
नई दिल्ली। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर एक अनोखा टाइम ट्रैवल देखने को मिल रहा है। इंटरनेट पर इन दिनों 1980s के दशक का जादू पूरी तरह सिर चढ़कर बोल रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, न्यू-एज जनरेशन यानी Gen-Z से लेकर देश के बड़े-बड़े राजनेता तक इस विंटेज लुक के दीवाने हो चुके हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ज़रिए लोग अपनी आज की तस्वीरों को 80 के दशक के फिल्मी और क्लासिक अवतार में बदल रहे हैं।
सियासत पर चढ़ा रेट्रो लुक का खुमार
यह ट्रेंड सिर्फ आम यूज़र्स या रील्स बनाने वालों तक सीमित नहीं है। राजनीति के गलियारों में भी इसका जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, किरेन रीजीजू, शिवराज सिंह चौहान और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जैसे दिग्गज नेताओं ने AI द्वारा तैयार किए गए अपने विंटेज लुक्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ और इंस्टाग्राम पर शेयर किए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी चाय की चुस्की लेता हुआ एक रेट्रो लुक खूब वायरल हो रहा है। इसके अलावा सांसद कंगना रनौत ने पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह की 80 के दशक वाली एक एआई तस्वीर शेयर कर इस ट्रेंड को टॉक ऑफ द टाउन बना दिया है।
कैसा है 80 के दशक का पहनावा और स्टाइल?
80 के दशक का पहनावा बहुत रंगीन, बोल्ड और अनोखा था जिसमें चमक-दमक और नए फैशन प्रयोगों का बोलबाला था। इस दौर के फैशन में आराम के साथ-साथ खुद को अलग दिखाने का अंदाज साफ झलकता था। सोशल मीडिया पर छाए इस रेट्रो ट्रेंड के बारे में जानते है।
बेल-बॉटम और फ्लेयर्ड पैंट्स : 70 के दशक से शुरू हुआ बेल-बॉटम वियरिंग 80s में भी खूब पॉपुलर रहा. इसमें नीचे से चौड़ी पैंट्स को शर्ट, टी-शर्ट या जैकेट के साथ पेयर किया जाता था. युवाओं में ये वियरिंग स्टाइल काफी पॉपुलर हुआ.
शोल्डर पैड्स वाले ब्लेजर और जैकेट : इसे 80s के फैशन में पावर शौल्डर्स भी पुकारा जाने लगा था. इस तरह के पहनावे में बड़े शोल्डर पैड्स वाले ब्लेजर और जैकेट पहनी जाती थी. इस तरह के कपड़ों से शरीर के ऊपर का पार्ट ज्यादा स्ट्रक्चर्ड दिखता था. पार्टी और इवेंट्स ही नहीं ऑफिस में भी इसे खूब पहना जाता था. इस स्टाइल का फैशन इंडस्ट्री में काफी दबदबा रहा.
हाई-वेस्ट जींस और पैंट्स : आज के समय में GenZ भी हाई वेस्ट फैशन को फॉलो कर रहे हैं जबकि इस स्टाइल की मजबूत मौजूदगी 80s में भी थी. हाई वेस्ट जींस के साथ ढीली शर्ट, टक-इन टी-शर्ट या जैकेट के साथ स्टाइल किया जाता है. इसकी खासियत है कि इसमें लुक कैजुअल होने के साथ-साथ काफी स्टाइलिश भी लगता है.
पोल्का डॉट्स फैशन :इस स्टाइल को बड़े-बड़े फिल्म सितारों ने खूब फॉलो किया. लोग मानते हैं कि इस फैशन सेंस की शुरुआत 80 के दशक में हुई थी, जबकि ये बहुत पुराना प्रिंट है. ये 1950 और 60s में भी खूब पॉपुलर था. हां, 80s इस प्रिंट ने एक नया और ग्लैमरस रूप लिया.
डेनिम जैकेट या डबल-डेनिम लुक : डेनिम जैकेट 80s के सबसे पॉपुलर फैशन स्टेपल्स में शामिल रही. इसे टी-शर्ट, जींस और कभी-कभी सिर से पैर तक डेनिम के साथ स्टाइल किया जाता था. पैच, बैज और कस्टमाइज्ड डेनिम ने इस लुक को और ज्यादा पर्सनल टच दिया.
जेंजी को क्यों भा रहा है ये पुराना दौर?
विशेषज्ञों के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) जो पूरी तरह डिजिटल दुनिया में बड़ी हुई है, वह एक ‘टैंजिबल’ यानी छूकर महसूस की जा सकने वाली पुरानी दुनिया के प्रति आकर्षित हो रही है। इस नन-डिजिटल दौर के प्रति आकर्षण और पुरानी यादों (Nostalgia) की वजह से युवा इस ट्रेंड से जुड़ रहे हैं। नेताओं के लिए भी यह नई उम्र के वोटर्स और युवाओं से उनके ही अंदाज में जुड़ने का एक बेहद स्मार्ट जरिया बन गया है。
सबसे बड़ा सवाल: क्या सुरक्षित है यह AI ट्रेंड?
तस्वीरें देखने में जितनी मजेदार लगती हैं, साइबर सुरक्षा के लिहाज से यह ट्रेंड उतना ही संवेदनशील है। द हिंदू की एक रिपोर्ट में साइबर एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि इस तरह के थर्ड-पार्टी एआई ऐप्स पर अपनी हाई-डेफिनिशन तस्वीरें अपलोड करना जोखिम भरा हो सकता है:
1. बायोमेट्रिक डेटा का खतरा: जब आप अपनी सेल्फी किसी अज्ञात एआई ऐप पर अपलोड करते हैं, तो वह आपके चेहरे की ज्यामिति (Facial Geometry) का एक्सेस ले लेता है।
2. बिना सहमति के एआई ट्रेनिंग: यह डेटा भविष्य में आपकी सहमति के बिना फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली) तकनीकों को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. पासवर्ड बदल सकता है, चेहरा नहीं: साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक बार लीक हुआ फेस डेटा डिलीट करना नामुमकिन होता है।
सुरक्षित रहने के लिए क्या करें?
• किसी भी अनजान ऐप का इस्तेमाल करने से पहले उसकी Privacy Policy जरूर पढ़ें।
• अपनी असली फोटो अपलोड करने के बजाय, एआई चैटबॉट्स पर सिर्फ Text Prompt लिखकर एक काल्पनिक रेट्रो तस्वीर तैयार करवाएं।
• फोटो अपलोड करने से पहले उसके अंदर मौजूद लोकेशन और डिवाइस का मेटाडेटा (Metadata) हटा दें।



