Friday , June 23 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : अभिमान

प्रेरक-प्रसंग

एक प्रसिद्ध मूर्तिकार अपने पुत्र को मूर्ति बनाने की कला में दक्ष करना चाहता था। उसका पुत्र भी लगन और मेहनत से कुछ समय बाद बेहद खूबसूरत मूर्तियाँ बनाने लगा। उसकी आकर्षक मूर्तियों से लोग भी प्रभावित होने लगे। लेकिन उसका पिता उसकी बनाई मूर्तियों में कोई न कोई कमी ...

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प्रेरक-प्रसंग : हृदय परिवर्तन

प्रेरक-प्रसंग

एक राजा को राज भोगते काफी समय हो गया था । बाल भी सफ़ेद होने लगे थे । एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने गुरुदेव एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया । उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी ...

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प्रेरक-प्रसंग : दिन और रात

प्रेरक-प्रसंग

बहुत समय पहले की बात है जब सृष्टि की शुरुआत ही हुई थी। दिन और रात नाम के दो प्रेमी थे। दोनों में खूब गहरी पटती पर दोनों का स्वभाव बिल्कुल ही अलग-अलग था। रात सौंदर्य-प्रिय और आराम-पसंद थी तो दिन कर्मठ और व्यावहारिक, रात को ज़्यादा काम करने से ...

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प्रेरक-प्रसंग : कठिन परीक्षा

प्रेरक-प्रसंग

एक मंदिर में स्थापित प्रस्तर प्रतिमा पर चढ़ाए गए पुष्प ने क्रोधित होकर पुजारी से कहा, “तुम प्रतिदिन इस प्रस्तर प्रतिमा पर मुझे चढ़ाकर इसकी पूजा करते हो। यह मुझे कतई पसंद नहीं है। पूजा मेरी होनी चाहिये क्योंकि मैं कोमल, सुंदर, सुवासित हूँ। यह तो मात्र पत्थर की मूर्ति ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्वामी विवेकानंद

प्रेरक-प्रसंग

बात उस समय की है, जब विवेकानंद जी को शिकागो की धर्मसभा में भारतीय संस्कृति पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। वे भारत के प्रथम संत थे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय सर्वधर्म सभा में प्रवचन देने हेतु आमंत्रित किया गया था। स्वामी विवेकानंद के गुरू रामकृष्ण परमहंस का देहांत हो ...

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प्रेरक-प्रसंग : महामूर्ख

प्रेरक-प्रसंग

बहुत दिनों की बात है हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी गाँव में एक बूढा रहता था, जो महामूर्ख के नाम से चर्चित था। उसके घर के सामने दो बड़े पहाड़ थे, जिससे आने जाने में असुविधा होती थी। पहाड़ के दूसरी ओर पहुँचने में कई दिन लग जाते। एक दिन उसने ...

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प्रेरक प्रसंग : मूर्ख बातूनी कछुआ

एक तालाब में कम्बुग्रीव नामक एक कछुआ रहता था। उसी तलाब में दो हंस तैरने के लिए उतरते थे। हंस बहुत हंसमुख और मिलनसार थे। कछुए और उनमें दोस्ती होते देर न लगी। हंसो को कछुए का धीमे-धीमे चलना और उसका भोलापन बहुत अच्छा लगा। हंस बहुत ज्ञानी भी थे। ...

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प्रेरक-प्रसंग : अकबर और बीरबल

प्रेरक-प्रसंग

एक बार शहंशाह अकबर एंव बीरबल शिकार पर गए और वहां पर शिकार करते समय अकबर की अंगुली कट गयी| अकबर को बहुत दर्द हो रहा था| पास में खड़े बीरबल ने कहा – “कोई बात नहीं शहंशाह, जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है|” अकबर को ...

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प्रेरक-प्रसंग : दो दोस्त

प्रेरक-प्रसंग

बहुत समय पहले की बात है , दो दोस्त बीहड़ इलाकों से होकर शहर जा रहे थे . गर्मी बहुत अधिक होने के कारण वो बीच -बीच में रुकते और आराम करते . उन्होंने अपने साथ खाने-पीने की भी कुछ चीजें रखी हुई थीं . जब दोपहर में उन्हें भूख ...

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प्रेरक-प्रसंग : थॉमस अल्वा एडिसन

प्रेरक-प्रसंग

महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन एक बार बल्ब बनाने के लिए प्रयोग कर रहे थे तभी एक व्यक्ति ने उनसे पूछा – “आपने करीब एक हजार प्रयोग किये लेकिन आपके सारे प्रयोग असफल रहे और आपकी मेहनत बेकार हो गई| क्या आपको दुःख नहीं होता?” एडिसन ने कहा – “मै ...

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