Wednesday , October 17 2018

हमारे संत

ऐसा धन जिसे जनसेवा में खुलकर लगाया जाए वो लक्ष्मी का रूप होता है : मुरारी बापू जी

ऐसा धन जिसे जनसेवा में खुलकर लगाया जाए वो लक्ष्मी का रूप होता है : मुरारी बापू जी

बापू ने कहा कि आदमी तीन प्रकार के अपराध करता है एक आदतवश, दूसरा अनचाहा तथा तीसरा मुढ़ता के कारण। उन्होने कहा कि अगर आदमी की मानसिकता सत्य की उपासना वाली हो तो परमात्मा सभी मजबूरिया मिटा देता है। असत्य आता है तो प्रेम का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। ...

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योग, सत्य, धर्म तथा वेदों की वैज्ञानिकता का प्रचार-प्रसार होना चाहिए: बाबा रामदेव जी

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जिस व्यक्ति का आहार-विहार ठीक नहीं है, जिस व्यक्ति की सांसारिक कार्यों के करने की निश्चित दिनचर्या नहीं है। उसे योग का कोई लाभ नहीं मिल सकता।ध्यान करते समय ध्यान को ही सर्वोपरि महत्व दें।  साधक को सदा विवेक, वैराग्य के भाव में रहना चाहिए। ब्रह्मचर्य के बिना तो स्वस्थ ...

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प्यार में कभी गिरना नहीं चाहिये, प्यार में आगे बढ़ना चाहिये: श्री श्री रविशंकर

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ज्ञान बोझ है यदि वह आपके भोलेपन को छीनता है।ज्ञान बोझ है यदि वह आपके जीवन में एकीकृत नही है।ज्ञान बोझ है यदि वह प्रसन्नता नही लाता।ज्ञान बोझ है यदि वह आपको यह विचार देता है की आप बुद्धिमान है। ज्ञान बोझ है यदि वह आपको स्वतंत्र नही करता।ज्ञान बोझ ...

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चीजों को उनके ओर-छोर तक देख लेना तो अंतर्दृष्टि का प्रारंभ है : ओशो जी

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चीजों को, जैसी वे दिखाई पड़ती हैं, उनको वैसी ही मत मान लेना। उनके भीतर बहुत कुछ है | एक आदमी मर जाता है। हमने कहा, आदमी मर गया। जिस आदमी ने इस बात को यही समझ कर छोड़ दिया, उसके पास अंतर्दृष्टि नहीं है| चीजों को उनके ओर-छोर तक ...

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जहाँ तक प्रेम का सवाल है आप दिवालिया नहीं हो सकते : ओशो जी

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गहरे से देखो, तब तुम मेजबान बन जाओगे और विचार मेहमान हो जाएंगे। और मेहमान की तरह वे सुंदर हैं, लेकिन यदि तुम पूरी तरह से भूल जाते हो कि तुम मेजबान हो और वे मेजबान बन जाते हैं, तब तुम मुश्किल में पड़ जाते हो। यही नर्क है। तुम ...

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भाग्य को बनाना बिगाड़ना अपने ही हाथों में: श्री मोरारी जी बापू

morari ji bapu

यदि हम अपने जीवन में परमानन्द की अनुभूति करना चाहते हैं तो इसके लिए हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना होगा। भाग्य का रोना रोने से कोई लाभ नहीं होने वाला है जब तक हम उसके लिए प्रयास नहीं करते हैं। भाग्य को बनाना और बिगाड़ना सब हमारे ही हाथों ...

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प्रेम कोई भावना नहीं है, यह आपका अस्तित्व है: श्री श्री रविशंकर

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मैं आपको बताता हूँ, आपके अन्दर एक परम आनंद का फव्वारा है, प्रसन्नता का झरना है। आपके मूल के भीतर सत्य, प्रकाश और प्रेम है, वहां कोई अपराध बोध नहीं है, वहां कोई डर नहीं है। मनोवैज्ञानिकों ने कभी इतनी गहराई में नहीं देखा। जिसे तुम चाहते हो उससे प्रेम ...

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ध्यानपूर्वक इच्छाओं के निर्वहन से सिद्ध होंगे वांछित मनोरथ, मिलेगा आत्मज्ञान

jaggi vashudev

अगर आप इसके बारे में जागरूक नहीं हैं, तो मैं यह बताना चाहूँगा कि 90 प्रतिशत लोगों के लिए उनके आत्मज्ञान प्राप्त करने का वक्त और उनके शरीर छोडने का वक्त एक ही होता है। केवल वही लोग जो शरीर के दाँव-पेंच जानते हैं, जो इस शरीर रूपी यंत्र के ...

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चित्र नहीं चरित्र की पूजा करें : बाबा रामदेव

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प्रसन्नता अंदर से आती है, ना कि बाहर से।  बुढ़ापा कोई उम्र नहीं है, यह तो हमारी सोच का परिणाम है। विचारों में शुद्धीकरण ही मात्र एक नैतिकता है। आरोग्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। विचारों और विश्वास में शुद्धता व नियंत्रण ही सफलता की  बाधा  है। कर्म ही मेरा धर्म ...

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कोई मूर्तिवाला प्रभु नहीं है, जीवन ही है वास्तविक प्रभु :ओसो

ओसो संत

ध्यान की गहराइयों में वह किरण आती है, वह रथ आता है द्वार पर जो कहता है : सम्राट हो तुम, परमात्मा हो तुम, प्रभु हो तुम, सब प्रभु है, सारा जीवन प्रभु है। जिस दिन वह किरण आती है, वह रथ आता है, उसी दिन सब बदल जाता है। ...

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