Sunday , August 20 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : महानता के लक्षण

प्रेरक-प्रसंग

एक बालक नित्य विद्यालय पढ़ने जाता था। घर में उसकी माता थी। माँ अपने बेटे पर प्राण न्योछावर किए रहती थी, उसकी हर माँग पूरी करने में आनंद का अनुभव करती। पुत्र भी पढ़ने-लिखने में बड़ा तेज़ और परिश्रमी था। खेल के समय खेलता, लेकिन पढ़ने के समय का ध्यान ...

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प्रेरक-प्रसंग : भाग्य का दोष

प्रेरक-प्रसंग

एक शिक्षण संस्थान की यह परंपरा थी – अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों में जो योग्यतम आठ-दस होते थे, उन्हें देश की औद्योगिक संस्थाएँ नियुक्त कर लेती थीं। उस साल भी वही हुआ। ऊपर के नौ लड़के ऊँची पद-प्रतिष्ठा वाली नौकरियाँ पाकर खुशी-खुशी चले गए। लेकिन उनके बीच का एक लड़का ...

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प्रेरक प्रसंग : संगत का असर

प्रेरक प्रसंग

एक बार एक राजा शिकार के उद्देश्य से अपने काफिले के साथ किसी जंगल से गुजर रहे थे| दूर-दूर तक शिकार नजर नहीं आ रहा था, वे धीरे धीरे घनघोर जंगल में प्रवेश करते गए| अभी कुछ ही दूर गए थे की उन्हें कुछ डाकुओं के छिपने की जगह दिखाई ...

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प्रेरक-प्रसंग : प्रेमचंद और अंग्रेज जिलाधीश

प्रेरक-प्रसंग

उन दिनों प्रसिद्ध उपन्यास-लेखक मुंशी प्रेमचंद गोरखपुर में अध्यापक थे। उन्होंने अपने यहां गाय पाल रखी थी। एक दिन चरते-चरते उनकी गाय वहां के अंग्रेज़ जिलाधीश के आवास के बाहरवाले उद्यान में घुस गई। अभी वह गाय वहां जाकर खड़ी ही हुई थी कि वह अंग्रेज़ बंदूक लेकर बाहर आ ...

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प्रेरक-प्रसंग : पश्चाताप

प्रेरक-प्रसंग

कर्णवास का एक पंडित महर्षि दयानंद सरस्वती को प्रतिदिन गालियाँ दिया करता था, पर महर्षि शांत भाव से उन्हें सुनते रहते और उसे कुछ भी उत्तर न देते। एक दिन जब वह गाली देने नहीं आया तब महर्षि ने लोगों से उसके न आने का कारण पूछा। लोगों ने बताया, ...

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प्रेरक प्रसंग : भगवान हमें देख रहा है

प्रेरक-प्रसंग

एक बार मैं आधा किलो घी लेने गया. उसने मुझे 90 रूपय ज्यादा दे दिये. मैंने कुछ देर सोचा और पैसे लेकर निकल लिया. मैंने मन में सोचा कि 2-2 ग्राम से तूने जितना बचाया था बच्चू अब एक ही दिन में निकल गया. मैंने घर आकर अपनी गृहल्क्षमी को ...

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प्रेरक-प्रसंग : हृदय परिवर्तन

प्रेरक-प्रसंग

एक राजा को राज भोगते काफी समय हो गया था । बाल भी सफ़ेद होने लगे थे । एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने गुरुदेव एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया । उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी ...

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प्रेरक प्रसंग : वृद्धाश्रम

प्रेरक-प्रसंग

यात्रा के दौरान रेल में वर्षों वाद अपने एक परिचिच तिलककुमार जी से अचानक मुलाकात हो गई। पुरानी बतें चर्चा में आईं उनके गिरते स्वास्थ्य के प्रति मैंने सहानुभूति दिखलाई। पन्द्रह वर्ष पूर्व उनकी पत्नी के निधन की जानकारी पाकर दुख हुआ। अपने परिवार के बारे में उन्होंने बताया- सब सुखी ...

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प्रेरक-प्रसंग : प्रसन्नता

प्रेरक-प्रसंग

चंद्र प्रकाश के चार साल के बेटे को पंछियों से बेहद प्यार था। वह अपनी जान तक न्योछावर करने को तैयार रहता। ये सभी पंछी उसके घर के आंगन में जब कभी आते तो वह उनसे भरपूर खेलता। उन्हें जी भर कर दाने खिलाता। पेट भर कर जब पंछी उड़ते ...

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प्रेरक-प्रसंग : बच्चे की सीख

प्रेरक-प्रसंग

बचपन से ही मुझे अध्यापिका बनने तथा बच्चों को मारने का बड़ा शौक था। अभी मैं पाँच साल की ही थी कि छोटे-छोटे बच्चों का स्कूल लगा कर बैठ जाती। उन्हें लिखाती पढ़ाती और जब उन्हें कुछ न आता तो खूब मारती। मैं बड़ी होकर अध्यापिका बन गई। स्कूल जाने ...

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