जब एसएसपी राजेश पांडेय को बनाया गया APRIL FOOL

ssp-rajesh-pandey_landscape_1459501371अप्रैल फूल, एक ऐसा दिन जिसमें कोई भी बेवकूफ बनने से शायद ही कभी बचा हो। हर कोई मौके की तलाश में रहता है कि बस किसी तरह मजाक किया जाए। ऐसा ही एक वाकया साझा किया लखनऊ के एसएसपी राजेश पांडेय ने…

मैं उस समय लखनऊ में एसपी सिटी हुआ करता था। दोपहर में वायरलेस पर एक मैसेज आया कि टाइगर महोदय हुसैनगंज चौराहा पर कई राउंउ फायरिंग हुई है।

मैसेज गंभीर अपराध का था तो सभी काम छोड़कर तुरंत मौके पर पहुंचा। गर्मी का मौसम था, ऊपर हुसैनगंज जैसे मुख्य चौराहे पर फायरिंग। पसीना पोंछते गाड़ी से उतरा।

वहां पहुंचे तो देखा कि सीओ हजरतगंज, इंस्पेक्टर भी पूरे दल बल के संग मौजूद थे। मौके पर पहुंचकर जब घटना की जानकारी पूछी तो सभी मुझे देखते ही मुस्कराने लगे। 
मैं समझ गया कि मुझे अप्रैल फूल बनाया गया है। इसके साथ ही अधीनस्थों ने मेरे हाथ में एक गुलदस्ता थमाते हुए अप्रैल फूल बोलना शुरू कर दिया। 

हां, मेरा मूड ज्यादा गर्म न हो जाए। इसे ठंडा करने के लिए लस्सी का ऑर्डर पहले ही करके रखा गया था। लस्सी पी और मुस्कराते हुए वापस आ गया। यह वाकया आज तक याद है। वैसे तो मेरे बच्चे हर साल मुझे अप्रैल फूल जरूर बनाते हैं।

इसलिए मनाया जाता FOOL’s Day

पूरी दुनिया में अलग-अलग सालों में एक अप्रैल को मूर्खतापूर्ण कृत्य किए गए। इन कामों के लिए एक अप्रैल को आने वाले सालों में सांकेतिक रूप से मूर्खों के दिन के रूप में मनाया जाने लगा। 

धीरे-धीरे इसका स्वरूप अब हल्के-फुल्के मजाक करने के दिन के रूप में बदलाव हो गया। मौजूदा समय में इस दिन को किसी से मजाक करने और बुरा नहीं मानने के रूप में देखा जाता है।

1539 में फ्लेमिश कवि डे डेने ने एक अमीर आदमी के बारे में लिखा जिसने एक अप्रैल को अपने नौकरों को मूर्खतापूर्ण कार्य करने के लिए भेजा। 

1686 में ब्रिटेन के राजा जॉन ऑब्रे ने इस दिन छुट्टी की घोषणा कर इसे मूर्खों का पवित्र दिन कहा। एक अप्रैल 1698 को कई लोगों को शेर की धुलाई दिखाने के लिए धोखे से टावर ऑफ लंदन में ले जाया गया। 

एक महत्वपूर्ण कहानी यह भी है कि मध्य काल में यूरोपीय शहरों में न्यू ईयर्स डे 25 मार्च को मनाया जाता था। फ्रांस के कुछ हिस्सों में न्यू ईयर्स सप्ताह भर चलने वाली छुट्टी थी जोकि एक अप्रैल को खत्म होती थी।

यह संभव है कि अप्रैल फूल की शुरुआत इसीलिए हुई कि जिन लोगों ने एक जनवरी को इसे मना लिया। उन लोगों ने दूसरी तिथियों को यह दिन मनाने का मजाक उड़ाया।

 
 
 
=>
LIVE TV