मूर्ति स्थापित करने के लिए श्रद्धालुओं ने घर पर की साफ-सफाई, मिट्टी के गणेश स्थापित कर घर में विसर्जन
रिद्धी सिद्धी के दाता श्रीगणेश शनिवार को घर-घर विराजेंगे। श्रीगणेश चतुर्थी पूजन की तैयारियों का शुक्रवार को अंतिम दौर चला। मूर्ति स्थापित करने के लिए श्रद्धालुओं ने घर पर साफ-सफाई की। कोरोना संकट के चलते गंगा में मूर्ति विसर्जन पर पाबंदी है, इसीलिए धर्मगुरू मिट्टी की छोटी मूर्ति स्थापित करने की सलाह दे रहे हैं।

आचार्य हेमंत शास्त्री ने बताया कि गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। कोरोना संकट है तो श्रद्धालुओं को अपने और दूसरे के स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए ये पर्व मनाना होगा। शनिवार को घर में ही यह पर्व उल्लास के साथ मनाया जा सकता है। पूजन का शुभ मुहूर्त प्रात: 07:11 से 10:06 बजे तक और इसके उपरांत दोपहर 12:20 से शाम 05:40 बजे तक है। श्रद्धालु गणेश की मिट्टी की मूर्ति लाकर स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मूर्ति रखें और पूजन करें। लड्डू का भोग लगाएं।
126 साल बाद बन रहा योग
महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंदपुरी ने बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि गुरु-शिष्य परंपरा के तहत इसी दिन से विद्याध्यन का शुभारंभ होता था। प्रतिमा के स्थापन के उपरांत आगामी 10 दिनों तक गणेश उत्सव मनाया जाएगा। चतुर्थी तिथि का आरंभ शुक्रवार को मध्यरात्रि 1:59 मिनट से हो रहा है। भगवान गणेश का जन्म मध्यमान काल में हुआ था। इसीलिए पूजा भी मध्यमान काल में की जाएगी। वहीं, इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर सूर्य ङ्क्षसह राशि में और मंगल मेष राशि में हैं। सूर्य और मंगल का यह योग 126 साल बाद बन रहा है। यह योग सभी राशियों के लिए अत्यंत फलदायी रहेगा।
पांच दीपक जलाएं
संस्कार भारती संस्था ने गणेश चतुर्थी हर घर में पांच दीपक जलाने की अपील की है। जिला संयोजक भुवनेश वाष्र्णेय ने बताया कि कोरोना संकट के चलते श्री वाष्र्णेय मंदिर में कोई आयोजन नहीं हो रहा।