न्यू पेंशन स्कीम के मद्देनजर 12 हजार कर्मचारी रहे हड़ताल पर, रिवॉल्वर का उत्पादन ठप

कानपुर। प्रतिरक्षा इकाइयों के निजीकरण, निर्माणियों में कम होते वर्क लोड, न्यू पेंशन स्कीम के विरोध में कानपुर की पांचों आयुध निर्माणियों व अन्य प्रतिरक्षा प्रतिष्ठानों में बृहस्पतिवार को भी हड़ताल रही। निर्माणियों के अलावा डीएमएसआरडीई समेत अन्य रक्षा-प्रतिरक्षा इकाइयों के करीब 12 हजार कर्मचारी हड़ताल पर रहे।

पेंशन स्कीम

ओएफसी, फील्डगन में शारंग, धनुष, बोफोर्स, सोल्टम तोप के बैरल और तोप के शेल नहीं बने। इसी तरह एसएएफ में कई प्रकार के रिवाल्वर, मशीनगन, कारबाइन का उत्पादन प्रभावित हुआ। ओपीएफ में कई प्रकार के पैराशूट और ओईएफ में टेंट, गद्दे आदि का उत्पादन प्रभावित रहा।

भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ, आल इंडिया डिफेंस इप्लाइज फेडरेशन, इंडियन नेशनल डिफेंस वर्कर्स फेडरेशन के महासंघों के आह्वान पर तीन दिन की हड़ताल की जा रही है। ‘न्यू पेंशन स्कीम स्वीकार नहीं’ टोपी पहने प्रतिरक्षा कर्मी सुबह से ही निर्माणियों के गेट पर डट गए थे।

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तीनों महासंघों के आह्वान के कारण कोई भी कर्मचारी निर्माणी के अंदर नहीं गया। प्रतिरक्षा कर्मचारी नेता केके तिवारी की अगुवाई में एसएएफ फील्डगन, ओएफसी में हड़ताल की गई। उन्होंने कहा कि पांचों निर्माणियों के अलावा डीएमएसआरडीई समेत अन्य रक्षा-प्रतिरक्षा इकाइयों में उत्पादन प्रभावित रहा। ओपीएफ, ओईएफ में शत-प्रतिशत हड़ताल रही। निर्माणियों के बाहर जमकर नारेबाजी की गई।

हड़ताल के दौरान बीएमएस के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुकेश सिंह, छवि लाल, घनश्याम त्रिपाठी। ओएफसी में विनोद तिवारी, राधेश्याम, राम प्रकाश। ओईएफ में इंटक नेता आशीष पांडेय, संजीव श्रीवास्तव। किला मजदूर यूनियन के वेद प्रकाश, सिद्घनाथ तिवारी, समीर बाजपेई।

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फील्ड गन में सौरभ सिंह, भूपेंद्र यादव, विमल कांत आदि ने हड़ताल की कमान संभाली। हालांकि इस दौरान कुछ कर्मियों ने निर्माणी के अंदर जाने का प्रयास किया लेकिन तैनात वालंटियर्स ने घुसने नहीं दिया। राम नयन यादव, राना विजय कुमार, रमेश आदि थे। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जा सकती है।

 

 

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