
उत्तर प्रदेश के उरई जिले में स्थित कालपी कोतवाली क्षेत्र के प्रसिद्ध उसरगांव देवपुरा माता मंदिर में हुई दुस्साहसिक चोरी की घटना का पुलिस ने सफलतापूर्वक पर्दाफाश कर दिया है। बीते 16 और 17 सितंबर की दरम्यानी रात अज्ञात चोरों ने इस ऐतिहासिक मंदिर को अपना निशाना बनाते हुए वहां से भारी मात्रा में पीतल के घंटे और दानपात्र का ताला तोड़कर करीब पैंतीस हजार रुपये की नकदी पार कर दी थी।
इस घटना से स्थानीय श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुराग तिवारी की शिकायत पर कालपी कोतवाली पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। घटना के जल्द खुलासे के लिए कालपी के क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में स्वॉट और सर्विलांस समेत कई पुलिस टीमों का गठन किया गया था, जो लगातार अपराधियों की सुरागकशी में जुटी थीं।
अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान के दौरान शुक्रवार को पुलिस और स्वॉट टीम का बदमाशों से आमना-सामना हो गया। खुद को घिरता देख बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक शातिर बदमाश के पैर में गोली लग गई और वह घायल होकर गिर पड़ा। घायल बदमाश की पहचान कानपुर देहात के भोगनीपुर थाना क्षेत्र के गौर गांव निवासी संदीप उर्फ नरेंद्र कुमार के रूप में हुई है, जिसे तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इसी दौरान पुलिस टीम ने घेराबंदी करते हुए संदीप के दो अन्य साथियों को भी भागने का मौका दिए बिना धर दबोचा। पकड़े गए अन्य दो आरोपियों की पहचान गौर गांव के ही बलराम और कानपुर देहात के बरौर थाना क्षेत्र स्थित अंडवा गांव निवासी लाला उर्फ लालचंद के रूप में हुई है।
पुलिस द्वारा की गई कड़ी पूछताछ में तीनों आरोपियों ने देवपुरा माता मंदिर में चोरी करने का अपना जुर्म पूरी तरह से कुबूल कर लिया है। बदमाशों ने बताया कि वे चोरी के दौरान ताला तोड़ने और कुंडा काटने के लिए भारी औजार अपने साथ रखते थे और चोरी का माल बेचकर मिलने वाले पैसों को आपस में बांट लेते थे। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर मंदिर से चुराए गए छोटे-बड़े कुल छब्बीस पीतल के घंटे और दानपात्र से उड़ाई गई रकम में से 11,995 रुपये नकद बरामद किए हैं।
इसके अलावा बदमाशों के पास से एक अवैध तमंचा, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की गई एक होंडा मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है। इनके पास से ताला और ग्रिल काटने के लिए इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण जैसे सब्बल, कटर और प्लास भी मिले हैं।
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि यह एक पेशेवर आपराधिक गिरोह है जो सुनियोजित तरीके से धार्मिक स्थलों को निशाना बनाता था। मुठभेड़ में घायल हुए मुख्य आरोपी संदीप उर्फ नरेंद्र का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ कानपुर देहात के बरौर और मूसानगर थानों में चोरी करने और चोरी का माल छिपाकर रखने से संबंधित दो आपराधिक मुकदमे पहले से ही दर्ज हैं।
फिलहाल पुलिस पकड़े गए दोनों अन्य आरोपियों, बलराम और लालचंद, की भी क्राइम कुंडली खंगाल रही है ताकि इनके द्वारा की गई अन्य वारदातों का भी खुलासा हो सके। पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है।



