ढाका में हाथ मिलाना: पाकिस्तान की अतिरंजना और भारत की व्यावहारिक कूटनीति का संकेत

ढाका में एक साधारण शिष्टाचार भरा हाथ मिलाना दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक के बीच 31 दिसंबर 2025 को खालिदा जिया के अंतिम संस्कार के दौरान हुआ यह मिलन पाकिस्तान ने अपनी “कूटनीतिक जीत” के रूप में प्रचारित किया, जबकि भारत ने इसे महज औपचारिक शिष्टाचार बताया।

पाकिस्तानी संसद की प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया कि जयशंकर ने खुद आगे बढ़कर सादिक से हाथ मिलाया। यह मई 2025 के भारत-पाक सैन्य संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर) के बाद दोनों देशों के उच्चस्तरीय अधिकारियों का पहला संपर्क था, जो अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले (26 नागरिकों की मौत) के बाद शुरू हुआ था। पाकिस्तान ने इसे शांति की दिशा में कदम बताया, लेकिन भारतीय सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह कोई संवाद या संदेश नहीं था, बल्कि अंतिम संस्कार के मौके पर सामान्य शिष्टाचार मात्र। पाकिस्तान की यह अतिरंजना उसकी अलग-थलग स्थिति और घरेलू छवि सुधारने की कोशिश को दर्शाती है।

दूसरी ओर, जयशंकर की ढाका यात्रा का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को श्रद्धांजलि देना था। उन्होंने खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत शोक संदेश सौंपा। जयशंकर ने कहा कि खालिदा जिया की दृष्टि और मूल्य भारत-बांग्लादेश साझेदारी को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शक बने रहेंगे।

यह मुलाकात बांग्लादेश की बदलती राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। फरवरी 2026 में प्रस्तावित आम चुनावों में अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है, जबकि बीएनपी मजबूत स्थिति में है। भारत की यह पहुंच बांग्लादेश में उभरते नए राजनीतिक यथार्थ को स्वीकार करने और भविष्य के लिए व्यावहारिक संवाद बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। खालिदा जिया के निधन पर मोदी ने भी उनके योगदान की सराहना की थी।

ढाका इस समय दक्षिण एशियाई कूटनीति का केंद्र बन गया है, जहां भारत और पाकिस्तान दोनों अपनी रणनीतियां आजमा रहे हैं। एक तरफ पाकिस्तान औपचारिक मिलन को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, तो दूसरी तरफ भारत बांग्लादेश के साथ संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने में जुटा है। ये घटनाएं आने वाले महीनों में क्षेत्रीय राजनीति की दिशा प्रभावित कर सकती हैं।

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