उत्तराखंड

हिमालय दिवस पर सीएम धामी का संदेश: पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था में संतुलन जरूरी, नेताओं ने लिया संरक्षण का संकल्प

प्रत्येक वर्ष 9 सितंबर को मनाए जाने वाले ‘हिमालय दिवस’ के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। यह विशेष दिन हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नीतियां बनाने और प्रकृति के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता को गहराई से रेखांकित करता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ-साथ कई अन्य प्रमुख केंद्रीय और राज्य स्तरीय राजनेताओं ने भी हिमालय के महत्व को साझा करते हुए इसके पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने का जोरदार आह्वान किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विज़न और सरकार की प्रतिबद्धता

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय को भारत की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग बताया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि हिमालय की विशाल और गगनचुंबी पर्वत श्रृंखलाएं, हिमनद (ग्लेशियर), घने जंगल और सदानीरा नदियां न केवल भारत की प्राकृतिक सुंदरता को समृद्ध करती हैं, बल्कि यह देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन और उनकी आजीविका का मुख्य आधार भी हैं।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और नीतियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी सरकार विकास के साथ-साथ हिमालय के संरक्षण और संवर्धन के लिए पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) और अर्थव्यवस्था (इकोनॉमी) के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। सरकार का दृढ़ संकल्प विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ हिमालय की अत्यंत समृद्ध जैव विविधता और अनमोल प्राकृतिक संसाधनों की हर हाल में रक्षा करना है।

अन्य प्रमुख नेताओं द्वारा हिमालय संरक्षण का आह्वान

इस महत्वपूर्ण अवसर पर देश और प्रदेश के अन्य दिग्गज नेताओं ने भी हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने हिमालय को हमारी प्राचीन संस्कृति, जैव विविधता और जीवनदायिनी नदियों का उद्गम स्थल बताते हुए, देवभूमि के इस ‘पवित्र मुकुट’ के संरक्षण और स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण में आम जनमानस से सक्रिय रूप से योगदान देने का आग्रह किया।

वहीं, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने हिमालय को भारत की मनोरम प्रकृति, पवित्र संस्कृति और सुखी जीवन का मूल आधार तथा देश की सुरक्षा का एक अजेय और अटूट कवच बताया। उन्होंने बर्फ से ढकी चोटियों, ग्लेशियरों, अल्पाइन घास के मैदानों और शुद्ध जल धाराओं की रक्षा करने का देशवासियों से आह्वान किया।

इसी कड़ी में, उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने भी जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि हिमालय केवल हमारी प्राकृतिक धरोहर ही नहीं है, बल्कि यह अनगिनत जीवनदायिनी प्रणालियों की नींव है। इसलिए हम सभी को एकजुट होकर इसके संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा और संवर्धन का अटल संकल्प लेना चाहिए।

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