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डॉक्टरों ने शरीर के सबसे नाजुक अंग को बदलकर किया बड़ा कारनामा

मांस निकाल करनई दिल्ली। जांघ से मांस निकाल कर डॉक्टरों ने नई जीभ बनाने में कामयाबी हासिल की  है। माउथ कैंसर से जूझ रहे एक युवक की जान बचाने के लिए डॉक्टरों न केवल उसके जबड़े को बचाया, बल्कि रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की मदद से जीभ भी बनाने में सफल रहे। कैंसर की वजह से मरीज दर्द से बेहद परेशान था। यहां तक कि वह लिक्विड भी नहीं ले पा रहा था। लेकिन सर्जरी के बाद वह न केवल लिक्विड डायट पर है बल्कि बोल भी पा रहा है।

सर्जरी करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि यह अपने आप में एक दुर्लभ मामला है। 13 घंटे तक चली इस सर्जरी में मरीज का पूरा जबड़ा बचाने में कामयाबी मिली और नई जीभ बनाकर इंप्लांट भी कर दी गई है। फोर्टिस फरीदाबाद के ऑन्कोलॉजी सर्जन डॉक्टर नितिन सिंघल ने कहा कि मरीज को गुटखे की लत की वजह से कैंसर हो गया था। उसने कई जगह अपना इलाज कराया। सभी जगह उसे इलाज के लिए सर्जरी की सलाह दी गई, लेकिन साथ में यह भी बताया गया कि जबड़ा निकालना पड़ेगा, जिसकी वजह से मरीज को अपना चेहरा टेढ़ा होने का डर बैठ गया। इसलिए उसने सर्जरी कराने से इनकार कर दिया।

डॉक्टर सिंघल ने कहा कि जब मरीज हमारे हॉस्पिटल में आया तो जांच में पाया गया कि उसकी पूरी जीभ से लेकर जबड़े की हड्डी तक कैंसर फैल चुका था। डॉक्टर सिंघल ने कहा कि हमने मरीज को भरोसा दिलाया कि उसका चेहरा भी टेढ़ा नहीं होगा और उसे इस दर्द से छुटकारा भी मिल जाएगा। डॉक्टर के अनुसार, मरीज की हालत बेहद खराब थी। उसे बहुत दर्द था और पिछले दो-ढाई महीने से बोलने तक में दिक्कत हो रही थी। वह ठीक से खा-पी भी नहीं पा रहा था। हमने सर्जरी की प्लानिंग की और जीभ निकालकर नई जीभ बनाकर इंप्लांट करने का फैसला किया।

डॉक्टर ने कहा कि मरीज के जबड़े का ऊपरी हिस्सा खराब था, पूरा बेस खराब नहीं था। इसलिए हम सर्जरी में उसका जबड़ा बचाने में कामयाब रहे। एक साथ कैंसर टिशू निकाल पाए। जीभ निकालने के बाद प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर सुरेंद्र चावला ने मरीज के जांघ से एंट्रोलैटरल थाई फ्लैप से मांस का टुकड़ा निकालकर उसे जीभ की शेप दी और गले के ब्लड वेसल्स से जोड़ दिया।

हालांकि, यह जीभ नेचुरल जीभ की तरह काम नहीं करेगी, लेकिन मरीज को इसके बाद हल्का-हल्का बोलने में मदद मिलेगी। डॉक्टरों द्वारा तैयार की गई यह जीभ नेचरल जीभ की तरह मूव नहीं होगी और इसका शेप भी कुदरती जीभ की तरह नहीं होगा। लेकिन समय के साथ बॉडी इस जीभ को अडॉप्ट कर लेगी और मरीज आने वाले समय में सॉलिड फूड भी खा पाएगा।

डॉक्टर सिंघल ने कहा, ’13 घंटे तक सर्जरी चली और इसमें सबसे बड़ा चैलेंज एक बार में कैंसर टिशू निकाल लेना, फेस को टेढ़ा होने से बचाना और जीभ की जगह नई जीभ लगाना था। सर्जरी के पांच दिन बाद ही मरीज लिक्विड लेने लगा था और धीरे-धीरे सुधार होता जा रहा है। यह सर्जरी उन लोगों को भी जागरूक करेगी जो इलाज मुमकिन होने के बावजूद केवल डर से सर्जरी नहीं कराते हैं।’

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