प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग : किसी के बारे में धारणा बनाने से पहले सच्चाई जाने…

प्रेरक प्रसंग : किसी के बारे में धारणा बनाने से पहले सच्चाई जाने...

एक बार ट्रेन से पिता-पुत्र यात्रा कर रहे थे, पुत्र की उम्र करीब 24 साल की थी, पुत्र ने खिड़की के पास बैठने की ज़िद की, क्योंकि पिता खिड़की की सीट पर बैठे थे। पिता ने ख़ुशी ख़ुशी खिड़की की सीट पुत्र को दे दी, और खुद बगल में बैठ ...

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प्रेरक प्रसंग : मुझे भी गुरु बनना है…

प्रेरक प्रसंग : मुझे भी गुरु बनना है...

एक नवदीक्षित शिष्य ने अपने गुरु के साथ कुछ दिन व्यतीत करने के बाद एक दिन पूछा-  गुरुदेव, मेरा भी मन करता है कि आपकी ही तरह मेरे भी कई शिष्य हों और सभी मुझे भी  आप जैसा ही मान-सम्मान दे। गुरु ने मंद-मंद मुस्कुराते हुए कहा- कई वर्षों की ...

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प्रेरक प्रसंग –  माँ की सीख… 

प्रेरक प्रसंग –  माँ की सीख... 

ईश्वरचंद विद्यासागर के बचपन की यह एक सच्ची घटना है। एक सवेरे उनके घर के द्वार पर एक भिखारी आया। उसको हाथ फैलाये देख उनके मन में करुणा उमड़ी। वे तुरंत घर के अंदर गए और उन्होंने अपनी माँ से कहा कि वे उस भिखारी को कुछ दे दें। माँ ...

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प्रेरक प्रसंग: सेवा का समर्पण भाव 

एक बार एक राजा भोजन कर रहा था, अचानक खाना परोस रहे सेवक के हाथ से थोड़ी सी सब्जी राजा के कपड़ों पर छलक गई। राजा की त्यौरियां चढ़ गयीं।   जब सेवक ने यह देखा तो वह थोड़ा घबराया, लेकिन कुछ सोचकर उसने प्याले की बची सारी सब्जी भी ...

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प्रेरक प्रसंग : मेहनत कभी बेकार नहीं जाती…

प्रेरक प्रसंग : मेहनत कभी बेकार नहीं जाती...

जिंदगी में किया गया कोई भी काम या मेहनत कभी बेकार नहीं जाती| हम जितनी मेहनत करते है उसका प्रतिफल हमें किसी न किसी रूप में अवश्य मिलता है, यही सत्य है|           फर्क केवल इतना है कि कुछ व्यक्ति इस बात पर विश्वास करते है ...

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प्रेरक-प्रसंग: मां से बढ़कर कोई नहीं

मां से बढ़कर कोई नहीं

स्वामी विवेकानंद जी से एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया, मां की महिमा संसार में किस कारण से गाई जाती है? स्वामी जी मुस्कराए, उस व्यक्ति से बोले, पांच सेर वजन का एक पत्थर ले आओ। जब व्यक्ति पत्थर ले आया तो स्वामी जी ने उससे कहा, अब इस पत्थर को ...

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प्रेरक-प्रसंगः चाटूकारों से दूर होकर ही गरीबी से दूर हुआ जा सकता है

नई दिल्ली। बहुत समय पहले एक उड़िया बाबा नाम के संत थे उनकी ख्याति बहुत दूर तक थी। लोग अपनी हर तरह की समस्याओं का हल पाने उनके पास आते। एक बार व्यापार में घाटा झेल रहा एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला, ‘महाराज, कुछ समय पहले तक मेरी ...

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प्रेरक-प्रसंग: सफलता का श्रेय

सफलता का श्रेय

सफलता का श्रेय किसे मिले इस प्रश्न पर एक दिन विवाद उठ खड़ा हुआ। संकल्प ने अपने को, ‘बल’ ने अपने को और ‘बुद्धि’ ने अपने को अधिक महत्वपूर्ण बताया। तीनों अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। अन्त में तय हुआ कि ‘विवेक’ को पंच बना इस झगड़े का फैसला ...

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प्रेरक प्रसंग – सफल वही होता है जो लक्ष्य  को निर्धारण कर उस पर कायम रहता है…

प्रेरक प्रसंग - सफल वही होता है जो लक्ष्य  को निर्धारण कर उस पर कायम रहता है...

एक बार की बात है, एक निःसंतान राजा था, वह बूढा हो चुका था और उसे राज्य के लिए एक योग्य उत्तराधिकारी की चिंता सताने लगी थी। योग्य उत्तराधिकारी के खोज के लिए राजा ने पुरे राज्य में ढिंढोरा पिटवाया कि अमुक दिन शाम को जो मुझसे मिलने आएगा, उसे ...

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प्रेरक-प्रसंग: परिश्रम करना

परिश्रम करना

चाँदपुर इलाके के राजा कुँवरसिंह जी बड़े अमीर थे। उन्हें किसी चीज़ की कमी नहीं थी, फिर भी उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं था। बीमारी के मारे वे सदा परेशान रहते थे। कई वैद्यों ने उनका इलाज किया, लेकिन उनको कुछ फ़ायदा नहीं हुआ। राजा की बीमारी बढ़ती गई। सारे नगर ...

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