इन नन्हें बच्चों की अनोखी प्रतिभा को जानकर, सब दबा लेते हैं दांतों तले उँगलियाँ

रिपोर्ट- राहुल कटियार
कानपुर| बच्चे हैं या सुपर कंप्यूटर ? आंखे बंद कर सबकुछ देखने वाले बच्चे
बंद आंखों से भी ये बच्चे कर लेते हैं पढ़ाई, ब्रेन बूस्टर की मदद से बच्चे कर रहे कमाल

इन नन्हें बच्चों की अनोखी प्रतिभा को जानकर, सब दबा लेते हैं दांतों तले उँगलियाँ

आज हम आपके लिए लाए हैं एक ऐसा फॉर्मूला जो आपके बच्चों को जीनियस बना सकता है,साथ ही हम आपको ऐसेसुपर जीनियस बच्चों से भी मिलवाएंगे जिन्हें देखकर आप भी कहेंगे कि ये बच्चे हैं या सुपर कंप्यूटर।

जी हां आंख बंद करकेकिताब पढ़ने की बात हो या फिर किसी भी नोट का नंबर और रंग बताने की कला , किसी कार्ड शीट को बस छूते ही उसकारंग बता देना कानपुर के बच्चे कुछ ऐसे ही हैरत भरे कारनामे दिखा रहे हैं।

इन नन्हें बच्चों की अनोखी प्रतिभा को जानकर, सब दबा लेते हैं दांतों तले उँगलियाँ

आज जो आपके सामने होगा उसे देखकर यकीन करना मुश्किल होगा । ये बच्चे जो करेंगे उसे देखकर शायद कंप्यूटर भी डर जाएगा।

देखिए इन बच्चों को ये क्या कर रहे हैं-

चाहत बिलाबोंग स्कूल की क्लास थर्ड की स्टूडेंट हैं अपनीआंखों पर पट्टी बांधकर भी किताब पढ़ने का हुनर ये छोटी सी बच्ची रखती है।

यही नहीं चाहत के हाथ में बंद किताब देकर उन्हें किताब के अंदर छपी तस्वीर के बारे में बस थोड़ा सा बता दिया जाए तो ये बच्ची किताब के पन्ने पलटकर उस तस्वीर को ढूंढकर सामने रख देती है। ऐसा ही कुछ संकल्प पटेल और सना रामनानी भी कर के दिखाते हैं।

इनकी आंखों पर पट्टी बांधकर उसके हाथ में कोई भी कार्ड थमा दीजिए ये पलक झपकते ही इस कार्ड का कलर और उस पर लिखे शब्दों को तुरंत पढ़कर बता देते हैं।

इन नन्हें बच्चों की अनोखी प्रतिभा को जानकर, सब दबा लेते हैं दांतों तले उँगलियाँ
बच्चों की इस जादुई काबिलियत को देखकर पेरेंट्स हैरान भी हैं और खुश भी। उनका कहना है कि ब्रेन बूस्टर सेट्रेनिंग के बाद उनके बच्चे वो करके दिखा रहे हैं जो सुनने में असंभव सा लगता है।

पेरेंट्स की माने तो ट्रेनिंग के बाद उनकेबच्चों के बिहेवियर में काफी बदलाव आया है। अब बच्चे हैरान करने वाले कारनामो के साथ ही पॉजिटिव सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

दरअसल ये कोई चमत्कार नहीं है ये एक पद्धति है जिसे ब्रेन एक्टिवेशन कहा जाता है। ये एक ऐसा फॉर्मूला हैजिससे राइट ब्रेन एक्टिव होकर पूरी तरह से काम करना शुरू कर देता है। मेडीटेशन और लगातार अभ्यास की इसमें जरूरत होती है।

इन नन्हें बच्चों की अनोखी प्रतिभा को जानकर, सब दबा लेते हैं दांतों तले उँगलियाँ

ब्रेन एक्टिवेशन के जरिए मस्तिष्क का साधारण से ज्यादा उपयोग किया जा सकता है। ब्रेन के एक्टिव होने से मनुष्य अपने सेंस को विकसित कर सकता है और किसी भी वस्तु या मनुष्य को आंखें बंदकर उसके स्पर्श से बता सकता है।

ब्रेनबूस्टर के रीजनल डायरेक्टर और ट्रेनर बलराज सिंह का कहना है कि ट्रेनिंग के जरिए ब्रेन को एक्टिव किया जाता है।
जिससेब्रेन पावर बढ़ती है। 5 से 6 महीने की ट्रेनिंग के बाद बच्चे एडवांस स्थिति में आकर आंखों पर पट्टी बांधकर पढ़ सकते हैं और रंग महसूस कर सकते हैं।

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ये एक जैपनीज तकनीक है जो 5 साल से 15 साल तक के बच्चों के लिए ये होती है। इसेफोटोग्राफिक मैमोरी कहते हैं। इसमें कंसन्ट्रेशन पावर का यूज किया जाता है।
1997 से जापान के हजारों बच्चे बड़ी ही आसानी से ऐसा कर रहे हैं।

कोरिया और चाइना भी इसमें पीछे नहीं हैं।और अब भारत मे आपका बच्चा भी ये सब कुछ कर सकता है। बस उसके लिए ज़रूरत है तो उसे ट्रेंड करने की।

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