
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती स्टेज-दो जलविद्युत परियोजना को भारत की मंजूरी से पाकिस्तान बौखला गया है। वह इसे 1960 की सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) का उल्लंघन बता रहा है, क्योंकि भारत ने परियोजना की कोई पूर्व सूचना नहीं दी। हालांकि, अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद भारत सिंधु बेसिन में अपनी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने गुरुवार को कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि भारत चिनाब नदी पर दुलहस्ती स्टेज-दो परियोजना बनाने की योजना बना रहा है, लेकिन इस संबंध में कोई पूर्व जानकारी या अधिसूचना नहीं दी गई। यह संधि का स्पष्ट उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना है। पाकिस्तान का दावा है कि संधि के तहत पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) पर भारत का उपयोग सीमित है और नई परियोजनाओं की जानकारी साझा करना अनिवार्य है।
अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तानी सिंधु जल आयुक्त ने भारतीय समकक्ष से परियोजना की प्रकृति, दायरे और तकनीकी विवरणों पर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही यह जानना चाहते हैं कि यह नई परियोजना है या मौजूदा प्लांट में बदलाव। उन्होंने जोर दिया कि भारत पश्चिमी नदियों पर एकतरफा जलविद्युत परियोजनाएं नहीं बना सकता।
दूसरी ओर, भारत ने दिसंबर 2025 में पर्यावरण मंत्रालय की समिति से इस रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना को मंजूरी दी। यह मौजूदा 390 मेगावाट दुलहस्ती स्टेज-वन का विस्तार है। समिति ने नोट किया कि परियोजना के पैरामीटर संधि के अनुरूप थे, लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे और पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूह टीआरएफ ने जिम्मेदारी ली) के बाद भारत ने संधि निलंबित कर दी है।
निलंबन के बाद भारत ने सिंधु बेसिन में कई परियोजनाओं को गति दी है, जैसे सावलकोट (1,856 मेगावाट), रतले, बुरसर, पाकल दुल आदि। ये कदम जल सुरक्षा और जलविद्युत उत्पादन बढ़ाने के लिए हैं।
पाकिस्तान की पीपीपी नेता शेरी रहमान ने इसे “पानी का हथियारीकरण” करार दिया और चेतावनी दी कि इससे पाकिस्तान की जल सुरक्षा, कृषि और रक्षा पर असर पड़ेगा।





