खुला जिन्ना का बड़ा राज, नापक मंसूबो के चलते करवा दिया भारत-पाकिस्तान का बंटवारा

 

खुला जिन्ना का बड़ा राजनई दिल्ली। मोहम्मद अली जिन्ना बीसवीं सदी के प्रमुख राजनीतिज्ञ थे जिन्हें पाकिस्तान के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। जिन्ना वो मुस्लिम लीग के नेता थे जो आगे चलकर पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल बने।

पाकिस्तान में, उन्हें आधिकारिक रूप से कायदे-आज़म और बाबा-ए-कौम यानी राष्ट्रपिता के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान हर साल 11 सितंबर को अपने संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की पुण्यतिथि मनाता है। उनकी मौत टीबी से हुई थी।

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उस समय गंभीर मानी जाने वाली जिन्ना की इस बीमारी का पता बहुत चुनिंदा लोगों को ही था। इनमें जिन्ना के डॉक्टर जाल आर. पटेल और उनकी बहन फातिमा भी शामिल थीं।

जिन्ना का सबसे गहरा राज जिससे हुआ भारत पाकिस्तान का बटवारा-

जिन्ना हमेशा से पाकिस्तान का निर्माण करना चाहते थे। लेकिन वे अपने सपनों के पाकिस्तान में सिर्फ 13 महीने ही रह सके। क्योंकि 11 सितंबर,1948 को जिन्ना का निधन हो गया।

वहीं 1937 में पाकिस्तान नाम कैम्ब्रिज के एक छात्र रहमत अली ने दिया था, जिसे 1940 में मुस्लिम लीग ने मान लिया और दो राष्ट्र की मांग का प्रस्ताव पास कर दिया।

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हालंकि कई बार गांधीजी ने उनको समझाने की कोशिश किया कि अलग देश की मांग छोड़ दे लेकिन जिन्ना ने उनकी एक ना सूनी। इसके बाद पाकिस्तान एक नए रूप में सामने आया।

आखिर जिन्ना को पाकिस्तान बनाने की इतनी जल्दी क्यों थी ?

जिन्ना के अस्पताल से छूटते ही उनके दोस्त पटेल उन्हें अपने ऑफिस लेकर पहुंचे। जहां उन्होंने जिन्ना के कान में उनकी टीबी की बीमारी के बारे में उन्हें बढ़ा-चढ़ा कर बताया जिससे घबराए जिन्ना ने तुरंत पाकिस्तान बनाने का फैसला ले लिया।

वजह यह रही कि जिन्ना हमेशा से ही इतिहास में अमर होना चाहता था। जिन्ना को पता था कि भारत में ना तो उसको प्राइम मिनिस्टर की पोस्ट मिलने वाली थी और ना ही गांधी जैसा सम्मान मिलने वाला था। ये काम जिन्ना को केवल अपने नए देश में मिल सकता था, जहां उससे बड़ा या उसके कद का कोई और नेता ना हो, जबकि हिंदुस्तान में ऐसे तमाम नेता थे।

कब बना पाकिस्तान 

14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान नया देश बना और 13 महीने में तीन दिन अभी कम थे कि 11 सितंबर 1948 को जिन्ना की मौत हो गई। अगर किसी भी तरीके से जिन्ना की बीमारी का राज भारतीय नेताओं को पता चल जाता तो वो एक साल और इस बंटवारे के विवाद को खींच सकते थे। भले ही हम एक साल बाद आजाद होते लेकिन देश के टुकड़े नहीं होते और आज भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश को मिलाकर देश की सीमाएं काफी बड़ी होतीं..!

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