पुलवामा मुद्दे के बीच में पुरानी दोस्ती को लग गई किसी की नजर!

दुनिया में जब भी दो देशों के बीच मित्रता की बात होती है तो भारत और रूस की दोस्‍ती का जिक्र जरूर होता है. रूस ने हर संकट में भारत की मदद की है लेकिन अब दोनों देशों के बीच के रिश्‍ते में खटास आने लगी है. यही नहीं, भारत ने अब रूस से हथियार खरीदना भी कम कर दिया है. यह खुलासा स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की एक रिपोर्ट में हुआ है.

पुलवामा मुद्दे

SIPRI की  ” अंतरराष्ट्रीय हथियार लेन – देन का रुख -2018″  की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों रूस का भारत को हथियार निर्यात 2009-13 और 2014-18 के बीच 42 फीसदी तक गिर गया है.

इसके मुताबिक 2009-13 के बीच भारत के कुल हथियार आयात में रूस से आयातित हथियारों का हिस्सा 76 फीसदी था जो 2014-18 में घटकर 58 फीसदी रह गया. दोनों देशों के बीच रिश्‍तों को लेकर खबर ऐसे समय में आई है जब भारत का पाकिस्‍तान से बॉर्डर पर टेंशन बढ़ा हुआ है. वहीं पाकिस्‍तान को चीन की ओर से सांकेतिक तौर पर मदद मिल रही है.

एक दूसरे को फिर चुनौती देगी चाचा-भतीजे की जोड़ी, नहीं दिख रहे अच्छे समीकरण…

रूस से कम खरीददारी के बावजूद हालां‍कि भारत दुनिया में प्रमुख हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश बना हुआ है. वहीं दुनिया के हथियार खरीददारी में भारत का हिस्सा 10 फीसदी के करीब है. वित्त वर्ष 2014-18 में अमेरिका , फ्रांस और इजरायल से भारत को हथियारों का निर्यात बढ़ा है.

रिपोर्ट की मानें तो अमेरिका और पाकिस्‍तान के बीच भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. पाकिस्तान को अमेरिका सैन्य सहायता या हथियारों की बिक्री करने से परहेज कर रहा है.  इस दौरान , अमेरिका का पाकिस्तान को हथियार निर्यात 81 प्रतिशत तक गिरा है.

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का हथियार आयात 2009-13 और 2014-18 के बीच 39 प्रतिशत घटा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014-18 में दुनिया के सबसे बड़े हथियार बेचने वाले देशों में अमेरिका , रूस , फ्रांस , जर्मनी और चीन रहे जबकि सऊदी अरब , भारत , मिस्त्र , ऑस्ट्रेलिया और अलजीरिया सबसे बड़े खरीददारों में शामिल रहे.

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