राजधानी लखनऊ इस समय गोमती नदी के उफान और जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि के कारण भीषण बाढ़ के संकट से जूझ रही है। नदी का बढ़ता पानी अब केवल निचले इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शहर की प्रमुख कॉलोनियों, सोसाइटियों और व्यावसायिक केंद्रों तक अपनी पहुंच बना चुका है।
बाढ़ की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि फैजुल्लागंज और इटौंजा जैसे इलाकों में हालात बेकाबू नजर आ रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं, जबकि कई कॉलोनियों से जानमाल की सुरक्षा के डर से लोग पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। पानी का बहाव शहर के प्रतिष्ठित प्लासियो मॉल और एमार गोमती ग्रीन्स सोसाइटी के बिल्कुल करीब तक पहुंच गया है, जिसने शहरी बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी है और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
बाढ़ की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर तेज कर दिए हैं। लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी. और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने खुद मोर्चा संभालते हुए बरावन कला, सैथा और जेहटा जैसे जलमग्न इलाकों का नाव से दौरा किया। घुटनों तक भरे पानी के बीच अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और बचाव दलों को सख्त निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे पहले सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
राहत कार्यों को सुचारू बनाने के लिए दस अतिरिक्त नावों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, रात के समय जलमग्न इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाने और दाऊद नगर में एक विशेष अतिरिक्त कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रभावित लोगों को तुरंत सहायता मिल सके।
हालांकि, प्रशासनिक दावों के उलट जमीनी स्तर पर लोगों में भारी आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है। फैजुल्लागंज के पवन विहार जैसे इलाकों में स्थानीय निवासियों का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा जब घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें निकालने के लिए नाव नहीं पहुंची। आशीष सिंह और उनके साथियों का आरोप है कि उन्होंने एक महिला को सुरक्षित निकालने के लिए नाव बुलाई थी, लेकिन मदद समय पर नहीं आई, जिसके कारण मौके पर पहुंची पुलिस के साथ स्थानीय लोगों की तीखी नोकझोंक भी हुई।
लोहरामऊ, श्याम सुंदर कॉलोनी, गोमती पुरम और दुर्गा कॉलोनी समेत कई इलाकों में फंसे लोगों की शिकायत है कि राहत सामग्री केवल राहत केंद्रों तक ही सीमित रह गई है और घरों में फंसे परिवारों तक भोजन और पीने का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसके अलावा, रात के अंधेरे में चोरी की घटनाओं की दहशत ने लोगों की नींद उड़ा दी है, जिसके चलते कई परिवार रात-रात भर जागकर अपने घरों का पहरा देने को मजबूर हैं।
वहीं, इटौंजा में हालात तब तनावपूर्ण हो गए जब राहत सामग्री बांटने पहुंचे स्थानीय विधायक योगेश शुक्ला की गाड़ी को आक्रोशित ग्रामीणों ने रोक लिया। ग्रामीणों ने पर्याप्त राशन और मोटरबोट की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया। बाद में एसडीएम की मध्यस्थता से मामला शांत कराया जा सका।
गोमती का पानी शहर के वीआईपी और व्यावसायिक इलाकों के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है। जब नदी का पानी एक खुले नाले के रास्ते प्लासियो मॉल की ओर बढ़ने लगा और सड़क पर जलभराव हो गया, तो हड़कंप मच गया। नगर निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर उस नाले को बंद कराया और पानी निकालने के लिए भारी-भरकम पंप लगाए, जिससे फिलहाल मॉल की ओर पानी का बहाव रुक गया है। दूसरी ओर, एमार गोमती ग्रीन्स सोसाइटी पर भी गहरा संकट मंडरा रहा है।
सोसाइटी से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित नाले तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है, जिसके बिल्कुल पास सोसाइटी का इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन है। यदि पानी सब-स्टेशन तक पहुंचा, तो पूरी सोसाइटी की बिजली ठप हो जाएगी। इस खतरे को भांपते हुए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा के इंतजाम करने और राहत उपकरण तैयार रखने की गुहार लगाई है।
बाढ़ के कारण शहर की बिजली आपूर्ति और करोड़ों की विकास परियोजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। फैजुल्लागंज और दाऊद नगर में सुरक्षा कारणों से 11 प्रमुख ट्रांसफार्मरों की सप्लाई बंद कर दी गई है, जिससे हजारों लोग अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। इसके अलावा, गोमती रिवरफ्रंट की सुंदरता भी इस जलभराव की भेंट चढ़ गई है। लगातार चार दिनों से पानी में डूबे रहने के कारण रिवरफ्रंट के हजारों महंगे पेड़-पौधे सड़ने लगे हैं।
गोमती नदी में क्रूज निर्माण का जो कार्य चल रहा था, वह भी ठप पड़ गया है और निर्माण सामग्री पानी की चपेट में आ गई है। लामार्ट की ओर बन रहे ग्रीन कॉरिडोर का बिल्डिंग मटेरियल भी या तो पानी में डूब गया है या बह गया है, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
इस प्राकृतिक आपदा ने लोगों के धार्मिक, शैक्षिक और दैनिक जीवन को भी पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। नवरात्र के पावन अवसर पर मलिहाबाद के प्रसिद्ध मां शीतला देवी मंदिर परिसर में बेहता नदी और नालों का गंदा पानी भर गया है, जिससे दर्शनार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों का भविष्य भी दांव पर है क्योंकि बाढ़ के कारण कई स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बच्चे अपनी परीक्षाएं नहीं दे पा रहे हैं।
हालात इतने बदतर हैं कि लोग अपने घरों में पानी घुसने से रोकने के लिए मुख्य दरवाजों पर खुद ही ईंटों की छोटी दीवारें चुनवा रहे हैं, लेकिन पानी का स्तर उन दीवारों को भी लांघ रहा है। दहशत और मजबूरी का आलम यह है कि फैजुल्लागंज इलाके के लगभग 25 से 30 प्रतिशत लोग अपने घरों में ताले डालकर अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं।




