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एशियन गेम्स 2026 का भव्य आगाज: 501 भारतीय एथलीटों पर 64 साल का सूखा खत्म कर टॉप-तीन में जगह बनाने की जिम्मेदारी

एशियन गेम्स 2026 का औपचारिक उद्घाटन शनिवार को जापान के आइची और नागोया शहर में होने जा रहा है। 20वें एशियाई खेलों के इस महाकुंभ में भारत की ओर से 501 एथलीटों का एक विशाल दल हिस्सा ले रहा है, जो 36 विभिन्न खेलों में अपनी चुनौती पेश करेगा।

इस बार भारतीय दल का लक्ष्य केवल अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना ही नहीं है, बल्कि पिछले 64 सालों के उस लंबे इंतजार को खत्म करना भी है, जबसे भारत पदक तालिका के शीर्ष तीन स्थानों से बाहर रहा है। हांगझोउ में हुए पिछले एशियन गेम्स में 107 पदक (28 स्वर्ण, 38 रजत, 41 कांस्य) जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम अब उस आंकड़े को पीछे छोड़कर एक नया मुकाम हासिल करने के इरादे से मैदान में है।

साल 1951 में नई दिल्ली से शुरू हुआ एशियाई खेलों का यह सफर अपने 75वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलने वाले इस 16 दिवसीय आयोजन में 45 देशों के लगभग 11,000 से अधिक एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। कुल 43 खेलों में 469 मेडल इवेंट्स और 1,407 पदकों के लिए होने वाली यह प्रतिस्पर्धा इसे ओलंपिक से भी बड़ा आयोजन बनाती है।

इस बार का आयोजन केवल नागोया तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी टोक्यो और ओसाका जैसे प्रमुख जापानी शहर भी इन खेलों की मेजबानी कर रहे हैं। जापान इससे पहले 1958 (टोक्यो) और 1994 (हिरोशिमा) में भी मेजबानी कर चुका है।

भारत के लिए यह संस्करण कई मायनों में बेहद अहम है। 501 खिलाड़ियों के दल में इस बार 234 महिला एथलीट शामिल हैं, जो कुल दल का करीब 47 प्रतिशत हिस्सा हैं। भारतीय टीम की सबसे बड़ी चुनौती 1982 से लगातार नंबर-1 पर काबिज चीन और पिछले खेलों में दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे जापान और दक्षिण कोरिया को पछाड़ना है। इसके लिए भारत को अपने स्वर्ण पदकों की संख्या में भारी इजाफा करना होगा। अगर भारतीय दल इस बार टॉप-तीन में जगह बनाने में कामयाब रहता है, तो साल 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की भारत की दावेदारी वैश्विक स्तर पर और भी अधिक मजबूत हो जाएगी।

इस बार का भारतीय दल अनुभव और युवा जोश का एक बेहतरीन मिश्रण पेश कर रहा है। एक तरफ जहां पीवी सिंधु, मीराबाई चानू, लवलीना बोरगोहेन, मनु भाकर और तजिंदरपाल सिंह तूर जैसे दिग्गजों पर देश को पदकों की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर साक्षी चौधरी, अनाहत सिंह, सुजीत कलकल और वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा चेहरे भी दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए तैयार हैं।

इसके अलावा, तीरंदाजी, हॉकी, सेलिंग, स्क्वैश, सर्फिंग, टेनिस और ट्रायथलॉन जैसे सात खेलों के नतीजे सीधे लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के क्वालिफिकेशन से जुड़े हैं, जिससे इन स्पर्धाओं का महत्व और बढ़ गया है।

इन एशियाई खेलों में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA), पैडल सर्फिंग, वर्चुअल ताइक्वांडो, टेकबॉल और ई-स्पोर्ट्स जैसे नए और रोमांचक खेलों को शामिल किया गया है। एशियन गेम्स के इतिहास पर नजर डालें तो एथलेटिक्स, निशानेबाजी और कुश्ती जैसे खेलों में भारत का दबदबा हमेशा से रहा है।

अकेले एथलेटिक्स में भारत ने अब तक सर्वाधिक 283 पदक जीते हैं, जबकि निशानेबाजी में 80 और कुश्ती में 65 पदक भारत के नाम रहे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि यह नया दल जापान की धरती पर भारत के खेल इतिहास का नया स्वर्णिम अध्याय कैसे लिखता है।

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