जनता का लगाव कम होने से चिंता में डूबी बीजेपी, आगामी चुनावों के लिए बदलेगी रणनीति

दिल्ली और झारखंड चुनावों में हार का सामना करने के बाद बीजेपी अब अपनी कमियों पर लगाम लगाना चाहती है. इसको लेकर बीजेपी अध्यक्ष नड्डा ने आगामी चुनावों के लिए रणनीति बदलने पर जोर दिया है.  दिल्ली विधानसभा चुनावों में हार के बाद चुनावी रणनीति की समीक्षा कर रही भारतीय जनता पार्टी राज्यों में अब पचास फीसदी वोट हासिल करने के लिए लोकप्रिय स्थानीय नेतृत्व को बढ़ावा देने तथा समान विचारधारा वाले क्षेत्रीय दलों के साथ गठजोड़ पर गंभीरता से विचार कर रही है.

बीजेपी की रणनीति

बदलेगी चुनावी रणनीति-

झारखंड में झाविमो  के नेता बाबूलाल मरांडी की भाजपा में वापसी को इसी नजरिये से देखा जा रहा है. दिल्ली में चुनावी हार के बाद हुई समीक्षा बैठकों से मिले संकेतों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व भविष्य में प्रदेशों में होने वाले चुनावों में, जहां संभव होगा, मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार देने को प्राथमिकता देगा.

झारखंड और दिल्ली में हार का कारण-

पिछले सप्ताह यहां हुई समीक्षा बैठकों में मौजूद सूत्रों ने बताया कि झारखंड और दिल्ली में पार्टी को समर्थन न मिलने का एक कारण उसके पास लोकप्रिय मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार न होना भी था. झारखंड में मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में पार्टी ने चुनाव लड़ा था, जिनके खिलाफ कार्यकर्ताओं में नाराजगी की खबरें आलाकमान को भी मिली थीं. जबकि दिल्ली में भाजपा ने किसी को भी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया.

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पहले से अधिक घट गया बीजेपी वोटों का प्रतिशत-

019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को 15 राज्यों में अपने दम पर 50 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जबकि बिहार और महाराष्ट्र में वह क्रमश: 52 और 50 प्रतिशत वोट अपने सहयोगियों के साथ हासिल करने में सफल हुई. बहरहाल, इसके बाद हरियाणा एवं झारखंड में पार्टी बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर सकी. हरियाणा में भाजपा का मत प्रतिशत 36 रहा, जबकि झारखंड में यह 33.37 प्रतिशत रह गया. दिल्ली में 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को 56.58 फीसद वोट मिले थे और हाल के विधानसभा चुनाव में यह घटकर 38.5 प्रतिशत रह गए.

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