
मध्य प्रदेश के गुना में एक सड़क निर्माण की पुरानी मांग को लेकर स्थानीय निवासियों और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच हुई तीखी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। गुना, जो कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का संसदीय क्षेत्र भी है, वहां के लोगों ने एक गांव की ओर जा रहे मंत्री के काफिले को बीच में ही रोककर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
स्थानीय लोग हाथों में तख्तियां लिए हुए थे जिन पर ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ का स्पष्ट नारा लिखा हुआ था। इस दौरान भीड़ में से एक व्यक्ति ने मंत्री को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यह उनका अनुरोध है कि इस बार सड़क बन जानी चाहिए, अन्यथा जब चुनाव के समय वे वोट मांगने आएंगे, तो पूरी कॉलोनी का कोई भी व्यक्ति उन्हें अपना वोट नहीं देगा।
इस सीधे अल्टीमेटम और चेतावनी भरे लहजे पर ज्योतिरादित्य सिंधिया स्पष्ट रूप से नाराज नजर आए। उन्होंने उस व्यक्ति को टोकते हुए बेहद सख्त लहजे में जवाब दिया कि उनके साथ भविष्य में कभी भी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न किया जाए।
मंत्री ने वहां मौजूद सभी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका काम अपनी समस्या को एक अनुरोध या निवेदन के रूप में सामने रखना है, और उस काम को पूरा करवाना उनकी (सिंधिया की) जिम्मेदारी है। नेता और जनता के बीच हुए इस सीधे और तल्ख संवाद का वीडियो इंटरनेट पर आते ही चर्चा का विषय बन गया और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे।
हालांकि, इस तीखी बहस के कुछ ही समय बाद जनता के दबाव का सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिला। वीडियो के वायरल होने के लगभग आधे घंटे बाद ही एक सार्वजनिक कार्यक्रम के मंच से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उस विवादित सड़क के निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपये मंजूर करने की आधिकारिक घोषणा कर दी। यह धनराशि गुना के स्थानीय विधायक पन्नालाल शाक्य के विधायक निधि कोटे से स्वीकृत की गई है।
इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने जिला कलेक्टर को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानसून का मौसम खत्म होते ही सड़क निर्माण का काम बिना किसी देरी के शुरू कर दिया जाए। गौरतलब है कि गुना नगरपालिका द्वारा बुनियादी नागरिक सुविधाओं, खासकर जर्जर सड़कों की अनदेखी को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय से गहरी नाराजगी पनप रही थी, जिसका परिणाम इस उग्र विरोध प्रदर्शन के रूप में सामने आया।




