उत्तर प्रदेश

संभल की बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद विवाद: एएसआई (ASI) की टीम आज करेगी संरक्षित भूमि के दावों की गहन जांच

उत्तर प्रदेश के संभल स्थित बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद को लेकर उठे नए विवाद के बीच आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की एक टीम विस्तृत जांच के लिए मौके पर पहुंच रही है। यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब कल्कि सेना के राष्ट्रीय संयोजक ने प्रशासन के समक्ष यह कड़ी आपत्ति जताते हुए शिकायत दर्ज कराई कि यह मस्जिद एएसआई की संरक्षित भूमि पर निर्मित है।

इस गंभीर दावे के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग तुरंत हरकत में आ गए हैं, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

विवाद का केंद्र बनी यह बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद संभल जिले के चौधरी सराय पुलिस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत स्थित है। कल्कि सेना के पदाधिकारियों द्वारा इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर जिलाधिकारी (डीएम) के समक्ष भी एक औपचारिक शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसमें जमीन के मालिकाना हक और उसके संरक्षित दर्जे को लेकर सवाल खड़े किए गए थे।

जिलाधिकारी के संज्ञान में यह मामला आने के बाद प्रशासन ने इसे पूरी गंभीरता से लिया है और दावों की सत्यता परखने के लिए एएसआई को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। शिकायतकर्ता का स्पष्ट तौर पर यह दावा है कि जिस जमीन पर वर्तमान में यह धार्मिक स्थल मौजूद है, वह मूल रूप से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकार क्षेत्र वाली राष्ट्रीय धरोहर की संरक्षित संपत्ति है।

आज होने वाली इस अहम जांच के दौरान एएसआई की टीम न केवल मस्जिद स्थल का बारीकी से भौतिक निरीक्षण करेगी, बल्कि राजस्व विभाग और पुरातत्व विभाग के तमाम ऐतिहासिक दस्तावेजों व पुराने रिकॉर्ड्स का भी गहनता से मिलान करेगी। इस जमीनी पड़ताल का मुख्य उद्देश्य तकनीकी और कानूनी रूप से यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित भूखंड का कोई भी हिस्सा वास्तव में एएसआई की संरक्षित सीमा के दायरे में आता है या नहीं।

फिलहाल पूरे क्षेत्र के लोगों और प्रशासन की नजरें इस महत्वपूर्ण जांच प्रक्रिया और उसके बाद तैयार होने वाली एएसआई की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। इसी रिपोर्ट के ठोस निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की तस्वीर साफ हो सकेगी और यह तय होगा कि प्रशासन द्वारा इस मामले में क्या आगामी कदम उठाए जाएंगे।

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