आरएसएस ने व्याख्यान श्रृंखला के लिए मुसलमानों को दिया न्यौता, गरमाई राजनीति

रिपोर्ट- अर्सलान समदी

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के व्याख्यान श्रृंखला के लिए मुसलमानों को बुलाने पर राजनीति तेज़ हो गई है। जहाँ मुसलमानों से अक्सर दूरी बनाए रखने वाले RSS ने इस बार व्याख्यान श्रंखला के लिए आमंत्रण भेजने की तैयारी शुरू करदी है। तो वहीं मुसलमानों के न्यौते को लेकर देश भर में ब्यानबाज़िया भी तेज हो गई है।

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कट्टर छवि वाले संघ के आमंत्रण पर जहाँ तमाम गैर बीजेपी नेताओं के भी पहुँचने की पूरी उम्मीद बनी हुई है तो वही ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव ज़फरयाब जिलानी के बयान ने व्याख्यान श्रृंखला के एजेंडे के खुलासे की बात कह दी है।

जिलानी का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ साम्प्रदायिक संगठन से धर्मनिरपेक्ष संस्था के रूप में अपनी छवि सुधारना चाहता है, इसके साथ ही मुसलमान दलित और ईसाई के दिल में सॉफ्ट कार्नर पैदा करने की कोशिश है जिससे संघ के प्रति उनका विरोध कम हो जाये जिसका फायदा बीजेपी को मिलेगा। जिसकी कोशिश संघ 1977 में भी कर चुका है लेकिन अपने एजेंडों और विचारधारा के चलते मेल मिलाप ज़्यादा दिन नही चल पाया और खत्म हो गया।

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यह उनकी एक रणनीति है, व्याख्यान श्रंखला के लिए जिन लोगो को आमंत्रित किया गया है यह उन लोगो को तय करना है कि वे वहाँ जाना चाहते है कि नहीं। तो दूसरी ओर दारुल उलूम फ़िरंगी महल के प्रवक्ता सुफियान निज़ामी का भी बयान सामने आया है निज़ामी कहते है कि किसी भी न्योते को मना नहीं किया जाएगा लेकिन जब तक RSS का कट्टर रवैया मुसलमानों के प्रति नहीं नर्म होता है तो इस प्रकार के इनविटेशन का मुसलमानों के लिए कोई मतलब नहीं है।

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