
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उल्टी-दस्त के इस प्रकोप को “आपातकाल जैसी स्थिति” बताते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
इंदौर, जो मध्य प्रदेश का व्यावसायिक केंद्र है और लगातार आठ वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर रहा है, में दूषित पीने के पानी से उल्टी-दस्त का प्रकोप फैलने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और 1400 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
यह प्रकोप भगीरथपुरा इलाके से शुरू हुआ, जिसने शहर की जल आपूर्ति प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने पत्रकारों को बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार लैब रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि भगीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन लीकेज के कारण पीने का पानी दूषित हो गया था। उन्होंने रिपोर्ट के विस्तृत नतीजे साझा नहीं किए।
अधिकारियों के अनुसार, भगीरथपुरा में पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन में उस जगह लीकेज मिला, जहां ऊपर एक शौचालय बना हुआ है। उनका दावा है कि इसी लीकेज से क्षेत्र की जल आपूर्ति दूषित हुई।
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा कि भगीरथपुरा में पूरी पेयजल पाइपलाइन की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि कहीं और लीकेज की संभावना पता चल सके। उन्होंने बताया कि जांच के बाद गुरुवार को पाइपलाइन से घरों में साफ पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई, हालांकि सावधानी के तौर पर लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है।
दुबे ने कहा कि पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। इस घटना से सबक लेते हुए भगीरथपुरा की जल त्रासदी के आधार पर पूरे राज्य के लिए ऐसी घटनाओं को रोकने हेतु स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) जारी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर दुबे ने भगीरथपुरा का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की। जल आपूर्ति प्रणाली की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि आगे ऐसे प्रकोप न फैलें।
इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मौतों पर मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग के अनुसार, स्थानीय लोग कई दिनों से “दूषित पानी की आपूर्ति” की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस प्रकोप को आपातकाल जैसी स्थिति बताते हुए जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। उन्होंने सबसे स्वच्छ शहर के विभिन्न अस्पतालों का दौरा कर मरीजों की कुशलक्षेम पूछी और उच्चस्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा की।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को भगीरथपुरा में 1,714 घरों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 8,571 लोगों की जांच हुई। इनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण पाए गए, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।
विभाग के अनुसार, प्रकोप शुरू होने के आठ दिनों में 272 मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए, जिनमें से 71 को छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 32 आईसीयू में हैं।





