उत्तराखंड

उत्तराखंड में कुदरत का कहर: भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, 172 सड़कें बंद, आपदाओं में अब तक 54 की मौत

उत्तराखंड में सितंबर महीने के पहले सप्ताह में भी भारी बारिश का सिलसिला थमने वाला नहीं है। मौसम विज्ञान केंद्र ने दो सितंबर के लिए देहरादून, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में मूसलाधार बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी गरज के साथ आकाशीय बिजली गिरने और बारिश के बेहद तीव्र दौर की आशंका जताई गई है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता और पर्यटकों से विशेष अपील की है कि वे उफनते नदी-नालों के आसपास जाने से बचें और बिजली चमकने के दौरान पूरी तरह से सुरक्षित व पक्के स्थानों पर ही शरण लें।

लगातार हो रही इस मूसलाधार बारिश के कारण पूरे प्रदेश में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और आवागमन का भारी संकट खड़ा हो गया है। भूस्खलन और मलबा आने की वजह से राज्य में दो राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) सहित कुल 172 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं। मार्गों के अवरुद्ध होने का सबसे ज्यादा असर नैनीताल जिले में दिखा है, जहां 40 सड़कें बाधित हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा में 23, चमोली में 17, देहरादून और टिहरी में 15-15, उत्तरकाशी में 14, पौड़ी और पिथोरागढ़ में 12-12, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग में 11-11 तथा चंपावत में दो सड़कें बंद होने से स्थानीय लोगों और पहाड़ का सफर कर रहे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

पिछले चौबीस घंटों के बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा 180 मिलीमीटर बारिश सितारगंज में दर्ज की गई है। इसके अलावा नैनीताल के चोरगलिया में 154 मिलीमीटर, देहरादून के मालदेवता में 133 मिलीमीटर, अल्मोड़ा में 107 मिलीमीटर, चंपावत में 105 मिलीमीटर और पिथौरागढ़ के देवलथल में 90 मिलीमीटर बारिश हुई है। इस लगातार बारिश की वजह से राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर खौफनाक तरीके से बढ़ गया है।

उत्तरकाशी में भागीरथी, चमोली में नंदाकिनी व पिंडर, रुद्रप्रयाग में अलकनंदा व मंदाकिनी तथा हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा मंडराने लगा है और प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

इस साल अप्रैल महीने से लेकर अब तक उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं ने बुनियादी ढांचे और जनजीवन दोनों को गहरे घाव दिए हैं। विभिन्न आपदाओं और हादसों के कारण प्रदेश में अब तक 54 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिनमें से दस लोगों की जान वन्यजीवों के हमले में गई है।

इन प्राकृतिक और आकस्मिक घटनाओं में 49 लोग घायल भी हुए हैं। बारिश और भूस्खलन से मकानों को भी व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचा है। पूरे राज्य में 23 भवन पूरी तरह से जमींदोज होकर नष्ट हो गए हैं, 68 मकानों को अत्यधिक क्षति पहुंची है और 1239 भवनों को आंशिक रूप से नुकसान हुआ है।

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