अरुण जेटली ने जीडीपी आंकड़े घटाने के कांग्रेस के आरापों को नकारा

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के बीते कार्यकालों के जीडीपी आंकड़े घटाए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह आंकड़े वास्तविक हैं, काल्पनिक नहीं हैं। कांग्रेस ने इन आंकड़ों को ‘द्वेषपूर्ण से ओत-प्रोत और चालबाजी’ करार दिया था।

अरुण जेटली

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “डेटा वास्तविक है। यह काल्पनिक नहीं है। यह विधि विश्वस्तरीय है। जिसका संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ने 2015 में स्वागत किया था और अब 2018 में इसकी आलोचना की जा रही है, क्योंकि आंकड़ों में कमी दर्शाई गई है।”

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उन्होंने कहा कि केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) एक उच्चस्तरीय भरोसेमंद संगठन है और इसने वित्त मंत्रालय से भी उचित दूरी बनाए रखी है। उन्होंने कहा, “वास्तव में हमें भी डेटा के बारे में जानकारी तब मिली, जब इसे अंतिम रूप से जारी कर दिया गया।”

कांग्रेस ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली पर उनके द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था को हुई ‘भारी क्षति’ को छिपाने के लिए जीडीपी के आंकड़ों में ‘द्वेषपूर्ण और चालबाजी’ करने का आरोप लगाया।

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कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि ‘विफल मोदीनोमिक्स’ और ‘पकोड़ा इकोनोमिक्स विजन’ ने भारत की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, “नीति आयोग का नया जीडीपी आंकड़ा ‘एक मजाक, खराब मजाक और खराब मजाक से भी बुरा’ था। आंकड़े छवि धूमिल करने (हैचेट जॉब) के इरादे से किए गए। नीति आयोग ने छवि धूमिल करने का काम किया है, यह समय है कि इस पूरी तरह से बेकार संस्था को बंद कर दिया जाए।”

जेटली ने कहा कि संप्रग सरकार के अंतिम वित्त वर्ष 2012-13 और 2013-14 के जीडीपी वृद्धि को सरकार और लोगों ने सराह था। उन्होंने कहा, “वास्तव में नए जीडीपी सीरीज इस बात को फिर से स्थापित करते हैं कि हमने अर्थव्यवस्था का खराब प्रबंधन नहीं किया है।”

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उन्होंने कहा, “अब वही मानदंड के साथ इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए, नया सीरीज वित्तीय वर्ष 2004 या 2005 से लागू होगा। इसलिए नए सीरीज के आधार पर वृद्धि में या तो बढ़ोतरी हो सकती है या कमी हो सकती है, यह डाटा के उपयुक्तता पर निर्भर करेगा।”

वित्तमंत्री ने कहा कि पद्धति वही रहेगी। इसलिए इसकी तुलना करने के दौरान ‘मापदंड’ भी वही रहेंगे। सरकार ने बुधवार को संप्रग सरकार के 10 साल का जीडीपी आंकड़ा जारी किया था, जिसे साल 2004-05 के आधार की बजाय 2011-12 के आधार पर संशोधित किया गया।

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