर्ग गये। कहते ...

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प्रेरक-प्रसंग : अश्वपति की वीरता

प्रेरक-प्रसंग

अश्वपति ने राज्य विस्तार तो नहीं किया पर समर्थ नागरिक तैयार करने के लिये जो भी उपाय सम्भव थे, उसने किये। यही कारण था कि उसके राज्य में सब स्वस्थ, वीर, और बहादुर नागरिक थे। काना, कुबड़ा, दीन-हीन और आलसी उनमें से एक भी न था। अश्वपति के राज्य में ...

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प्रेरक-प्रसंग : लालच

प्रेरक-प्रसंग

रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी से शीरे के बड़े-बड़े ड्रम उतारे जा रहे थे। उन ड्रमों से थोड़ा-थोड़ा शीरा मालगाड़ी के पास नीचे ज़मीन पर गिर रहा था। जहाँ शीरा गिरा था मक्खियाँ आकर बैठ गई और शीरा चाटने लगीं। ऐसा करने से उनके छोटे-छोटे मुलायम पंख उस शीरे में ही ...

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प्रेरक-प्रसंग : सच्चा हीरा

प्रेरक-प्रसंग

एक राजा का दरबार लगा हुआ था। सर्दियों के दिन थे, इसीलिये राजा का दरबार खुले में बैठा था। पूरी आम सभा सुबह की धूप मे बैठी थी। ​​महाराज ने सिंहासन के सामने एक मेज रखवा रखी थी। पंडित लोग दीवान आदि सभी दरबार में बैठे थे। राजा के परिवार ...

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प्रेरक-प्रसंग : सुख की मोह माया

प्रेरक-प्रसंग

एक इंसान घने जंगल में भागा जा रहा था। शाम हो चुकी थी इसलिए अंधेरे में उसे कुआं दिखाई नहीं पड़ा और वह उसमें गिर गया। गिरते-गिरते कुएं पर झुके पेड़ की एक डाल उसके हाथ में आ गई। जब उसने नीचे झांका तो उसकी आँखें फटी की फटी रह ...

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प्रेरक-प्रसंग : जीवन जीने की कला

प्रेरक-प्रसंग

एक संत ने विश्व-विद्यालय आरंभ किया। इस विद्यालय का प्रमुख उद्देश्य था ऐसे संस्कारी युवक-युवतियों का निर्माण जो समाज के विकास में सहभागी बन सकें। एक दिन उन्होंने अपने विद्यालय में एक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया। जिसका विषय था – “जीवों पर दया एवं प्राणिमात्र की सेवा।” निर्धारित तिथि ...

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प्रेरक-प्रसंग : पश्चाताप

प्रेरक-प्रसंग

कर्णवास का एक पंडित महर्षि दयानंद सरस्वती को प्रतिदिन गालियाँ दिया करता था, पर महर्षि शांत भाव से उन्हें सुनते रहते और उसे कुछ भी उत्तर न देते। एक दिन जब वह गाली देने नहीं आया तब महर्षि ने लोगों से उसके न आने का कारण पूछा। लोगों ने बताया, ...

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प्रेरक-प्रसंग : सूझ-बूझ

प्रेरक-प्रसंग

प्रसंग उस वक्त का है जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंग्लैंड में आईसीएस का इंटरव्यू देने गए। वहां उनका इंटरव्यू लेने वाले सभी अधिकारी अंग्रेज थे। दरअसल, वे भारतीयों को किसी उच्च पद पर नहीं देखना चाहते थे। इसलिए इंटरव्यू में अजीबो-गरीब और कठिन से कठिन प्रश्न पूछकर भारतीयों को नीचा ...

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प्रेरक-प्रसंग : सच्ची खुशी

प्रेरक-प्रसंग

चंद्र प्रकाश के चार साल के बेटे को पंछियों से बेहद प्यार था। वह अपनी जान तक न्योछावर करने को तैयार रहता। ये सभी पंछी उसके घर के आंगन में जब कभी आते तो वह उनसे भरपूर खेलता। उन्हें जी भर कर दाने खिलाता। पेट भर कर जब पंछी उड़ते ...

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