अमृतधारा दिलाए हृदय-रोग जैसी अनेक बीमारियों से छुटकारा

गर्मी के मौसम में गर्मी की तपिश, लू, धूल भरी हवायें और फिर मानसून सीजन में खान-पान में गड़बड़ी से हैजा, दस्त, बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द, मुंह के छाले. बदहजमी आदि कई बीमारियाँ घेर लेती हैं। कई बार रात  के समय ऐसी परेशानी हो जाती है तो ऐसी अवस्था में फ़ौरन राहत के लिए क्या किया जाए यह कई बार समझ में नहीं आता है | ऐसे में घरेलू औषधियों में अमृतधारा रामबाण दवा की तरह इन सभी समस्याओं को दूर करने में सहायक सिद्ध होती है। इसकी दो-चार बूंदें आधा गिलास सादे पानी में डालकर पीने से ही तुरन्त आराम मिलता है। सिरदर्द हो, या कोई मधुमक्खी, ततैया काट ले तो भी इसे लगाने से ठीक हो जाता है। गले में इन्फेक्शन होने पर इसके गरारे करना उपयोगी हैं। अमृतधारा एक सरल, साधारण, सस्ती, सुगमता से मिलनेवाली दवा है। इसे घर में तैयार करना भी आसान है।

अमृतधारा दिलाए हृदय-रोग जैसी अनेक बीमारियों से छुटकारा

अमृतधारा के फायदे तथा इसे बनाने की विधि

अमृत धारा हर्बल मेडिसिन

  • एक साफ शीशी में देशी कपूर 15 ग्राम, अजवायन के फूल 15 ग्राम, तथा पोदीना के फूल 15 ग्राम, एक-एक करके डालें। मिलते ही तरल रूप धारण कर अमृतधारा बन जाएगा। यदि इस ढक्कनबंद शीशी में दो ग्राम लौंग का तेल भी मिला दें तो यह अमृतधारा बहुत प्रभावी हो जाएगा। प्लास्टिक की शीशी में इसे न रखें।

इसे बनाने की दूसरी विधि :-

  • पिपरमिंट 10 ग्राम,
  • अजवायन का सत 10 ग्राम,
  • दालचीनी का सत छह ग्राम,
  • कपूर 10 ग्राम,
  • लौंग का सत छह ग्राम,
  • छोटी इलायची का सत छह ग्राम लेकर सबको मिलाकर एक शीशी में अच्छी तरह बंद करके रख लें यह औषधि एक दो-दिन में तैयार हो जाती है। इसे दो बूंद की मात्रा में पानी में मिलाकर लेना चाहिए। यही अमृतधारा का प्रसिद्ध नुस्खा है। आप चाहे तो बाज़ार से या ऑनलाइन भी पहले से तैयार दवा खरीद सकते है

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अमृतधारा के फायदे

  • पेट के रोगों में : भोजन आसानी से न पचता हो। बदहज़मी रहती हो। उल्टी का मन होता हो। दस्त आते हों। पेट में दर्द की शिकायत हो। गैस बनती हो। एसिडिटी या खट्टी डकारें आती हों। ऐसे में खाना खाने के बाद आधी कटोरी पानी में तीन बूंद अमृतधारा डालकर पीना शुरू करें । तीन-चार दिनों में ही पूरी तरह ठीक हो जाएँगे।
  • शारीरिक कमजोरी में : एक बड़ा चम्मच गाय का मक्खन, एक छोटा चम्मच शहद तथा तीन बूंद अमृतधारा तीनों को मिलाकर रोजाना खाना शुरू करें । कमजोरी दूर होगी तथा शरीर मजबूत होगा।
  • हृदय-रोग में : यदि हृदय-रोग हो तो एक आँवले का मुरब्बा लें। इसमें तीन बूंद अमृतधारा डालें। चबा-चबा कर खाया करें।
  • पेटदर्द में : एक बताशा लें। उसमें दो बूंद अमृतधारा डालें। इसे रोगी को खिलाएँ पेटदर्द दूर होगा।
  • हैजा में : एक छोटा चम्मच प्याज का रस निकालें। इसमें दो बूंद अमृतधारा डालें। रोगी को पिलाएँ। तुरंत आराम मिलेगा।
  • सिरदर्द होने पर : यदि सिर में दर्द रहता हो तो अमृतधारा को माथे तथा कनपटियों पर मलें। आराम मिलेगा। दर्द दूर होगा।
  • खाँसी-दमा आदि में : यदि कफ, खाँसी, दमा या श्वास की कोई भी तकलीफ हो तो एक कटोरी ताजा पानी में चार बूंद अमृतधारा मिलाकर पी लें। प्रतिदिन एक या दो खुराकें ले आराम मिलेगा |
  • विक्स या बाम की तरह जुकाम होने पर किसी रुमाल पर अमृतधारा की दो तीन बूंदे छिडक कर सूंघे नाक खुलेगी और आराम भी मिलेगा |
  • ततैया, मधुमक्खी आदि के काट लेने पर अमृतधारा की दो-तीन बूंद लगाएँ। तुरंत आराम पाएँगे।
  • मुंह के छालो पर : एक चम्मच पानी में दो बूंद अमृतधारा मिलाएँ और छाले पर लगाएँ। आराम मिलेगा।
  • किसी भी तरह के बदन दर्द में इसकी कुछ बूंदे तिल के तेल में मिलाकर लगाने से आराम मिलता है |
  • दाँतदर्द होने पर : रूई के फाहे पर अमृत धारा लगा, दाँतों में दबाएँ। दाँत का दर्द दूर होगा।

अमृतधारा सेवन की विधि

  • अमृत धारा किसी भी मौसमी बीमारी में दिन में 3-4 बार लेनी चाहिए इसे आप 4 बूंदे आधा गिलास पानी के साथ मिलाकर लें सकते हैं । उल्टी, दस्त की स्थिति में इसे थोड़ी-थोड़ी देर बाद कई बार लेना फायदेमंद है। बच्चे, बूढ़े, स्त्री, पुरुष सभी के लिए यह लाभकारी घरेलू औषधि है। गर्मी के मौसम में बिना किसी बीमारी के भी पानी में डालकर प्रयोग करने से संक्रामक रोग नहीं होते और लू आदि का भी प्रभाव नहीं होता। अगर आपको इसका स्वाद अच्छा ना लगे तो आप इसे मिसरी मिलाकर भी ले सकते है |

 

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