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नोटबंदी के कारण बेरोजगार मजदूरों ने कराई नसबंदी

नोटबंदीगोरखपुर। नोटबंदी का असर कई शहरों में दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ा है। गोरखपुर में तो खाली बैठे तीन दर्जन से ज्यादा दिहाड़ी मजदूरों ने इस दौरान नसबंदी करा ली। पहले काम के बोझ की वजह से उन्हें नसबंदी कराने की फुरसत नहीं मिल पा रही थी। नसबंदी कराने पर एक हजार रुपये नकद मिलने से उनका धन संकट भी कुछ दूर हुआ है।

नसबंदी कराने वालों में शामिल 23 साल के एक युवक ने बताया कि वह दो बच्चों का पिता है। उसने बताया कि इस समय फुरसत के वक्त में नसबंदी कराने से उसे आराम का पूरा समय मिला। साथ ही खर्च के लिए हजार रुपये अलग से। पहले उसे इसी बात की चिंता रहती थी कि नसबंदी के कारण कमजोरी होने पर वह आराम नहीं कर पाएगा और अगर 10-15 दिन बैठ गया तो घर कैसे चलेगा।

मजदूरों को प्रेरित कर रही संस्था: परिवार नियोजन कराने वाली संस्था पीसीआई के काउंसलर मोहनलाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की हौसला साझेदारी योजना के तहत वह नसबंदी के लिए खासतौर पर मजदूरों को प्रेरित करते हैं। मोहनलाल ने बताया कि नोटबंदी से पहले मजदूरों को राजी करने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही थी। कमजोरी होने और आराम का समय न होने की बात कहकर मजदूर टाल देते थे। लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि यह सही वक्त है और ज्यादा मजदूर इस ओर प्रेरित हो रहे हैं।

पीसीआई के टीम लीडर संदीप पांडेय के अनुसार, 20 अक्तूबर से 25 नवंबर के बीच कुल 49 दिहाड़ी मजदूरों की नसबंदी हुई है। इनमें से 39 की नसबंदी नोटबंदी के 15 दिनों में हुई है। नसबंदी कराने वालों में सबसे कम उम्र का एक युवक मात्र 23 साल का है।

नसबंदी कराने पर मजदूरों को संस्था की ओर से एक हजार रुपये नकद और तीन लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी कराया जा रहा है।

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