Friday , March 31 2017

प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : महात्मा बुद्ध

प्रेरक-प्रसंग

एक बार बुद्ध से मलुक्यपुत्र ने पूछा, भगवन आपने आज तक यह नहीं बताया कि मृत्यु के उपरान्त क्या होता है? उसकी बात सुनकर बुद्ध मुस्कुराये, फिर उन्होंने उससे पूछा, पहले मेरी एक बात का जबाव दो। अगर कोई व्यक्ति कहीं जा रहा हो और अचानक कहीं से आकर उसके ...

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प्रेरक-प्रसंग : महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन

प्रेरक-प्रसंग

महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन (Thomas Alva Edison) बहुत ही मेहनती एंव जुझारू प्रवृति के व्यक्ति थे| बचपन में उन्हें यह कहकर स्कूल से निकाल दिया गया कि वह मंद बुद्धि बालक है| उसी थॉमस एडिसन ने कई महत्वपूर्ण आविष्कार किये जिसमें से “बिजली का बल्ब” प्रमुख है| उन्होंने बल्ब का ...

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प्रेरक-प्रसंग : लाल बहादुर शास्त्री

प्रेरक-प्रसंग

शास्त्री जी को खुद कष्ट उठाकर दूसरों को सुखी देखने में जो आनंद मिलता था, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। एक बार की घटना है, जब शास्त्री जी रेल मंत्री थे और वह मुंबई जा रहे थे। उनके लिए प्रथम श्रेणी का डिब्बा लगा था। गाड़ी चलने पर शास्त्रीजी ...

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प्रेरक-प्रसंग : छत्रपति शिवाजी

प्रेरक-प्रसंग

शिवाजी मुगलों के खिलाफ एक बार छापामार युद्ध लड़ रहे थे, एक रात वो थके हालत में एक बुढ़िया की झोंपडी में पहुँचे और उनसे कुछ खाने-पीने के लिए अनुरोध करने लगे. बुढ़िया ने उनके सामने गरम-गरम भात रख दिया. शिवाजी को उतने समय बहुत भूख लगी थी इसलिए उन्होंने ...

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प्रेरक-प्रसंग : महात्मा गांधी

प्रेरक-प्रसंग

एक अंग्रेज ने महात्मा गांधी को पत्र लिखा। उसमें गालियों के अतिरिक्त कुछ था ही नहीं। गांधीजी ने पत्र पढ़ा और उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया। उसमें जो आलपिन लगा हुआ था उसे निकालकर सुरक्षित रख लिया। वह अंग्रेंज गांधीजी से प्रत्यक्ष मिलने के लिए आया। आते ही ...

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प्रेरक-प्रसंग : पंडित जवाहरलाल नेहरू

प्रेरक-प्रसंग

एक दिन तीन मूर्ति भवन के बगीचे में लगे पेड़-पौधों के बीच से गुजरते हुए घुमावदार रास्ते पर जवाहरलाल नेहरू जी टहल रहे थे. उनका ध्यान पौधों पर था. तभी पौधों के बीच से उन्हें एक बच्चे के रोने की आवाज आई. नेहरूजी ने आसपास देखा तो उन्हें पेड़ों के ...

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प्रेरक-प्रसंग : महात्मा बुद्ध

प्रेरक-प्रसंग

बुद्ध का अंतिम दिन था जिस दिन वे भोजन करने इक बहुत ग़रीब लुहार के यहाँ गए थे। लुहार अत्यंत ग़रीब था उसके पास बुद्ध को खिलाने के लिए कुछ नहीं था। बरसात में लकड़ियों पर उगने वाली छतरी नुमा कुकरमुत्ते की सब्जी बड़े प्रेम से बना लाया। जहर से ...

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प्रेरक-प्रसंग : महात्मा गांधी

प्रेरक-प्रसंग

स्वतंत्रता आन्दोलन की सफलता के फलस्वरूप जब देश से जब अंग्रेज़ों के जाने का समय आ गया था उस समय भी गांधी जी आपने आश्रम में चरखे पर सूत ही कात रहे थे। भारत के भावी प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू विभिन्न मुद्दों पर मन्त्रणा करने के लिये गांधी जी के पास ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्वामी विवेकानंद

प्रेरक-प्रसंग

स्वामी विवेकानंद जी से मुशीं फैज अली ने पूछा : “स्वामी जी हमें बताया गया है कि अल्लहा एक ही है। यदि वह एक ही है, तो फिर संसार उसी ने बनाया होगा ? “स्वामी जी बोले, “सत्य है।”. मुशी जी बोले ,”तो फिर इतने प्रकार के मनुष्य क्यों बनाये। ...

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प्रेरक-प्रसंग : जवाहरलाल नेहरू

प्रेरक-प्रसंग

एक बार जब जवाहरलाल नेहरू तमिलनाडु के दौरे पर गए तब जिस सड़क से वे गुजर रहे थे वहां लोग साइकलों पर खड़े होकर तो कहीं दीवारों पर चढ़कर नेताजी को निहार रहे थे. प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए हर आदमी इतना उत्सुक था कि जिसे जहां समझ ...

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