सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को बरगलाकर उन्हें कट्टरता की राह पर धकेलने की साजिश रच रहे पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नापाक नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उत्तराखंड में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं। प्रदेश में इस नेटवर्क को जड़ें जमाने से रोकने के लिए खुफिया विभाग (इंटेलीजेंस) ने राज्य और जिला दोनों स्तरों पर समर्पित ‘सोशल मीडिया निगरानी सेल’ गठित करने का बड़ा निर्णय लिया है। हाल ही में आयोजित इंटेलीजेंस की उच्च स्तरीय बैठक में अब तक इस नेटवर्क से जुड़े सामने आए सभी अहम तथ्यों की बारीकी से समीक्षा की गई और संदिग्ध गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने के कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक के दौरान केंद्र सरकार की राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति एवं रणनीति के तहत आतंकवाद की बदलती प्रकृति और उससे जुड़ी नई चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष रणनीतिक प्रयास करने पर बल दिया गया। इस संदर्भ में देश की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी नीति ‘प्रहार’ को धरातल पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए गए, ताकि डिजिटल माध्यमों से रचे जा रहे आतंकी मंसूबों को समय रहते नाकाम किया जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, शहजाद भट्टी के इस खतरनाक नेटवर्क से जुड़े 253 से अधिक संदिग्धों को अब तक गिरफ्तार या हिरासत में लिया जा चुका है। इनमें से सबसे अधिक गिरफ्तारियां उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से हुई हैं, जहां ये सभी युवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भट्टी और उसके गुर्गों के सीधे संपर्क में आए थे।
इस बढ़ते खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उत्तराखंड आतंकवादी रोधी दस्ते (एटीएस) को पेशेवर और तकनीकी रूप से अपग्रेड करने का भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। इस योजना के तहत उत्तराखंड एटीएस देश के अन्य बड़े राज्यों की कार्यप्रणाली, रणनीति और वहां चलाए गए सफल एंटी-टेरर ऑपरेशनों का गहन अध्ययन करेगी।
बैठक में देश भर में हाल के दिनों में चलाए गए प्रमुख सफल ऑपरेशनों का भी उल्लेख किया गया, ताकि अन्य बड़े राज्यों द्वारा अपनाई गई आधुनिक तकनीकों, त्वरित प्रतिक्रिया रणनीतियों और जांच शैलियों को उत्तराखंड एटीएस की कार्यप्रणाली में समाहित कर राज्य की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाया जा सके।




