
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी पार्टी की छवि को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव ‘मुस्लिम परस्त’ वाली पुरानी छवि से निकलकर ‘सनातन सम्मान’ की राजनीति की ओर बढ़ रहे हैं।
सपा के इस नए रुख का केंद्र सैफई में बन रहा ‘केदारेश्वर महादेव मंदिर’ है। श्रावण मास में मंदिर का भव्य उद्घाटन होने वाला है, जिसमें देशभर के संतों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके बाद अखिलेश यादव अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने जा रहे हैं।
अखिलेश यादव अब भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को उसी की भाषा में चुनौती दे रहे हैं। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण जैसे मुद्दों पर सपा ने भाजपा पर हमला बोला है।
2024 लोकसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर भाजपा की हार ने भी विपक्ष को नई रणनीति बनाने की प्रेरणा दी है। अब देखना होगा कि अखिलेश यादव का यह ‘धार्मिक और सामाजिक संतुलन’ 2027 में कितना कारगर साबित होता है।



