प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग-पाप का गुरु कौन?

पंडित जी

एक पंडित जी कई वर्षों तक काशी में शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद अपने गांव लौटे। गांव के एक किसान ने उनसे पूछा, पंडित जी आप हमें यह बताइए कि पाप का गुरु कौन है? प्रश्न सुन कर पंडित जी चकरा गए, क्योंकि भौतिक व आध्यात्मिक गुरु तो होते ...

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प्रेरक प्रसंग- सरलता ही जीवन में भक्ति का मार्ग बनती है…

motivational stories

एक आलसी लेकिन भोलाभाला युवक था आनंद। दिन भर कोई काम नहीं करता बस खाता ही रहता और सोता रहता। घर वालों ने कहा चलो जाओ निकलो घर से, कोई काम धाम करते नहीं हो बस पड़े रहते हो। वह घर से निकल कर यूं ही भटकते हुए एक आश्रम ...

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प्रेरक प्रेसंग

prerak prasang

एक नवदीक्षित शिष्य ने अपने गुरु के साथ कुछ दिन व्यतीत करने के बाद एक दिन पूछा-  गुरुदेव, मेरा भी मन करता है कि आपकी ही तरह मेरे भी कई शिष्य हों और सभी मुझे भी  आप जैसा ही मान-सम्मान दे। गुरु ने मंद-मंद मुस्कुराते हुए कहा- कई वर्षों की ...

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प्रेरक प्रसंग- क्या है जीवन जीने की कला…

प्रेरक प्रसंग

एक संत ने एक विश्व-विद्यालय आरंभ किया। इस विद्यालय का प्रमुख उद्देश्य था ऐसे संस्कारी युवक-युवतियों का निर्माण जो समाज के विकास में सहभागी बन सकें। एक दिन उन्होंने अपने विद्यालय में एक वाद–विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया। जिसका विषय था – “जीवों पर दया एवं प्राणिमात्र की सेवा।” निर्धारित तिथि को तयशुदा वक्त पर विद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में प्रतियोगिता आरंभ हुई।किसी छात्र ने सेवा के लिए संसाधनों की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि हम दूसरों की तभीसेवा कर सकते हैं जब हमारे पास उसके लिए पर्याप्त संसाधन हों। वहीं कुछ छात्रों की यह भीराय थी कि सेवा के लिए संसाधन नहीं, भावना का होना जरूरी है। इन्वेस्टर्स समिट की तर्ज पर अब वेलनेस समिट इस तरह तमाम प्रतिभागियों ने सेवा के विषय में शानदार भाषण दिए। आखिर में जब पुरस्कारदेने का समय आया तो संत ने एक ऐसे विद्यार्थी को चुना, जो मंच पर बोलने के लिए ही नहींआया था। यह देखकर अन्य विद्यार्थियों और कुछ शैक्षिक सदस्यों में रोष के स्वर उठने लगे। संत ने सबको शांत कराते हुए बोले, ‘प्यारे मित्रो व विद्यार्थियो, आप सबको शिकायत है कि मैंने ऐसेविद्यार्थी को क्यों चुना, जो प्रतियोगिता में सम्मिलित ही नहीं हुआ था। दरअसल, मैं जाननाचाहता था कि हमारे विद्यार्थियों में कौन सेवाभाव को सबसे बेहतर ढंग से समझता है। इसीलिए मैंने प्रतियोगिता स्थल के द्वार पर एक घायल बिल्ली को रख दिया था। आप सब उसीद्वार से अंदर आए, पर किसी ने भी उस बिल्ली की ओर आंख उठाकर नहीं देखा। यह अकेलाप्रतिभागी था, जिसने वहां रुक कर उसका उपचार किया और उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़आया। सेवा–सहायता डिबेट का विषय नहीं, जीवन जीने की कला है। जो अपने आचरण से शिक्षा देने का साहस न रखता हो, उसके वक्तव्य कितने भी प्रभावी क्यों न हों, वह पुरस्कार पाने के योग्य नहीं है।‘ https://www.youtube.com/watch?v=7QTF7VFhz9c =>

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प्रेरक प्रसंग: सफलता का रास्ता उसी को मिलता है जो…

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एक बार की बात है, एक निःसंतान राजा था, वह बूढा हो चुका था और उसे राज्य के लिए एक योग्य उत्तराधिकारी की चिंता सताने लगी थी। योग्य उत्तराधिकारी के खोज के लिए राजा ने पुरे राज्य में ढिंढोरा पिटवाया कि अमुक दिन शाम को जो मुझसे मिलने आएगा, उसे ...

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प्रेरक प्रसंग : भीड़ में पहचान…

प्रेरक प्रसंग

यूनान में झांथस नाम का एक बहुत ही धनवान व्यक्ति था। उन दिनों गुलामी की प्रथा प्रचलन में थी। बुद्धिमान ईसप उसका गुलाम था। वह बहुत ही समझदार व होशियार था। एक बार झांथस ने ईसप से कहा, ‘मुझे हौज पर स्नान करने जाना है। जरा देखकर आओ, वहां कितने ...

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19 साल बाद आये इस संजोग में राखी बांधना होगा फलदायी…

  हर साल सावन मास की पूर्णिमा का इंतजार हर बहन को रहता है।क्योंकि इस बहने अपने भाईयों के हाथो में रक्षासूत्र बांध कर उसकी लंबी उम्र और सुख की कामना ईश्वर से करती हैं और अपनी रक्षा का वचन लेती है इस बार स्वतंत्रता दिवस यानीकि 15 अगस्त को ...

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प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग

एक नवदीक्षित शिष्य ने अपने गुरु के साथ कुछ दिन व्यतीत करने के बाद एक दिन पूछा-  गुरुदेव, मेरा भी मन करता है कि आपकी ही तरह मेरे भी कई शिष्य हों और सभी मुझे भी  आप जैसा ही मान-सम्मान दे। गुरु ने मंद-मंद मुस्कुराते हुए कहा- कई वर्षों की ...

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प्रेरक प्रसंग

प्रेरक प्रसंग

मैंने जब से इस बात पर विश्वास करना शुरू किया है कि “मेहनत कभी बेकार नहीं जाती” तब से “मेरी मेहनत कभी बेकार नहीं गयी” और शायद इसी विश्वास के कारण मैं आज यह लेख लिख पा रहा हूँ| महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन (Thomas Alva Edison) बहुत ही मेहनती एंव ...

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प्रेरक प्रसंग

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एक बार की बात है, एक निःसंतान राजा था, वह बूढा हो चुका था और उसे राज्य के लिए एक योग्य उत्तराधिकारी की चिंता सताने लगी थी। योग्य उत्तराधिकारी के खोज के लिए राजा ने पुरे राज्य में ढिंढोरा पिटवाया कि अमुक दिन शाम को जो मुझसे मिलने आएगा, उसे ...

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