उत्तराखंड

खटीमा में चाय पर चर्चा के दौरान सीएम धामी का राहुल गांधी पर तंज: ‘कप डिस्पोजेबल हो सकता है, सोच नहीं’

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में स्थानीय लोगों के साथ चाय पीते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जातिगत बयानों पर तीखा प्रहार किया है। सीएम धामी ने कहा कि रोजमर्रा की मुलाकातों और आम बातचीत में भी जाति और भेदभाव खोजना संकीर्ण राजनीति की निशानी है।

खटीमा में डिस्पोजेबल कप में चाय की चुस्कियां लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बातचीत के दौरान उन्हें चाय के स्वाद के साथ-साथ लोगों का स्नेह और अपनापन महसूस हुआ, लेकिन इस बीच उन्हें कहीं कोई जाति नजर नहीं आई। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि चाय के एक कप में भी जाति और भेदभाव ढूंढना छोटी सोच वाली राजनीति की पराकाष्ठा है।

समाज को बांटने के बजाय जोड़ने पर हो फोकस

सीएम धामी ने कहा, “कप डिस्पोजेबल हो सकता है, लेकिन हमारी सोच इतनी डिस्पोजेबल (संकीर्ण) नहीं होनी चाहिए कि हम चाय के कप में भी जाति और राजनीति खोजने लगें।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक विमर्श समाज को बांटने या हर मुद्दे में जाति और सियासत को घुसाने पर केंद्रित नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं हमेशा से सामाजिक समरसता, भाईचारे और आपसी स्नेह का प्रतीक रही हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक संवाद में इन्हीं मूल्यों को अपनाया जाना चाहिए, खासकर तब जब अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक साथ आते हैं।

जाति के चश्मे से न देखे जाएं सामाजिक रिश्ते

सीएम धामी ने कहा कि खटीमा में स्थानीय लोगों से सीधा संवाद करने से उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक दायरे से बाहर निकलकर आम जनता के अनुभवों को समझने का मौका मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक रिश्तों को जाति या राजनीतिक जुड़ाव के संकीर्ण चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री के अनुसार, राजनीति का मुख्य उद्देश्य लोगों को एक साथ लाना और पूरे समाज से जुड़े मुद्दों पर काम करना होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि आम मेलजोल में बार-बार जाति या राजनीतिक विभाजन खोजना बेवजह के ध्रुवीकरण को बढ़ावा देता है। लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जाति के आधार पर समाज को बांटने की कोशिशें देश के व्यापक हित में नहीं हैं।

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