प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग: हमेशा प्रयास करना चाहिए

हमेशा प्रयास करना चाहिए

एक व्यक्ति नित्य ही समुद्र तट पर जाता और वहां घंटों बैठा रहता। आती-जाती लहरों को निरंतर देखता रहता। बीच-बीच में वह कुछ उठाकर समुद्र में फेंकता, फिर आकर अपने स्थान पर बैठ जाता। तट पर आने वाले लोग उसे विक्षिप्त समझते और प्राय: उसका उपहास किया करते थे। कोई ...

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जीवन केवल परमार्थ

जीवन केवल परमार्थ

एक समय की बात है गौतम बुद्ध किसी उपवन में विश्राम कर रहे थे। तभी बच्चों का एक झुंड आया और पेड़ों पर पत्थर मारकर आम तोड़ने लगा। तभी एक पत्थर बुद्ध के सर पर लगा और उस से खून बहने लगा। बुद्ध की आँखों में आंसू आ गये। बच्चों ने देखा तो ...

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प्रेरक प्रसंग : एक ऐसी कहानी जो बढ़ाएं आपके निर्णय लेने की क्षमता

प्रेरक प्रसंग : एक ऐसी कहानी जो बढ़ाएं आपके निर्णय लेने की क्षमता

बहुत समय पहले हरिशंकर नाम का एक राजा था। उसके तीन पुत्र थे और अपने उन तीनों पुत्रों में से वह किसी एक पुत्र को राजगद्दी सौंपना चाहता था। पर किसे? राजा ने एक तरकीब निकाली और उसने तीनो पुत्रों को बुलाकर कहा – अगर तुम्हारे सामने कोई अपराधी खड़ा ...

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प्रेरक-प्रसंग : दिव्य मिठास

प्रेरक-प्रसंग : दिव्य मिठास

एक दिन मंगलवार की सुबह वॉक करके रोड़ पर बैठा हुआ था, हल्की हवा और सुबह का सुहाना मौसम बहुत ही अच्छा लग रहा था,तभी वहाँ एक मरसीडीज़ कार आकर रूकी, और उसमें से एक वृद्ध उतरे,अमीरी उसके लिबाजऔर व्यक्तित्व दोनों बयां कर रहे थे। वे एक पॉलीथिन बैग ले ...

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प्रेरक-प्रसंग : स्वार्थ एवं अहंकार

स्वार्थ एवं अहंकार

एक हाथी बड़ा स्वार्थी और अहंकारी था। दल के साथ रहने की अपेक्षा वह अकेला रहने लगा। अकेले में दुष्टता उपजती है, वे सब उसमें भी आ गई। एक बटेर ने छोटी झाड़ी में अंडे दिए। हाथियों का झुँड आते देखकर बटेर ने उसे नमन किया और दलपति से उसके ...

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प्रेरक-प्रसंग: परिश्रम करने का संकल्प

परिश्रम करने का संकल्प

चाँदपुर इलाके के राजा कुँवरसिंह जी बड़े अमीर थे। उन्हें किसी चीज़ की कमी नहीं थी, फिर भी उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं था। बीमारी के मारे वे सदा परेशान रहते थे। कई वैद्यों ने उनका इलाज किया, लेकिन उनको कुछ फ़ायदा नहीं हुआ। राजा की बीमारी बढ़ती गई। सारे नगर ...

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प्रेरक-प्रसंग: परिश्रम

परिश्रम

चाँदपुर इलाके के राजा कुँवरसिंह जी बड़े अमीर थे। उन्हें किसी चीज़ की कमी नहीं थी, फिर भी उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं था। बीमारी के मारे वे सदा परेशान रहते थे। कई वैद्यों ने उनका इलाज किया, लेकिन उनको कुछ फ़ायदा नहीं हुआ। राजा की बीमारी बढ़ती गई। सारे नगर ...

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प्रेरक प्रसंग: भेद-भाव

प्रेरक प्रसंग

बात सन 1885 की है। पूना के न्यू इंग्लिश हाईस्कूल में समारोह हो रहा था। प्रमुख द्वार पर एक स्वयंसेवक नियुक्त था, जिसे यह कर्तव्य-भार दिया गया था कि आनेवाले अतिथियों के निमंत्रण पत्र देखकर उन्हें सभा-स्थल पर यथास्थान बिठा दे। इस समारोह के मुख्य अतिथि थे मुख्य न्यायाधीश महादेव ...

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प्रेरक-प्रसंग: जीवन जीने का तरीका

जीवन जीने का तरीका

एक संत ने विश्व-विद्यालय आरंभ किया। इस विद्यालय का प्रमुख उद्देश्य था ऐसे संस्कारी युवक-युवतियों का निर्माण जो समाज के विकास में सहभागी बन सकें। एक दिन उन्होंने अपने विद्यालय में एक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया। जिसका विषय था – “जीवों पर दया एवं प्राणिमात्र की सेवा।” निर्धारित तिथि ...

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प्रेरक- प्रसंग: पिंजरे में कैद पंछी

पिंजरे में कैद पंछी

चंद्र प्रकाश के चार साल के बेटे को पंछियों से बेहद प्यार था। वह अपनी जान तक न्योछावर करने को तैयार रहता। ये सभी पंछी उसके घर के आंगन में जब कभी आते तो वह उनसे भरपूर खेलता। उन्हें जी भर कर दाने खिलाता। पेट भर कर जब पंछी उड़ते ...

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