
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र में स्थित कपसाड़ गांव में दलित महिला सुनीता की हत्या और उनकी 20 वर्षीय बेटी के अपहरण की घटना ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया है।
घटना 8 जनवरी को सुबह हुई, जब मां-बेटी खेत जा रही थीं। गांव के ही कंपाउंडर पारस राजपूत ने बेटी को जबरन ले जाने की कोशिश की। विरोध करने पर पारस ने धारदार हथियार से सुनीता पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। आरोपी बेटी को अगवा कर फरार हो गया।
पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और अपहृत युवती की सकुशल बरामदगी तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। गांव में भारी तनाव को देखते हुए पुलिस ने सभी रास्ते सील कर दिए और भारी बल व पीएसी तैनात कर दी। बाहरी लोगों की एंट्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
विधायक को रोका, धरने पर बैठे अतुल प्रधान
सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान पीड़ित परिवार से मिलने गांव पहुंचे, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें गांव के बाहर ही रोक दिया। इससे नाराज विधायक मौके पर ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। विधायक ने आरोप लगाया कि पीड़ितों से मिलने से रोकना सरकार की संवेदनहीनता दिखाता है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
पुलिस का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। मुख्य आरोपी पारस और उसके साथियों की तलाश में कई टीमें गठित की गई हैं। दबिश जारी है और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद है।




