
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्र निर्माण, कृषि और संकट के समय राहत कार्यों में सिख और पंजाबी समुदाय के महत्वपूर्ण योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। गुरुवार को रुद्रपुर के एक होटल में आयोजित ‘पंजाबी गौरव सम्मेलन’ में सीएम धामी और वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन नवीन ने शिरकत की, जहां सिख समाज के प्रतिनिधियों ने उन्हें ‘सिरोपा’ भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री के पहुंचते ही पूरा माहौल “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह” के जयकारों से गूंज उठा। इस सम्मेलन में सीएम धामी ने सिख समाज के इतिहास, उनके साहस और उनके समर्पण को लेकर कई अहम बातें साझा कीं।
इस कार्यक्रम के मुख्य बिंदु और मुख्यमंत्री धामी के संबोधन की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
1. सिख गुरुओं का जीवन है प्रेरणा का महान स्रोत
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन पंजाबी समुदाय की महान परंपराओं, संस्कृति, मूल्यों, साहस और देशभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं का जीवन हमें अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े होने, जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा करने, मानवता की रक्षा करने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है।
2. राष्ट्र निर्माण और तराई क्षेत्र के विकास में अग्रणी भूमिका
सीएम धामी ने सिख और पंजाबी समुदाय की कड़ी मेहनत, ईमानदारी और उद्यमशीलता को सलाम किया। उन्होंने उनके योगदान को विस्तार से बताते हुए कहा:
- देश की रक्षा और कृषि: सीमाओं पर देश की रक्षा करने से लेकर खेतों में अन्न उगाने तक में सिख समाज का योगदान अद्वितीय है।
- व्यापार और संकट प्रबंधन: उद्योग-व्यापार को मजबूत करने और किसी भी राष्ट्रीय आपदा या संकट के समय लंगर व राहत कार्यों के जरिए आगे आने में यह समाज हमेशा अग्रणी रहा है।
- तराई का विकास: उत्तराखंड के तराई क्षेत्र के विकास और यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पंजाबी समुदाय ने एक मजबूत आधारशिला रखी है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने तराई के विकास में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत के ऐतिहासिक योगदान को भी याद किया और युवाओं से गुरुओं के आदर्शों, अनुशासन और देशभक्ति को अपनाने का आह्वान किया।
3. सिख परंपराओं के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने सिख धर्म की आस्था, उनके बलिदानों और महान परंपराओं को हमेशा सर्वोच्च सम्मान दिया है। उन्होंने इसके कुछ प्रमुख उदाहरण दिए:
- ऐतिहासिक करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण और उसे खोलना।
- गुरुद्वारों में चलने वाले पवित्र ‘लंगर’ को टैक्स (GST) से पूरी तरह मुक्त करना।
- गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों की शहादत को नमन करते हुए ‘वीर बाल दिवस’ मनाने की शुरुआत करना।
4. उत्तराखंड से सिख धर्म का गहरा नाता और हेमकुंड साहिब रोपवे
उत्तराखंड के साथ सिख समुदाय के गहरे आध्यात्मिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए धामी ने कहा कि यह देवभूमि गुरु नानक देव जी और गुरु गोबिंद सिंह जी के पवित्र चरणों से धन्य हुई है।
उन्होंने श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी साझा करते हुए बताया कि गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.5 किलोमीटर लंबे रोपवे (Ropeway) के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से बुजुर्ग श्रद्धालुओं, महिलाओं और बच्चों के लिए यह दुर्गम तीर्थयात्रा बेहद आसान और सुगम हो जाएगी।



