Tuesday , July 25 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग : उपयोगिता

प्रेरक प्रसंग

एक राजा था। उसने आज्ञा दी कि संसार में इस बात की खोज की जाय कि कौन से जीव-जंतु निरुपयोगी हैं। बहुत दिनों तक खोज बीन करने के बाद उसे जानकारी मिली कि संसार में दो जीव जंगली मक्खी और मकड़ी बिल्कुल बेकार हैं। राजा ने सोचा, क्यों न जंगली ...

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प्रेरक प्रसंग : विश्‍वास

प्रेरक-प्रसंग

एक डाकू था जो साधू के भेष में रहता था। वह लूट का धन गरीबों में बाँटता था। एक दिन कुछ व्यापारियों का जुलूस उस डाकू के ठिकाने से गुज़र रहा था। सभी व्यापारियों को डाकू ने घेर लिया। डाकू की नज़रों से बचाकर एक व्यापारी रुपयों की थैली लेकर नज़दीकी ...

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प्रेरक प्रसंग : हीरा और कांच

प्रेरक-प्रसंग

एक राजा का दरबार लगा हुआ था, क्योंकि सर्दी का दिन था इसलिये राजा का दरवार खुले में लगा हुआ था। पूरी आम सभा सुबह की धूप मे बैठी थी। महाराज के सिंहासन के सामने एक शाही मेज थी। और उस पर कुछ कीमती चीजें रखी थीं। पंडित लोग, मंत्री ...

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प्रेरक-प्रसंग : अभिमान

प्रेरक-प्रसंग

एक प्रसिद्ध मूर्तिकार अपने पुत्र को मूर्ति बनाने की कला में दक्ष करना चाहता था। उसका पुत्र भी लगन और मेहनत से कुछ समय बाद बेहद खूबसूरत मूर्तियाँ बनाने लगा। उसकी आकर्षक मूर्तियों से लोग भी प्रभावित होने लगे। लेकिन उसका पिता उसकी बनाई मूर्तियों में कोई न कोई कमी ...

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प्रेरक-प्रसंग : दोगुना शुल्क

प्रेरक-प्रसंग

एक युवक जो कि संगीत में निपुणता प्राप्त करने की इच्छा रखता था अपने क्षेत्र के सबसे महान संगीताचार्य के पास पहुँचा और उनसे बोला, ”आप संगीत के महान आचार्य हैं और संगीत में निपुणता प्राप्त करने में मेरी गहरी रुचि है। इसलिए आप से निवेदन है कि आप मुझे ...

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प्रेरक प्रसंग : सुखी व्यक्ति की खोज

प्रेरक-प्रसंग

चाँदपुर इलाके के राजा कुँवरसिंह जी बड़े अमीर थे। उन्हें किसी चीज़ की कमी नहीं थी, फिर भी उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं था। बीमारी के मारे वे सदा परेशान रहते थे। कई वैद्यों ने उनका इलाज किया, लेकिन उनको कुछ फ़ायदा नहीं हुआ। राजा की बीमारी बढ़ती गई। सारे नगर ...

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प्रेरक प्रसंग : बुद्धिमानी

प्रेरक प्रसंग

शिवाजी मुगलों के खिलाफ एक बार छापामार युद्ध लड़ रहे थे, एक रात वो थके हालत में एक बुढ़िया की झोंपडी में पहुँचे और उनसे कुछ खाने-पीने के लिए अनुरोध करने लगे. बुढ़िया ने उनके सामने गरम-गरम भात रख दिया. शिवाजी को उतने समय बहुत भूख लगी थी इसलिए उन्होंने ...

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प्रेरक प्रसंग : श्रम का पुरस्कार

प्रेरक प्रसंग

बहुत दिनों पहले की बात है, गिलहरी पूरी तरह काली हुआ करती थी। छोटी-छोटी झाड़ियों के बीच, घास के मैदानों में, ऊँचे बड़े पेड़ों पर रेंगती फिरती कूदती फाँदती लेकिन लोग उसे सुंदर प्राणी नहीं समझते थे। गिलहरी को गाँव के परिवारों के साथ रहना पसंद था लेकिन गाँव वाले ...

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प्रेरक प्रसंग : मित्र और शत्रु

प्रेरक-प्रसंग

एक नगर में एक शीशमहल था। उस महल की हर एक दीवार पर सैकड़ों शीशे जड़े हुए थे। एक दिन एक गुस्सैल इंसान महल को देखने गया। जैसे ही वह महल के भीतर घुसा, वहां अचानक उसे सैकड़ों गुस्सैल इंसान दिखने लगे। सारे के सारे उसी गुस्सैल इंसान से नाराज ...

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प्रेरक-प्रसंग : अभिमान

प्रेरक-प्रसंग

एक प्रसिद्ध मूर्तिकार अपने पुत्र को मूर्ति बनाने की कला में दक्ष करना चाहता था। उसका पुत्र भी लगन और मेहनत से कुछ समय बाद बेहद खूबसूरत मूर्तियाँ बनाने लगा। उसकी आकर्षक मूर्तियों से लोग भी प्रभावित होने लगे। लेकिन उसका पिता उसकी बनाई मूर्तियों में कोई न कोई कमी ...

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