Wednesday , February 22 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : भगवान बुद्ध और किसान

प्रेरक-प्रसंग

एक बार भगवान बुद्ध भिक्षा के लिऐ एक किसान के यहां पहुंचे। तथागत को भिक्षा के लिये आया देखकर किसान उपेक्षा से बोला श्रमण मैं हल जोतता हूं और तब खाता हूं तुम्हें भी हल जोतना और बीज बोना चाहिए और तब खाना खाना चाहिऐ। बुद्ध ने कहा महाराज मैं ...

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प्रेरक-प्रसंग : पंडित जवाहरलाल नेहरू

प्रेरक-प्रसंग

वर्ष 1956 में जब जवाहरलाल नेहरू सऊदी अरब की राजनायिक यात्रा पर गए तो वहां से वापस आते समय शाह सऊद ने उन्हें एक कैडलक कार और उनके साथ आए लोगों को स्विस घड़ियां उपहार में दीं. लेकिन नेहरू इतने महंगे-महंगे तोहफों को पाकर काफी परेशान हो गए थे, वह ...

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प्रेरक-प्रसंग : संयासी और शिष्य

प्रेरक-प्रसंग

एक हिन्दू संयासी अपने शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने पहुंचा. वहां एक ही परिवार के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते-करते एक दूसरे पर क्रोधित हो उठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे. संयासी यह देख तुरंत पलटा और अपने शिष्यों से पूछा; “क्रोध में लोग ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्वामी विवेकानन्द

प्रेरक-प्रसंग

स्वामी विवेकानन्द अमेरिका में भ्रमण कर रहे थे। एक जगह से गुजरते हुए उन्होंने पुल पर खड़े कुछ लड़कों को नदी में तैर रहे अंडे के छिलकों पर बन्दूक से निशाना लगाते देखा। किसी भी लड़के का एक भी निशाना सही नहीं लग रहा था। तब उन्होंने ने एक लड़के ...

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प्रेरक-प्रसंग : लाल बहादुर शास्त्री

प्रेरक-प्रसंग

शास्त्री जी को खुद कष्ट उठाकर दूसरों को सुखी देखने में जो आनंद मिलता था, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। एक बार की घटना है, जब शास्त्री जी रेल मंत्री थे और वह मुंबई जा रहे थे। उनके लिए प्रथम श्रेणी का डिब्बा लगा था। गाड़ी चलने पर शास्त्रीजी ...

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प्रेरक-प्रसंग : राम का नाम

प्रेरक-प्रसंग

रात बहुत काली थी और मोहन डरा हुआ था। हमेशा से ही उसे भूतों से डर लगता था। वह जब भी अँधेरे में अकेला होता उसे लगता की कोई भूत आस-पास है और कभी भी उसपे झपट पड़ेगा। और आज तो इतना अँधेरा था कि कुछ भी स्पष्ट नहीं दिख ...

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प्रेरक-प्रसंग : सच बोलने का साहस

प्रेरक-प्रसंग

स्वामी विवेकानन्द स्वामी प्रारंभ से ही एक मेधावी छात्र थे और सभी उनके व्यक्तित्व और वाणी से प्रभावित रहते थे। जब वो साथी छात्रों से कुछ बताते तो सब मंत्रमुग्ध हो उन्हें सुनते। एक दिन इंटरवल के दौरान वो कक्षा में कुछ मित्रों को कहानी सुना रहे थे, सभी उनकी ...

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प्रेरक-प्रसंग : आत्मविश्वास से विजय

आत्मविश्वास

यह घटना है साल 1960 की। स्थान था यूरोप का भव्य ऐतिहासिक नगर तथा इटली की राजधानी रोम। सारे विश्व की निगाहें 25 अगस्त से 11 सितंबर तक होने वाले ओलंपिक खेलों पर टिकी हुई थीं। इन्हीं ओलंपिक खेलों में एक बीस वर्षीय अश्वेत बालिका भी भाग ले रही थी। ...

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प्रेरक-प्रसंग : अहंकार

प्रेरक-प्रसंग

रामकृष्ण परमहंस को अध्यात्म पर चर्चा करना बहुत अच्छा लगता था। अक्सर वे विभिन्न संप्रदायों के संतों से मिलते और गंभीर चर्चा शुरू कर देते थे। एक बार वे नागा गुरु तोतापुरी के साथ बैठे थे। माघ का महीना था और धूनी जल रही थी। ज्ञान की बातें हो रही ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्वाभिमान

प्रेरक-प्रसंग

किसी गाँव में रहने वाला एक छोटा लड़का अपने दोस्तों के साथ गंगा नदी के पार मेला देखने गया। शाम को वापस लौटते समय जब सभी दोस्त नदी किनारे पहुंचे तो लड़के ने नाव के किराये के लिए जेब में हाथ डाला। जेब में एक पाई भी नहीं थी। लड़का ...

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