
आजकल फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों की पहली प्राथमिकता हर भोजन में प्रोटीन की मात्रा खोजना बन गई है। इसी रुझान के बीच सोशल मीडिया पर एक ‘होममेड प्रोटीन पाउडर’ की रेसिपी तेजी से वायरल हो रही है।
इंस्टाग्राम क्रिएटर वी रुपेश कुमार राव द्वारा साझा की गई इस रेसिपी में चने, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज, तरबूज के बीज, काजू, मूंगफली, ओट्स, मखाना, सौंफ और भुने हुए चने जैसी आसानी से उपलब्ध सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है। इंटरनेट पर कई लोग इसे एक बेहतरीन एनर्जी ड्रिंक और प्रोटीन का पावरहाउस मानकर इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।
हालांकि, किसी भी खाद्य पदार्थ में थोड़ा बहुत प्रोटीन होने का मतलब यह नहीं है कि वह एक उच्च प्रोटीन वाला सप्लीमेंट है। इसी बारीक अंतर पर इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है। प्रसिद्ध लेखक कृष अशोक ने इस वायरल रेसिपी का गणित समझाते हुए एक महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डाला है।
उन्होंने बताया कि किसी भी चीज को एक बेहतरीन प्रोटीन स्रोत तभी माना जा सकता है जब उसमें प्रति सौ कैलोरी पर कम से कम बीस ग्राम प्रोटीन मौजूद हो। यदि इस वायरल देसी पाउडर का गणित निकाला जाए, तो इसमें प्रति सौ कैलोरी पर केवल चार दशमलव दो ग्राम प्रोटीन ही मिलता है। असल में यह मिश्रण प्रोटीन से कहीं ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और फैट का स्रोत है। इसकी तुलना में बाजार में मिलने वाले व्हे आइसोलेट में प्रति सौ कैलोरी बाईस से चौबीस ग्राम तक प्रोटीन होता है।
बेंगलुरु के स्पर्श अस्पताल की वरिष्ठ क्लिनिकल डायटीशियन ग्रेस अब्राहम भी इस बात से सहमति जताती हैं कि इस मिश्रण में इस्तेमाल की गई सामग्रियां खराब नहीं हैं, लेकिन इसे तकनीकी रूप से ‘प्रोटीन पाउडर’ कहना भ्रामक होगा। इसे नट्स, सीड्स और अनाज का एक न्यूट्रिशनल या एनर्जी मिक्स कहना ज्यादा सटीक है। इन सभी चीजों में प्रोटीन के साथ-साथ भारी मात्रा में फैट और कार्बोहाइड्रेट भी होता है, जिससे इसकी कुल प्रोटीन डेंसिटी कम हो जाती है। इसके अलावा, रेसिपी में स्वाद के लिए मिश्री भी मिलाई गई है, जो बिना कोई प्रोटीन जोड़े सिर्फ शुगर और कैलोरी बढ़ाने का काम करती है।
यह देसी मिश्रण पूरी तरह से अस्वस्थ नहीं है। चने, ओट्स, मखाने और विभिन्न प्रकार के बीज फाइबर, खनिज, विटामिन और गुड फैट से भरपूर होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पेट भरा रखने में मदद करते हैं। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये चीजें अत्यधिक कैलोरी वाली होती हैं। यदि इसका सेवन बिना मापे भारी मात्रा में किया जाए, तो यह फायदे की जगह वजन बढ़ाने का कारण बन सकता है।
एक संतुलित आहार के हिस्से के रूप में यह मिश्रण एक बेहतरीन विकल्प है, लेकिन इसे एक केंद्रित और शुद्ध प्रोटीन सप्लीमेंट का सीधा विकल्प मानना एक बड़ी भूल है। व्यक्ति को अपनी शारीरिक जरूरत और दैनिक आहार के हिसाब से अपने प्रोटीन के स्रोतों का चुनाव करना चाहिए और केवल ‘प्रोटीन’ शब्द को सेहत का जादुई मंत्र नहीं समझ लेना चाहिए।



