क्षेत्र में बडे ही सालिनता के साथ मनाया गया 14 अप्रैल

images (19)मऊ: रानीपुर 14 अप्रैल यानि भारतरत्न बाबा भीम राव अम्बेडकर का जन्म scके लोगो द्वारा जगह-जगह बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया उमती ग्रामसभा के गोपालपुर-टडवा मौजा के लोग करपिया मार्ग पर लगी बाबा साहब की मूर्ति के चाहरदिवारी व अन्दर की साफ सफाई दो दिन पहले से करके बाबा साहब को नमन कर फूल-माला चढ़ाकर पूजन अर्चन किया गया । इसी तरह खुरहट, धर्मसीपुर, बडार, खीरखाड,ताहिरपुर, पलिया, भुसुवा, रानीपुर, फतेहपुर, सोनिसा, नोहरेपुर तमाम जगहों पर बासा साहब डा0 भीम राव अम्बेडकर की 125 वी जयन्ती बडे ही धूम-धाम से मनायी गयी ।

बाबा साहब डा0 भीमराव अंबेडकर का संक्षिप्त जीवन परिचय

भारत को संविधान देने वाले महान नेता डा. भीम राव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था। डा. भीमराव अंबेडकर के पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का भीमाबाई था। अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान के रूप में जन्में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जन्मजात प्रतिभा संपन्न थे।

डा०भीमराव अंबेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था जिसे लोग अछूत और बेहद निचला वर्ग मानते थे। बचपन में भीमराव अंबेडकर (Dr.B R Ambedkar) के परिवार के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। डा०भीमराव अंबेडकर के बचपन का नाम रामजी सकपाल था. अंबेडकर जी के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्य करते थे और उनके पिता ब्रिटिश भारतीय सेना की मऊ छावनी में सेवा में थे। भीमराव के पिता हमेशा ही अपने बच्चों की शिक्षा पर जोर देते थे।
1894 में भीमराव अंबेडकर जी के पिता सेवानिवृत्त हो गए और इसके दो साल बाद, अंबेडकर जी की मां की मृत्यु हो गई. बच्चों की देखभाल उनकी चाची ने कठिन परिस्थितियों में रहते हुये की। रामजी मालोजी सकपाल के केवल तीन बेटे, बलराम, आनंदराव और भीमराव और दो बेटियाँ मंजुला और तुलासा ही इन कठिन हालातों मे जीवित बच पाए। अपने भाइयों और बहनों मे केवल अंबेडकर जी ही स्कूल की परीक्षा में सफल हुए और इसके बाद बड़े स्कूल में जाने में सफल हुये। अपने एक देशस्त ब्राह्मण शिक्षक महादेव अंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे के कहने पर अंबेडकर जी ने अपने नाम से सकपाल हटाकर अंबेडकर जोड़ लिया जो उनके गांव के नाम “अंबावडे” पर आधारित था।
8 अगस्त, 1930 को एक शोषित वर्ग के सम्मेलन के दौरान अंबेडकर जी ने अपनी राजनीतिक दृष्टि को दुनिया के सामने रखा, जिसके अनुसार शोषित वर्ग की सुरक्षा उसकी सरकार और कांग्रेस दोनों से स्वतंत्र होने में है।

शोषित वर्ग के सम्मेलन के दौरान अंबेडकर जी ने अपनी राजनीतिक दृष्टि अपने विवादास्पद विचारों, और गांधी जी और कांग्रेस की कटु आलोचना के बावजूद अंबेडकर जी की प्रतिष्ठा एक अद्वितीय विद्वान और विधिवेत्ता की थी जिसके कारण जब, 15 अगस्त, 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार अस्तित्व में आई तो उसने अंबेडकर जी को देश का पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। 29 अगस्त 1947 को अंबेडकर जी को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना के लिए बनी संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया।

14 अक्टूबर, 1956 को नागपुर में अंबेडकर जी ने खुद और उनके समर्थकों के लिए एक औपचारिक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया। अंबेडकर जी ने एक बौद्ध भिक्षु से पारंपरिक तरीके से तीन रत्न ग्रहण और पंचशील को अपनाते हुये बौद्ध धर्म ग्रहण किया। 1948 से अंबेडकर मधुमेह से पीड़ित थे. जून से अक्टूबर 1954 तक वो बहुत बीमार रहे इस दौरान वो नैदानिक अवसाद और कमजोर होती दृष्टि से ग्रस्त थे। 6 दिसंबर 1956 को अंबेडकर जी की मृत्यु हो गई। अम्बेडकर जी द्वारा किये गये कार्य हमेशा यह देश याद रखेगा। बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर जी कि 125 वीं जयन्ती के सुअवसर पर उनके प्रति कृतज्ञता ब्यक्त कर सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते हैँ ।

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