Monday , February 26 2018

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : सुखदा मणि

प्रेरक-प्रसंग

एक संत सदा प्रसन्न रहते थे। वह हर बात पर ठहाके लगते रहते , कुछ चोरो को यह बात अजीब सी लगाती थी। वह समझ नही पाते थे कि कोई व्यक्ति हर समय इतना खुश कैसे रह सकता है। चोरो ने यह सोच कर कि संत के पास अपार धन ...

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प्रेरक-प्रसंग : कर्तव्य का तप

प्रेरक-प्रसंग

तपस्वी जाजलि श्रद्धापूर्वक वानप्रस्थ धर्म का पालन करने के बाद खड़े होकर कठोर तपस्या करने लगे। उन्हें गतिहीन देखकर पक्षियों ने उन्हें कोई वृक्ष समझ लिया और उनकी जटाओं में घोंसले बनाकर अंडे दे दिए। अंडे बढे़ और फूटे, उनसे बच्चे निकले। बच्चे बड़े हुए और उड़ने भी लगे। एक ...

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प्रेरक प्रसंग : मन का मैल

प्रेरक-प्रसंग

बुद्ध जब वृद्ध हो गये थे, तब एक दोपहर एक वन में एक वृक्ष तले विश्राम को रुके थे। उन्हें प्यास लगी तो आनंद पास की पहाड़ी से गिरने वाले झरने पर पानी लेने गया था। पर झरने से अभी-अभी गाड़ियां निकली थी और उसका पानी गंदा हो गया था। ...

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प्रेरक-प्रसंग : सूझ-बूझ

प्रेरक-प्रसंग

एक राजा था। वह बेहद न्यायप्रिय, दयालु और विनम्र था। उसके तीन बेटे थे। जब राजा बूढ़ा हुआ तो उसने किसी एक बेटे को राजगद्दी सौंपने का निर्णय किया। इसके लिए उसने तीनों की परीक्षा लेनी चाही। उसने तीनों राजकुमारों को अपने पास बुलाया और कहा, ‘मैं आप तीनों को ...

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प्रेरक-प्रसंग : त्रुटियों पर विजय

प्रेरक-प्रसंग

अपनी बहन इलाइजा के साथ एक किशोर बालक घूमने निकला। रास्ते में एक किसान की लड़की मिली। वह सिर पर अमरूदों का टोकरा रखे हुए उन्हें बेचने बाज़ार जा रही थी। इलाइजा ने भूल से टक्कर मार दी, जिससे सब अमरूद वहीं गिरकर गन्दे हो गये। कुछ फूट गये, कुछ ...

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प्रेरक-प्रसंग : दिलों की दूरियां

प्रेरक-प्रसंग

एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। अचानक उन्होंने सभी शिष्यों से एक सवाल पूछा। बताओ जब दो लोग एक दूसरे पर गुस्सा करते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते क्यों हैं? शिष्यों ने कुछ देर सोचा और एक ने उत्तर दिया : हम अपनी शांति खो चुके ...

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प्रेरक-प्रसंग : नम्रता की सीख

प्रेरक-प्रसंग

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा ...

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प्रेरक प्रसंग : मंदबुद्धि बालक

प्रेरक-प्रसंग

विद्यालय में वह मंदबुद्धि कहलाता था। उसके अध्यापक उससे नाराज रहते थे क्योंकि उसकी बुद्धि का स्तर औसत से भी कम था। कक्षा में उसका प्रदर्शन सदैव निराशाजनक ही होता था। अपने सहपाठियों के मध्य वह उपहास का विषय था। विद्यालय में वह जैसे ही प्रवेश करता, चारों ओर उस ...

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प्रेरक-प्रसंग : माता की सीख

प्रेरक-प्रसंग

दार्शनिक गुरजिएफ ने अपनी आत्मकथा में माता द्वारा दी गई एक बहुमूल्य संपदा का उल्लेख किया है, जिसके कारण वे अनेक भटकावों से बचे और आनंद भरे अनेकों अवसर पा सके। लिखा है कि मेरी माता ने मरते समय कहा, “किसी पर क्रोध आए तो उसकी अभिव्यक्ति चौबीस घंटे से ...

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प्रेरक-प्रसंग : दिमाग से बड़ा तजुर्बा

प्रेरक-प्रसंग

यह जापान में प्रबंधन के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाने वाला बहुत पुराना किस्सा है जिसे ‘साबुन के खाली डिब्बे का किस्सा’ कहते हैं। कई दशक पहले जापान में साबुन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी को अपने एक ग्राहक से यह शिकायत मिली कि उसने साबुन का व्होल-सैल पैक खरीदा था ...

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