Wednesday , September 20 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : पूजनीय कौन

प्रेरक-प्रसंग

एक मंदिर में स्थापित प्रस्तर प्रतिमा पर चढ़ाए गए पुष्प ने क्रोधित होकर पुजारी से कहा, “तुम प्रतिदिन इस प्रस्तर प्रतिमा पर मुझे चढ़ाकर इसकी पूजा करते हो। यह मुझे कतई पसंद नहीं है। पूजा मेरी होनी चाहिये क्योंकि मैं कोमल, सुंदर, सुवासित हूँ। यह तो मात्र पत्थर की मूर्ति ...

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प्रेरक-प्रसंग : पुरानी नाक

प्रेरक-प्रसंग

एक ग़रीब मनुष्य ने देवता से वर प्राप्त किया था। देवता संतुष्ट हो कर बोले तुम ये पासा लो। इस पाँसे को जिन किन्हीं तीन कामनाओं से तीन बार फेंकोगे वे तीनों पूरी हो जाएँगी। वह आनंदोल्लासित हो घर जाकर अपनी स्त्री के साथ परामर्श करने लगा क्या वर माँगना ...

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प्रेरक-प्रसंग : प्रेमचंद की गाय

प्रेरक-प्रसंग

उन दिनों प्रसिद्ध उपन्यास-लेखक मुंशी प्रेमचंद गोरखपुर में अध्यापक थे। उन्होंने अपने यहाँ गाय पाल रखी थी। एक दिन चरते-चरते उनकी गाय वहाँ के अंग्रेज़ जिलाधीश के आवास के बाहर वाले उद्यान में घुस गई। अभी वह गाय वहाँ जाकर खड़ी ही हुई थी कि वह अंग्रेज़ बंदूक लेकर बाहर ...

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प्रेरक-प्रसंग : पिंजरे के पंछी

प्रेरक-प्रसंग

चंद्र प्रकाश के चार साल के बेटे को पंछियों से बेहद प्यार था। वह अपनी जान तक न्योछावर करने को तैयार रहता। ये सभी पंछी उसके घर के आंगन में जब कभी आते तो वह उनसे भरपूर खेलता। उन्हें जी भर कर दाने खिलाता। पेट भर कर जब पंछी उड़ते ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्वामी विवेकानंद

प्रेरक-प्रसंग

बात उस समय की है, जब विवेकानंद जी को शिकागो की धर्मसभा में भारतीय संस्कृति पर बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। वे भारत के प्रथम संत थे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय सर्वधर्म सभा में प्रवचन देने हेतु आमंत्रित किया गया था। स्वामी विवेकानंद के गुरू रामकृष्ण परमहंस का देहांत हो ...

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प्रेरक-प्रसंग : पश्चाताप

प्रेरक-प्रसंग

कर्णवास का एक पंडित महर्षि दयानंद सरस्वती को प्रतिदिन गालियाँ दिया करता था, पर महर्षि शांत भाव से उन्हें सुनते रहते और उसे कुछ भी उत्तर न देते। एक दिन जब वह गाली देने नहीं आया तब महर्षि ने लोगों से उसके न आने का कारण पूछा। लोगों ने बताया, ...

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प्रेरक-प्रसंग : बच्चे की सीख

प्रेरक-प्रसंग

बचपन से ही एक महिला को अध्यापिका बनने तथा बच्चों को मारने का बड़ा शौक था। जब वह पाँच साल की थी तब छोटे-छोटे बच्चों का स्कूल लगा कर बैठ जाती। उन्हें लिखाती पढ़ाती और जब उन्हें कुछ न आता तो खूब मारती। बड़ी होकर वह अध्यापिका बन गई। स्कूल ...

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प्रेरक-प्रसंग : वर्तमान क्षण

प्रेरक-प्रसंग

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। महाराज युधिष्ठिर राजा बन चुके थे। अपने चारों छोटे भाइयों की सहायता से वह राजकाज चला रहे थे प्रजा की भलाई के लिए पाँचों भाई मिलजुल कर जुटे रहते। जो कोई दीन-दुखी फरियाद लेकर आता, उसकी हर प्रकार से सहायता की जाती। एक ...

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प्रेरक-प्रसंग : खुशी का मंत्र

प्रेरक-प्रसंग

एक बार की बात है, दीपावली की शाम थी, मैं दिये सजा ही रहा था कि एक ओर से दीपों के बात करने की आवाज़ सुनाई दी। मैंने ध्यान लगा कर सुना। चार दीपक आपस में बात कर रहे थे। कुछ अपनी सुना रहे थे कुछ दूसरों की सुन रहे ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्वभाव

प्रेरक-प्रसंग

एक बार एक भला आदमी नदी किनारे बैठा था। तभी उसने देखा एक बिच्छू पानी में गिर गया है। भले आदमी ने जल्दी से बिच्छू को हाथ में उठा लिया। बिच्छू ने उस भले आदमी को डंक मार दिया। बेचारे भले आदमी का हाथ काँपा और बिच्छू पानी में गिर ...

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