
हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च के मुताबिक, रात की पूरी नींद न मिलने पर हर व्यक्ति के दिमाग पर एक जैसा असर नहीं पड़ता है। कुछ लोगों की याददाश्त और दिमाग पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है, जबकि कुछ लोग इससे कम प्रभावित होते हैं। वैज्ञानिकों ने इस रहस्य से पर्दा उठा लिया है।
दिमाग की सफाई प्रणाली और AQP4 जीन
ऑस्टेलिया की एडिथ कोवन यूनिवर्सिटी (ECU) के सेंटर फॉर प्रिसिजन हेल्थ (CPH) के शोधकर्ताओं ने एक्वापोरिन-4 (AQP4) नाम के एक खास जीन की जांच की है। यह जीन दिमाग में पानी के बहाव को नियंत्रित करता है, जो रात में सोते समय दिमाग का कचरा और हानिकारक प्रोटीन बाहर निकालने वाली प्राकृतिक सफाई प्रणाली को संचालित करता है।
जीन और जीवनशैली का मेल
शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन लोगों में AQP4 जीन के विशेष प्रकार होते हैं, उनमें कम नींद लेने पर दिमाग के सोचने-समझने और याददाश्त से जुड़े हिस्से यानी ग्रे मैटर में तेजी से कमी आने लगती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह केवल जेनेटिक्स पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपके जीन आपकी जीवनशैली और नींद की आदतों के साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं।
हर व्यक्ति के लिए अलग इलाज की जरूरत
वैज्ञानिकों ने 13 आम AQP4 जीन प्रकारों का विश्लेषण करके यह पाया कि कम सोने या सोने में ज्यादा समय लगने का असर अलग-अलग लोगों के दिमाग की संरचना पर अलग तरह से पड़ता है। इसी आधार पर विशेषज्ञों का मानना है कि अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए अब सभी के लिए एक जैसी दवा या तरीका अपनाने के बजाय, हर व्यक्ति की जेनेटिक बनावट के हिसाब से अलग रणनीति तैयार करने की जरूरत है।




