प्रदेश में पुलिस विभाग के आश्रितों के 1 लाख 29 हजार पद खाली, लेकिन…

REPORT – SYED

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश पुलिस का नारा सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा है। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश पुलिस को विश्व की सबसे बड़ी पुलिस होने का तमगा मिला है। संख्या बल के हिसाब से विश्व की सबसे बड़ी पुलिस होने के कारण इसके लिए काम करना बेहद मुश्किल होता है।

पुलिस विभाग

उत्तर प्रदेश की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी जी जान से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। हर मौसम में बड़ी मुस्तैदी से अपने सीमा क्षेत्रों में ड्यूटी करते हैं। इस दौरान हर साल सैकड़ों की संख्या में पुलिस कर्मी अपनी जान गवां देते हैं। लेकिन जान देने वाले इन कर्मियों के परिजनों के साथ पुलिस का ही रवैया सम्मानजनक नहीं रहता है।

पुलिस सेवा नियमावली में ये प्रावधान है कि अगर अपने सेवाकाल के दौरान कोई पुलिसकर्मी दिवंगत हो जाता है तो उसके आश्रितों को नौकरी देने का प्रावधान है। पुलिस सेवा की ये नियमावली समय-समय पर अपडेट होती रहती है।

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अभी तक जो भी भर्तियां हुई वो 1974 के नियमावली के हिसाब से होती रही है। लेकिन 2008 में इस नियमावली को बदल दिया गया और 48 सौ मीटर की दौड़ 20 मिनट में पूरी करने वाले अभ्यर्थी को ही सेवायोजित किया जाने लगा जो कि काफी कठिन था। 2008 की नियमावली के हिसाब से भर्ती अभी चल ही रही थी कि 2015 में पुलिस विभाग ने एक बार फिर से नियमावली को बदल दिया।

नई नियमावली के हिसाब से मृतक आश्रित कोटे से सब इंस्पेक्टर के लिए 28 मिनट में 48 सौ मीटर की दौड़ पूरी करनी अनिवार्य है और दौड़ पूरी करने के बाद एक लिखित परीक्षा भी पास करना होगा तभी अभ्यर्थी का चयन होगा।

इस नई नियमावली के तहत 11 अक्टूबर 2019 को सब इंस्पेक्टर कोटे के 456 अभ्यर्थियों के लिए सिर्फ 29 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया। इस नोटिफिकेशन के बाद 17 नवंबर 2019 को अभ्यर्थियों की दौड़ 24 अक्टूबर को लखनऊ में निर्धारित करने के लिए एडमिट कॉर्ड भी जारी होता है। लेकिन फिर 22 अक्टूबर 2019 को एक नोटिफिकेशन आता है कि 24 अक्टूबर को होने वाली दौड़ कैंसिल कर दी गई है।

 

 

 

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