Sawan Shivratri 2018: आज है सावन महीने की शिवरात्रि, जानें पूजा की विधि और महत्व

आज है सावन मास की शिवरात्रि । यह हर साल सावन के महीने में ही मनाई जाती है। सावन साल का पांचवां महीना होता है। हिन्दू धर्म में सावन के महीने के साथ-साथ सावन की शिवरात्रि का भी काफी महत्व है। अपने देव शिव को प्रसन्न करने के लिए यह सबसे अच्छा दिन होता है। शिवरात्रि का इंतजार भक्त जन  पूरे साल बड़े ही उत्साह के साथ करते हैं। भोले को प्रसन्न करने के लिए ही भक्त कांवड़ यात्रा करते हैं।

Shivaratri

तो इसलिए मनाई जाती है सावन महीने की शिवरात्रि

भगवान शिव देवो के देव महादेव कहे जाते हैं। इनको सबसे सरल और सुलझा हुआ माना जाता है। भोले को प्रसन्न करने के लिए ज्यादा मेहनत करने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। यह बस सच्ची भक्ति से ही प्रसन्न हो जाते हैं। सावन के महीने में ही कावड़ यात्रा का विशेष महत्व है। भक्त भगवान को प्रसन्न करने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं। इस यात्रा के दौरान शिव भक्त् गंगा नदी का पवित्र जल अपने कंधों पर लाकर सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव के प्रतीक शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।

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कहा जाता है कि समुद्र मथंन के बाद निकले विष को भगवान शिव से ग्रहण किया था जिसके बाद उनमें नकारात्मक ऊर्जा भर गई थी। त्रेता युग में रावण ने शिव का ध्यान किया और वह कांवड़ का इस्ते माल कर गंगा के पवित्र जल को लेकर आया। गंगाजल को उसने भगवान शिव पर अर्पित किया। इस तरह उनकी नकारात्मिक ऊर्जा दूर हो गई।

पूरे साल में 12 य 13 शिवरात्रियां पड़ती हैं। शिवरात्रि हर महीने पूर्णिमा से पहले त्रयोदशी को मनाई जाती है। वैसे शिवरात्रि हर महीने ही पड़ती है। लेकिन यह दो शिवरात्रि ही सबसे महत्व रखती है। पहली जो फागुन के महीने की महाशिवरात्रि और दूसरी सावन के महीने की शिवरात्रि। मान्यता है कि इस दिन रात में शिव की पूजा करने से भक्तों के सभी दुखों का नाथ हो जाता है। साथ ही उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। धर्म के अनुसार जो भी शिव की सच्चे मन से आराधना करता है। उन्हें भोले भंडारी सफल और खुशहाल जीवन देते हैं।

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सावन शिवरात्रि की पूजा विधि

– सावन शिवरात्रि के दिन सुबह स्नाहन करने के बाद मंदिर जाएं या घर के मंदिर में ही शिव की पूजा करें।

– मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के साथ माता पार्वती और नंदी को पंचामृत जल अर्पित करें। दूध, दही, चीनी, चावल और गंगा जल के मिश्रण से पंचामृत बनता है।

– पंचामृत जल अर्पित करने के बाद शिवलिंग पर एक-एक करके कच्चेृ चावल, सफेद तिल, साबुत मूंग, जौ, सत्तू, तीन दलों वाला बेलपत्र, फल-फूल, चंदन, शहद, घी, इत्र, केसर, धतूरा, कलावा, रुद्राक्ष और भस्म  चढ़ाएं।

– इसके बाद शिवलिंग को धूप-बत्ती दिखाएं।

– सावन की शिवरात्रि के दिन भक्तोंम को व्रत रखना चाहिए। इस दिन केवल फलाहार किया जाता है। साथ ही खट्टी चीजों को नहीं खाना चाहिए। इस दिन काले रंग के कपड़ों को पहनना वर्जित माना गया है।

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