इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी में मानव मल-मूत्र कैसे मिला? लैब रिपोर्ट से खुला राज, प्रशासन पर गंभीर सवाल

देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पीने के पानी से उल्टी-दस्त का प्रकोप फैलने से अब तक कम से कम 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1400 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स में मौतों का आंकड़ा 14 तक बताया जा रहा है। लैब रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि पानी में ई-कोलाई, फीकल कॉलीफॉर्म और क्लेबसिएला जैसे घातक बैक्टीरिया मिले, जो सीधे मानव मल (फीकल मैटर) से आते हैं। ये बैक्टीरिया सीवर के पानी में आमतौर पर पाए जाते हैं।

दूषित पानी में मानव मल-मूत्र कैसे मिला?
अधिकारियों और जांच रिपोर्ट्स के अनुसार, भागीरथपुरा में पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन (नर्मदा जल सप्लाई) में लीकेज था। ठीक इसी जगह के ऊपर एक शौचालय बना हुआ था, जहां से अपशिष्ट (मानव मल-मूत्र युक्त सीवेज) एक पिट में डाला जा रहा था। उचित सेप्टिक टैंक न होने के कारण यह गंदा पानी पाइपलाइन के लीकेज से रिसकर पीने के पानी में मिल गया।

  • एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी के सैंपल्स में “सीवर पानी में पाए जाने वाले असामान्य बैक्टीरिया” की पुष्टि हुई।
  • नगर निगम अधिकारियों ने स्वीकार किया कि शौचालय का अपशिष्ट सीधे पाइपलाइन के ऊपर के पिट में जा रहा था, और पाइपलाइन का जॉइंट ढीला होने से दूषण हुआ।
    यह लापरवाही इतनी गंभीर थी कि स्थानीय लोग कई हफ्तों से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मौतों और मरीजों का अपडेट

  • आधिकारिक तौर पर 9 मौतें पुष्टि (कुछ रिपोर्ट्स में 4-7), लेकिन स्थानीय दावे 14 तक।
  • 2456 से अधिक लोग उल्टी-दस्त के लक्षण दिखा चुके हैं।
  • 162 मरीज अभी अस्पतालों में भर्ती, 26-32 आईसीयू में गंभीर हालत में।
  • गुरुवार को भी नए मरीज सामने आए, लेकिन ज्यादातर को घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।

प्रशासन की कार्रवाई और आक्रोश
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की सहायता के चेक दिए, लेकिन लोगों ने आक्रोश जताया कि मौतों का आंकड़ा कम बताया जा रहा है। मंत्री ने माना कि वास्तविक संख्या ज्यादा हो सकती है और जांच के बाद सहायता दी जाएगी।

  • पाइपलाइन की मरम्मत कर साफ पानी की सप्लाई शुरू की गई, लेकिन उबालकर पीने की सलाह।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मुख्य सचिव से 2 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी, क्योंकि लोग लगातार शिकायत कर रहे थे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
  • पूरे इलाके में डोर-टू-डोर सर्वे और मेडिकल कैंप लगाए गए।

यह घटना इंदौर की ‘सबसे स्वच्छ शहर’ की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। जांच में निर्माण और रखरखाव की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिससे भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकने के लिए एसओपी जारी करने की बात कही जा रही है।

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