
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के राईथल गांव में एक अनोखा त्योहार मनाया जाता है, जिसे बटर फेस्टिवल या अंदूरी उत्सव कहा जाता है। यहां लोग रंगों की जगह मक्खन और छाछ से होली खेलते हैं। हिमालय की खूबसूरत घास के मैदानों में होने वाला यह उत्सव अब पर्यटकों के बीच भी लोकप्रिय हो रहा है।
बटर फेस्टिवल क्या है?
हर साल दयारा बुग्याल के हरे-भरे अल्पाइन घास के मैदानों में यह उत्सव मनाया जाता है। बुग्याल का मतलब स्थानीय बोली में चरागाह होता है। यह त्योहार राईथल गांव के ग्रामीणों की पशुपालन परंपरा से जुड़ा है।
गर्मियों में गांव वाले अपने मवेशियों को दयारा बुग्याल ले जाते हैं, जहां वे महीनों तक चरते हैं। चरवाहे अस्थायी झोपड़ियों में रहते हैं। माना जाता है कि यहां की पौष्टिक घास से पशु स्वस्थ लौटते हैं और बेहतर दूध देते हैं। जब मवेशी वापस लौटते हैं, तब उनके स्वागत में यह त्योहार मनाया जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार मवेशी भगवान कृष्ण और उनके मक्खन प्रेम से जुड़े हैं। यह उत्सव आमतौर पर भाद्रपद संक्रांति के आसपास (अगस्त में) होता है। इस साल यह 15 से 18 अगस्त तक मनाया जा रहा है। लोग भगवान कृष्ण और बुग्याल माता का आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने मवेशियों की देखभाल की और दूध-मक्खन की प्रचुरता दी।
कैसे मनाया जाता है?
उत्सव की शुरुआत पूजा-पाठ से होती है। पारंपरिक संगीत और लोक नृत्य जैसे धिमाई व मीठी के साथ माहौल बनता है। दही-हंडी की रस्म भी शामिल होती है।
इसके बाद असली मजा शुरू होता है। लोग एक-दूसरे के चेहरे पर मक्खन मलते हैं, छाछ छिड़कते और डालते हैं। पूरा मैदान होली जैसा गंदला और मजेदार बन जाता है। तैयारी हफ्तों पहले शुरू हो जाती है। घरों को फूलों से सजाया जाता है और दरवाजों पर पूरीयां लटकाई जाती हैं।
पहले इसमें गोबर फेंकने की परंपरा थी, लेकिन बाद में मक्खन और छाछ ने उसकी जगह ले ली। पर्यटन बढ़ने के साथ उत्सव और भव्य हो गया है। अब इसमें ट्रेकिंग, रात भर कैंपिंग और संगीत कार्यक्रम भी शामिल किए जाते हैं।
कैसे पहुंचें?
राईथल देहरादून या मसूरी से टैक्सी या लोकल बस से पहुंचा जा सकता है। जाने से पहले रूट, परमिट और टाइमिंग चेक कर लें। राईथल दयारा बुग्याल ट्रेक का शुरुआती बिंदु भी है, इसलिए त्योहार के साथ हिमालय की सैर भी की जा सकती है।




