
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और वहां के प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद शानदार खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट में प्रस्तावित बहुचर्चित ‘नाइट सफारी और जूलॉजिकल पार्क’ प्रोजेक्ट को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की कुछ खास शर्तों के साथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।
लगभग पंद्रह सौ करोड़ रुपये की भारी लागत से तैयार होने वाला यह भव्य प्रोजेक्ट करीब पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा। यह भारत की पहली अर्बन नाइट सफारी होगी, जो न केवल राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि लखनऊ को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान भी दिलाएगी। इस पूरी परियोजना की कड़ी निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी के एक सदस्य को विशेष रूप से नियुक्त किया है, जो नियमित रूप से साइट का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेंगे।
पर्यावरण सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कोर्ट ने विकास के साथ संतुलन बनाने के कड़े निर्देश दिए हैं। इन नियमों के तहत लखनऊ चिड़ियाघर को कुकरैल में शिफ्ट करने का पुराना प्रस्ताव पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। इसके अलावा, वन क्षेत्र के बीच से गुजरने वाली सड़क अब चार लेन की बजाय सिर्फ दो लेन की ही बनाई जाएगी। पर्यावरण को किसी भी संभावित नुकसान से बचाने के लिए एडवेंचर जोन से ट्राम सेवा और नाइट फॉरेस्ट एक्सपीरियंस जैसी व्यावसायिक गतिविधियों को भी हटा दिया गया है।
अदालत में सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं ने इस प्रोजेक्ट पर अपनी आपत्ति जताई थी। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण की आड़ में विकास कार्यों को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अदालत को पूरा भरोसा दिलाया है कि वह सीईसी की सभी शर्तों का सख्ती से पालन करेगी। निश्चित तौर पर यह नई नाइट सफारी लखनऊ के आर्थिक और पर्यटन विकास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।



