प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : माता पिता की सेवा ही सिद्धि प्राप्ति!

प्रेरक-प्रसंग : माता पिता की सेवा ही सिद्धि प्राप्ति!

महर्षि पिप्पल बड़े ज्ञानी और तपस्वी थे। उन की कीर्ति दूर दूर तक फैली हुई थीं एक दिन सारस और सारसी दोनों जल में खड़े आपस में बातें कर रहे थे कि पिप्पल को जितना बड़प्पन मिला हुआ है उससे भी अधिक महिमा सुकर्मा की है, पर उसे लोग जानते ...

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प्रेरक-प्रसंग : ‘सुन्दरता’

कौआ

एक कौआ सोचने लगा कि पंछियों में मैं सबसे ज्यादा कुरूप हूँ। न तो मेरी आवाज ही अच्छी है, न ही मेरे पंख सुंदर हैं। मैं काला-कलूटा हूँ। ऐसा सोचने से उसके अंदर हीनभावना भरने लगी और वह दुखी रहने लगा। एक दिन एक बगुले ने उसे उदास देखा तो ...

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प्रेरक-प्रसंग: तीन मछलियां

तीन मछलियां

एक बड़ा जलाशय था। जलाशय में पानी गहरा होता है, इसलिए उसमें काई तथा मछलियों का प्रिय भोजन जलीय सूक्ष्म पौधे उगते हैं। ऐसे स्थान मछलियों को बहुत रास आते हैं। उस जलाशय में भी बहुत-सी मछलियां आकर रहती थी। अंडे देने के लिए तो सभी मछलियां उस जलाशय में ...

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प्रेरक प्रसंग: क्रोध की अग्नि!

प्रेरक प्रसंग ~ क्रोध की अग्नि!

“क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकडे रहने के समान है; इसमें आप ही जलते हैं।” ~  गौतम बुद्ध बहुत समय पहले की बात है। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार शास्त्रार्थ चला। शास्त्रार्थ मे निर्णायक थी- मंडन ...

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प्रेरक-प्रसंग: हाथी और रस्सी की कहानी

हाथी और रस्सी की कहानी

एक बार एक व्यक्ति शहर में रास्ते पर चलते हुए जा रहा था। अचानक ही वह एक सर्कस के बाहर रुक गया और वहां रस्सी से बंधे हुए एक हाथी को देकने लगा और सोचने लगा । वह सोच रहा था कि जो हाथी जाली, मोटे चैन या कड़ी को ...

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प्रेरक-प्रसंग: तुम्हारे विचार ही तुम्हारे कर्म हैं!

तुम्हारे विचार ही तुम्हारे कर्म हैं!

एक राजा हाथी पर बैठकर अपने राज्य का भ्रमण कर रहा था। अचानक वह एक दुकान के सामने रुका और अपने मंत्री से कहा: मुझे नहीं पता क्यों, पर मैं इस दुकान के स्वामी को फाँसी देना चाहता हूँ। यह सुनकर मंत्री को बहुत दु:ख हुआ। लेकिन जब तक वह ...

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प्रेरक प्रसंग – सुखी और सफल जीवन का रहस्य

प्रेरक प्रसंग - सुखी और सफल जीवन का रहस्य

किसी बस्ती में एक उल्लू रहता था। उसकी बोली लोग बड़ी अशुभ समझते थे। इसीलिए कोई भी उसे अपने पास न आने देता था। जैसे ही वह बोलता, लोग उसे भगा देते थे। बस्ती वालों के इस व्यवहार से उल्लू बड़ा दुखी रहने लगा। एक दिन वह अपनी सहेली चमगादड़ ...

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प्रेरक-प्रसंग: सुंदरता

सुंदरता

एक कौआ सोचने लगा कि पंछियों में मैं सबसे ज्यादा कुरूप हूँ। न तो मेरी आवाज ही अच्छी है, न ही मेरे पंख सुंदर हैं। मैं काला-कलूटा हूँ। ऐसा सोचने से उसके अंदर हीनभावना भरने लगी और वह दुखी रहने लगा। एक दिन एक बगुले ने उसे उदास देखा तो ...

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प्रेरक-प्रसंग: मुश्किलों से सीखें

मुश्किलों से सीखें

एक व्यक्ति अपने गधा को लेकर शहर से लौट रहा था । गलती से वह गधा पैर खिसकने के कारण सीधे एक गहरे गढ़े में गिर गया । उसे निकलने के लिए उस व्यक्ति ने पूरा कोशिश किया परन्तु वह उस गधे को निकाल नहीं पाया । जब उस व्यक्ति को ...

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प्रेरक-प्रसंग: श्रद्धा और विश्वास

श्रद्धा और विश्वास

एक समय शिवजी महाराज, पार्वती के साथ हरिद्वार में घूम रहे थे। पार्वती जी ने देखा कि सहस्त्रों मनुष्य गंगा में नहा-नहाकर “हर-हर गंगे” कहते चले जा रहे हैं परंतु प्राय: सभी दुखी और पाप परायण हैं। तब पार्वती जी ने बड़े आश्चर्य से शिवजी से पूछा कि “हे देव! ...

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