उत्तराखंड

महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर साइबर-स्मार्ट युवा तक, उत्तराखंड ने कल्याणकारी अभियान का किया विस्तार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षाबंधन के अवसर पर अपनी सरकार के विकास, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा पर तीन स्तंभों वाले फोकस को रेखांकित किया। राज्य पुलिस ने भी स्कूल छात्रों के लिए बड़े पैमाने पर साइबर जागरूकता अभियान शुरू किया।

चंपावत में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव-2026’ के दौरान धामी ने ₹62.97 करोड़ की विकास परियोजनाओं की घोषणा की। इस पैकेज में 50 परियोजनाएं शामिल हैं—20 पूर्ण योजनाओं (₹11.08 करोड़) का उद्घाटन और 30 नई योजनाओं (₹51.89 करोड़) का शिलान्यास। ये परियोजनाएं सड़कें, पेयजल, सिंचाई, बाढ़ व कटाव सुरक्षा तथा धार्मिक पर्यटन बुनियादी ढांचे से संबंधित हैं। मुख्यमंत्री ने धूरा में पेयजल परियोजना, नई सड़क कनेक्टिविटी, सड़क सुधार, मंदिर सौंदर्यीकरण, सस्पेंशन ब्रिज और सिंचाई संरचना सहित कई अतिरिक्त कार्यों की भी घोषणा की।

चंपावत के कई स्थानों पर कटाव और बाढ़ से निपटने के लिए वायर-क्रेट सुरक्षा कार्य होंगे। पोथ में लधिया नदी पर सस्पेंशन ब्रिज प्रस्तावित है, जबकि दियुरी-चौरा और सुखी धांग-डांडा-मीनार मोटर मार्ग जैसे सड़कों का सुधार व सरफेसिंग किया जाएगा। धामी ने कहा कि विकास केवल भौतिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। उन्होंने महिलाओं और लड़कियों के लिए अवसर पैदा करने पर जोर दिया। सरकार का लक्ष्य है कि महिलाएं शिक्षित, स्वस्थ, सुरक्षित और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हों तथा परिवार व समुदाय स्तर पर निर्णय लेने में भाग लें।

चंपावत में लड़कियों के लिए अवसर बढ़ाने वाली परियोजनाएं भी चल रही हैं—₹256.97 करोड़ का महिला खेल महाविद्यालय, इंटीग्रेटेड नर्सिंग इंस्टीट्यूट, आईटीआई लैब, कॉलेज हॉस्टल सुविधाएं और महिला प्रौद्योगिकी पार्क। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ‘लखपति दीदी’ बनी महिलाओं को और वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। स्थानीय उत्पादों के बाजार विस्तार के लिए Vocal for Local, House of Himalayas, हिलांस आउटलेट, फूड वैन और ई-रिक्शा जैसे प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। “जब महिला आत्मनिर्भर होती है, तो पूरा परिवार आत्मनिर्भर हो जाता है”—यह मुख्यमंत्री के संदेश का मूल था। उन्होंने कहा कि सशक्त परिवार मजबूत गांव, समुदाय और अंततः मजबूत उत्तराखंड बना सकते हैं।

1.75 लाख छात्रों ने साइबर जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सा लिया
युवाओं पर राज्य का फोकस उत्तराखंड पुलिस द्वारा आयोजित राज्यव्यापी वर्चुअल साइबर जागरूकता कार्यक्रम में भी दिखा। कक्षा 6 से 12 तक के 1,100 से अधिक सरकारी स्कूलों के 1.75 लाख से अधिक छात्रों ने इसमें भाग लिया। डीजीपी दीपम सेठ ने देहरादून के तपोन, नालापानी स्थित सरकारी जवाहर नवोदय विद्यालय के आईसीटी वर्चुअल क्लासरूम स्टूडियो के माध्यम से छात्रों से संवाद किया। सत्र में ऑनलाइन धोखाधड़ी, सोशल मीडिया सुरक्षा, हैकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर बुलिंग और साइबर अपराध रिपोर्टिंग सहित व्यावहारिक डिजिटल सुरक्षा पर चर्चा हुई।

साइबर अधिकारियों ने डीपफेक, डिजिटल अरेस्ट स्कैम, सेक्सटॉर्शन, नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल, ऑनलाइन उत्पीड़न और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े जोखिमों जैसे उभरते खतरों पर बात की। छात्रों को सलाह दी गई कि वे जानकारी आगे भेजने से पहले सत्यापित करें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन के बजाय शिक्षा, कौशल व नवाचार के लिए करें। डीजीपी ने कहा कि बच्चों और युवाओं की साइबर-सुरक्षित समाज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने छात्रों की मांग पर सरकारी स्कूलों में साइबर सुरक्षा, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और सड़क सुरक्षा पर नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने की घोषणा भी की। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के शिकार छात्रों को राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करने की सलाह दी गई।

अग्निवीर रोजगार प्रकोष्ठ और सैनिकों के लिए बढ़ी सहायता
सरकार ने उत्तराखंड को सैनिक कल्याण का मॉडल बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। यह पहला राज्य है जिसने चार वर्ष की सैन्य सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए समर्पित रोजगार प्रकोष्ठ स्थापित किया है। अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में 10% आरक्षण भी दिया गया है।

परम वीर चक्र विजेताओं के परिवारों के लिए अनुग्रह राशि ₹1.5 करोड़ से बढ़ाकर ₹2 करोड़ और अन्य शहीदों के आश्रितों के लिए ₹10 लाख से ₹50 लाख कर दी गई है। वीरता पुरस्कार विजेताओं की सहायता भी बढ़ाई गई है। राज्य शहीदों की कहानियों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने हेतु उनके पैतृक गांवों में प्रतिमाएं स्थापित करने की योजना बना रहा है। देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण पूरा हो चुका है और इसकी सार्वजनिक समर्पण की तैयारियां चल रही हैं। शहीदों के घरों की मिट्टी सम्मानपूर्वक स्मारक में लाई गई है, जहां उनके वीरता के किस्से भी दर्ज किए गए हैं।

प्रत्येक शहीद के एक पात्र परिवार सदस्य को सरकारी रोजगार देने की व्यवस्था है, जिसमें 28 आश्रितों को पहले ही नियुक्त किया जा चुका है। ऐसी नियुक्तियों के लिए आवेदन की अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। सेवारत और सेवानिवृत्त कार्मिक संपत्ति खरीद (₹25 लाख तक) पर 25% स्टांप ड्यूटी रियायत के पात्र हैं। सरकार ने प्रभावित सैनिकों और पूर्व सैनिकों के परिवारों को जिला अदालतों में लंबित भूमि-धोखाधड़ी मामलों में सहायता देने का भी आश्वासन दिया है।

कुल मिलाकर ये पहलें बुनियादी ढांचे के विकास के साथ महिलाओं, छात्रों, युवाओं, सैनिकों और शहीद परिवारों के लिए लक्षित उपायों पर राज्य सरकार के जोर को दर्शाती हैं।

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