Friday , March 24 2017 [dms]

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : आचार्य विनोबा भावे

प्रेरक-प्रसंग

आचार्य विनोबा भावे रेलगाड़ी से वर्धा जा रहे थे। अचानक ट्रेन के डिब्बे में एक वृद्ध फ़कीर चढ़ा। फ़कीर ने भक्ति भाव वाला गीत गाना शुरू किया। उसके मधुर आवाज़ एवं गीतों के भावों को सुन कर बिनोवाजी भावविभोर हो उठे। डिब्बे में अन्य यात्री भी फ़कीर के गायन के ...

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प्रेरक-प्रसंग : महात्मा गांधी

प्रेरक-प्रसंग

महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम में प्रत्येक कार्य का समय नियत था और नियम कायदों का सख्ती से पालन होता था। आश्रम के प्रत्येक कर्मचारी और वहां रहने वाले सभी लोगों को नियमानुसार ही कार्य करने की हिदायत दी जाती थी। साबरमती आश्रम का एक नियम यह था कि वहां ...

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प्रेरक-प्रसंग : कांच की बरनी और दो प्याला चाय

प्रेरक-प्रसंग

जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी-जल्दी करने की इच्छा होती है, सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है, और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं, उस समय ये बोध कथा, काँच की बरनी और दो कप चाय ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्‍वामी विवेकानंद

प्रेरक-प्रसंग

भ्रमण एवं भाषणों से थके हुए स्वामी विवेकानंद अपने निवास स्थान पर लौटे। उन दिनों वे अमेरिका में एक महिला के यहां ठहरे हुए थे। वे अपने हाथों से भोजन बनाते थे। एक दिन वे भोजन की तैयारी कर रहे थे कि कुछ बच्चे पास आकर खड़े हो गए। उनके ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्वामी विवेकानन्द

प्रेरक-प्रसंग

स्वामी विवेकानन्द के पूना प्रवास के दौरान एक विलक्षण घटना घटी, जिससे उनके विराट व्यक्तित्व का परिचय मिलता है। गाड़ी में स्वामीजी को द्वितीय श्रेणी से भ्रमण करते देख कर कुछ शिक्षित लोग अंग्रेज़ी भाषा में संन्यासियों की निंदा करने लगे। उन्होंने सोचा स्वामीजी को अंग्रेज़ी नहीं आती है। उनका सोचना ...

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प्रेरक-प्रसंग : तीसरी मंजिल

प्रेरक-प्रसंग

बुद्ध अपने प्रवचनों में उनके शिष्यों को बहुत सी कथाएं सुनाते थे। यह कथा भी उन्हीं में से एक है। कभी किसी काल में किसी नगर में राम और श्याम नामक दो धनी व्यापारी रहते थे। वे दोनों ही अपने धन और वैभव का बड़ा प्रदर्शन करते थे। एक दिन ...

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प्रेरक-प्रसंग : डॉ. राजेंद्र प्रसाद

प्रेरक-प्रसंग

एक बार पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद नाव से अपने गांव जा रहे थे। नाव में कई लोग सवार थे। राजेंद्र बाबू के नजदीक ही एक अंग्रेज बैठा हुआ था। वह बार-बार राजेंद्र बाबू की तरफ व्यंग्य से देखता और मुस्कराने लगता। कुछ देर बाद अंग्रेज ने उन्हें तंग करने ...

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प्रेरक-प्रसंग : बौद्ध भिक्षु

प्रेरक-प्रसंग

एक सिद्ध बौद्ध भिक्षु अपने शिष्यों के साथ नगर भ्रमण पर निकले। उन्होंने देखा कि वहां एक ही परिवार के कुछ लोग आपस में बात करते हुए एक दूसरे पर क्रोधित हो रहे थे। यह दृश्य देखकर एक शिष्य से रहा नहीं गया। उसने तुरंत बौद्ध भिक्षु से पूछा क्रोध ...

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प्रेरक-प्रसंग : भगवान बुद्ध और किसान

प्रेरक-प्रसंग

एक बार भगवान बुद्ध भिक्षा के लिऐ एक किसान के यहां पहुंचे। तथागत को भिक्षा के लिये आया देखकर किसान उपेक्षा से बोला श्रमण मैं हल जोतता हूं और तब खाता हूं तुम्हें भी हल जोतना और बीज बोना चाहिए और तब खाना खाना चाहिऐ। बुद्ध ने कहा महाराज मैं ...

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प्रेरक-प्रसंग : पंडित जवाहरलाल नेहरू

प्रेरक-प्रसंग

वर्ष 1956 में जब जवाहरलाल नेहरू सऊदी अरब की राजनायिक यात्रा पर गए तो वहां से वापस आते समय शाह सऊद ने उन्हें एक कैडलक कार और उनके साथ आए लोगों को स्विस घड़ियां उपहार में दीं. लेकिन नेहरू इतने महंगे-महंगे तोहफों को पाकर काफी परेशान हो गए थे, वह ...

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